EY में कार्यरत चार्टर्ड अकाउंटेंट की मौत के बाद कॉर्पोरेट जगत में काम के दबाव पर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारी सोशल मीडिया पर 20-20 घंटे काम और कम ब्रेक की शिकायतें शेयर कर रहे हैं।

Ernst & Young case: अर्न्स्ट एंड यंग (EY) में कार्यरत चार्टर्ड अकाउंटेंट की दुखद मौत के बाद कारपोरेट जगत में काम के बढ़ते दबाव को लेकर बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर तमाम फर्म्स और कंपनियों के कर्मचारी अपनी आपबीती भी शेयर कर रहे हैं। बिग 4 कंसल्टिंग फ़र्म के एक कर्मचारी ने अपनी शॉकिंग कहानी शेयर की है कि कैसे उन लोगों को 20-20 घंटे काम लिया जाता था। महज 15 घंटे काम का भुगतान किया जाता था।

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दरअसल, अर्न्स्ट एंड यंग (EY) में कार्यरत चार्टर्ड अकाउंटेंट 26 वर्षीय अन्ना सेबेस्टियन पेरायिल की मौत के बाद कारपोरेट जगत में हंगामा मच गया है। अन्ना EY में सिर्फ़ चार महीने से काम कर रही थीं। अन्ना की मां ने दावा किया कि अत्यधिक काम के कारण उनकी बेटी की जान चली गई।

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बिग 4 कंसल्टिंग फ़र्म के कर्मचारी ने अब खोली पोल

EY की चार्टर्ड अकाउंटेंट अन्ना सेबेस्टियन पेरायिल मौत के बाद अब कॉरपोरेट जगत में कर्मचारियों पर बढ़े प्रेशर की पोल खुलने लगी है। बिग 4 कंसल्टिंग फ़र्म के एक कर्मचारी ने अत्यधिक काम और निरंतर दबाव के अपने अनुभव साझा किए हैं। फर्म के एक पूर्व कर्मचारी जयेश जैन ने एक्स पर अपनी कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि कैसे वे और उनके अन्य साथी कर्मचारी अक्सर एक दिन में 20 घंटे तक काम करते थे जबकि केवल 15 घंटे काम का जोड़ा जाता था। उन्होंने अन्ना की स्थिति के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी कंपनियाँ अक्सर कर्मचारियों को संख्या के रूप में देखती हैं, उनकी भलाई की अनदेखी करती हैं।

एक अन्य यूजर ने बिग-4 फर्म में काम करने वाली अपनी बहन के बारे में बताया कि कैसे वह डेंटल हास्पिटल में थीं और उनके ऑफिस से काम करने के लिए लगातार प्रेशर बनाया जा रहा था। एक अन्य यूजर ने अपनी पहली नौकरी के अनुभव को याद किया कि कैसे उन्हें क्लाइंट मीटिंग में भाग लेने के लिए देर रात तक काम करने के लिए मजबूर किया गया था।

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