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किसान आंदोलन में बहादुर बेटियों का जज्बा, महिलाओं की जरूरत देख 2 बहनों ने जमा दिया 'महिला किसान स्टोर'

गुरशरणजीत और हरशरणजीत नाम की दोनों बहनों ने गाजीपुर बॉर्डर पर महिला किसानों के लिए नया लेडीज ब्लॉक बनाया गया है। 100 बिस्तर वाले इस ब्लॉक में महिलाओं की अपनी दुकान भी है और टॉयलेट्स भी। 

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New Delhi, First Published Jan 25, 2021, 11:17 AM IST
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करियर डेस्क. 24 जनवरी को पूरे देश में नेशनल गर्ल चाइल्ड डे मनाया गया है। इस मौके पर हमने देश-दुनिया में काबिल लड़कियों की कहानियां जानी। अब किसान अंदोलन में अकेले के दम पर महिलाओं की मदद कर रही दो बहनों का इनोवेटिव आइडिया सामने आया है। नैनिताल की दो बहनें गाजीपुर बॉर्डर पर 'महिला किसान स्टोर' नाम से एक स्टॉल चला रही हैं जिसमें वो महिलाओं की जरूर का सामान मुहैया करवा रही हैं। स्टोर पर अब 1,000 से अधिक महिलाएं मौजूद हैं और गणतंत्र दिवस पर और अधिक लोगों के जुड़ने की उम्मीद है।

कृषि आंदोलन के चलते द‍िल्ली का गाजीपुर बॉर्डर एक छोटे कस्बे में तब्दील हो गया है। दूर-दराज से आये किसान सपरिवार यहां धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। लगातार 2 महीने से चल रहे किसान आंदोलन में भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। तो बहुत सी महिलाएं अपने घर-बार, काम-काज से दूर किसान आंदोलन में सेवादारी कर रही हैं। नारीशक्ति ने यहां पर लंगर बनाने की जिम्मेदारी भी संभाल रखी है। उन महिलाओं की जरूरत देखते हुए नैनिताल की दो बहनों ने वूमेन स्टोर रूम लगाने की सोची।  

दोनों बहनों ने समझी महिलाओं की जरूरत

गुरशरणजीत और हरशरणजीत नाम की दोनों बहनों ने गाजीपुर बॉर्डर पर महिला किसानों के लिए नया लेडीज ब्लॉक बनाया गया है। 100 बिस्तर वाले इस ब्लॉक में महिलाओं की अपनी दुकान भी है और टॉयलेट्स भी। इसके अलावा लेडिज स्टोर रूम भी बनाया गया है जहां उनकी जरूरत के सारे सामान मौजूद हैं। 

साइट पर नहीं थी महिलाओं के लिए कोई सुविधा

दोनों बहनों में से छोटी 25 साल की गुरशरणजीत बताती हैं कि, “हमने पहली बार 25 दिसंबर को साइट का दौरा किया था। हमने कुछ स्टोर देखे लेकिन उनमें सैनिटरी नैपकिन जैसी चीजें नहीं थीं। उसी समय, महिलाओं ने अभी आना शुरू किया था और हमने विशेष रूप से महिलाओं के लिए कुछ टेंट बनाने का फैसला किया।” 

भाई-पिता के साथ मिलकर बनाएं लेडीज रूम

अपने पिता और भाई के साथ मिलकर उन्होंने किसान आंदोलन में शामिल होने आई महिलाओं के लिए जरूरी सामान और बाथरूम मुहैया लगवा डाले। इस काम में उन्हें कजिन भाई-बहन और दोस्तों का भी पूरा सहयोग मिला। 

उन्होंने उन वस्तुओं का आंकलन किया जिनकी साइट पर महिलाओं को सबसे ज्यादा जरूरत थी। हरशरणजीत कौर ने कहा, “हमने खुद टेंट में रहने का फैसला किया। यहां मच्छर बहुत ज्यादा हैं जिससे महिलाओं को खुले में बाथरूम करने में बीमार होने का खतरा है। महिलाओं के लिए वॉशरूम का इस्तेमाल करना बहुत मुश्किल होता था। 

स्टोर में मौजूद है डेली यूज सामान

स्टोर में अब सैनिटरी नैपकिन और नए अंडरगारमेंट से लेकर साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट और तौलिये तक मौजूद हैं। फरीदपुर की एक महिला ने आंदोलन साइट पर ही सेनेटरी नैपकिन जैसी चीजें मिलने पर संतोष जताया उन्होंने कहा कि इस दुकान ने उन्हें आंदोलन में ज्यादा देर तक और बेफिक्र होकर जुटे रहने को बहुत आसान बना दिया है। उन्होंने महिलाओं के टेंट के करीब बाथरूम स्थापित किए हैं जिनमें लगभग 80 लोगों आ सकते हैं। 

नैनिताल में गुरुद्वारे में सेवादारी भी करती हैं दोनों बहनें

गुरशरणजीत बायोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं। वहीं हरशरणजीत आईटी सेक्टर में काम करती हैं। ये दोनों ही बहनें अब प्रोटोस्ट में स्टोर की देखभाल करती हैं। दोनों बहनें अपने होमटाउन यानि नैनिताल में गुरुद्वारे में सेवादार के रूप में भी शामिल होती हैं जहां उनके भाई और पिता लंगर लगाते हैं।

किसान बैकग्राउंड से न होकर भी सेवा में जुटी महिला

त्रिलोकपुरी से अंजू परवीन (39) ने कहा कि विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से किसानों की सेवा करना ही उनकी फुल टाइम नौकरी बन गई है। मैं किसान घर-परिवार से नहीं हूं लेकिन मैंने यहां आने और मदद करने का फैसला किया क्योंकि जो अन्न हम खाते हैं वो किसान ही देते हैं इसलिए किसानों की मदद करना हमारा फर्ज है। ”

किसानों के हक की लड़ाई में महिलाएं भी बढ़-चढ़कर शामिल हैं। धरना दे रहे किसानों के साथ महिलाएं हर कदम पर साथ खड़ी हैं। 

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