आरबीआई ने इन दरों को पहले जैसे ही बरकरार रखा है। रेपो रेट में बदलाव नहीं होने से बैंकों को भी समान दरों पर लोन मिलता रहेगा। ऐसा लगातार चौथी बार है, जब रिजर्व बैंक ने अपनी नीतिगत दरों में बदलाव नहीं किया है।

बिजनेस डेस्क : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने महंगे लोन से आम जनता को राहत नहीं दी है। मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि रेपो रेट और दूसरी नीतिगत दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब आम जनता को लोन की EMI पर किसी तरह की राहत नहीं दी गई है। आरबीआई ने इन दरों को पहले जैसे ही बरकरार रखा है। रेपो रेट (Repo Rate) में बदलाव नहीं होने से बैंकों को भी समान दरों पर लोन मिलता रहेगा।

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5वीं बार ब्याद दरों में बदलाव नहीं

बता दें कि लगातार पांचवी बार रिजर्व बैंक ने अपनी नीतिगत दरों में बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट 6.5 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। आरबीआई की मौद्रिक नीति में रेपो रेट न बदलने से बैंकों को पहले की तरह की लोन मिलता रहेगा। वित्त वर्ष 2024 के लिए रिजर्व बैंक ने जीडीपी का अनुमान 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है। वहीं, आरबीआई ने क्रेडिट पॉलिसी में 'विड्रॉल ऑफ अकोमोडेशन' को बरकरार रखा है।

UPI को लेकर बड़े ऐलान

  1. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि हॉस्पिटल और एजूकेशनल इंस्टीट्यूट्स के हर एक ट्रांजैक्शन के लिए अब यूपीआई की लिमिट बढ़ाकर 1 लाख से 5 लाख कर दी गई है। दोनों ही सेक्टर को इसका फायदा मिलेगा।
  2. रिकरिंग के पेमेंट के e-mandate में बदलाव की इस बैठक में सिफारिश की गई। इसके तहत रिकरिंग ट्रांजैक्शन की यूपीआई लिमिट 1 लाख रुपए प्रति ट्रांजैक्शन तक बढ़ा दी गई है। यूपीआई पेमेंट की सीमा 15 हजार रुपए से बढ़कर 1 लाख रुपए का प्रस्ताव आरबीआई गवर्नर ने रखा है। इसके तहत म्यूचुअल फंड सबस्क्रिप्शन के लिए रिकरिंग यूपीआई पेमेंट, इंश्योरेंस पॉलिसी प्रीमियम और क्रेडिट कार्ड रीपेमेंट्स के लिए यूपीआई की लिमिट बढ़ जाएगी।

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