रूस के गामेलेया नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ एपिडेमायोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (RDIF) ने इस संबंध में रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि स्पूतनिक-वी वैक्सीनेशन (Vaccination) के बाद स्पूतनिक लाइट बूस्टर डोज (Sputnik V Light ) ओमीक्रोन (Omicron) वैरिएंट पर कारगर है। 

मास्को। रूस का स्पूतनिक-वी (Sputnik V) और सिंगल शॉट स्पूतनिक लाइट बूस्टर वैक्सीन (Sputnik Light V Booster) कोरोना वायरस (Coronavirus) के ओमीक्रोन वैरिएंट (Omicron Variant) के खिलाफ कारगर हैं। एक रिसर्च में यह दावा किया गया है। गामेलेया नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ एपिडेमायोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (RDIF) ने इस संबंध में रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि स्पूतनिक-वी वैक्सीनेशन के बाद स्पूतनिक लाइट बूस्टर डोज ओमीक्रोन वैरिएंट पर कारगर है। इससे गंभीर संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना के खिलाफ मजबूत सुरक्षा मिलती है। आरडीआईएफ, स्पूतनिक-वी और स्पूतनिक लाइट वैक्सीन का एक निवेशक भी है। 

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वैक्सीनेशन के छह महीने बाद किया अध्ययन
स्पूतनिक-वी ने कहा- यह अध्ययन वैक्सीनेशन के 6 महीने से अधिक समय बाद किया गया, जो स्पूतनिक-वी से लंबे समय तक मिलने वाली सुरक्षा का संकेत है। बयान में कहा गया है कि स्पूतनिक-वी ने एक मजबूत और लंबे समय तक मिलने वाले टी-सेल प्रतिक्रिया दी। स्पाइक प्रोटीन में 80 प्रतिशत एपीटोप (एंटीजेन अणु का वह हिस्सा जिससे एंटीबॉडी खुद को जोड़े रखता है) ओमीक्रोन वैरिएंट में म्यूटेशन से प्रभावित नहीं होता है। स्पूतनिक-वी द्वारा ओमीक्रोन से होने वाले संक्रमण के खिलाफ टिकाऊ सुरक्षा मुहैया करने की उम्मीद है। स्पूतनिक-वी का लंबे समय तक टिकाऊ टी-सेल 6 से 8 महीने तक डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ 80 प्रतिशत तक प्रभावी है। स्पूतनिक लाइट, एक बूस्टर के तौर पर ओमीक्रोन के खिलाफ वायरस को न्यूट्रल करता है। अध्ययन के मुताबिक बूस्टर डोज के तौर पर स्पूतनिक लाइट लगवाने वालों में ओमीक्रोन के खिलाफ न्यूट्रल करने वाली 100 प्रतिशत एंटीबॉडी विकसित हुईं और उसका उच्च स्तर दो-तीन महीने तक बना रहा। स्पूतनिक लाइट 20 देशों में रजिस्टर्ड है। 

भारत में धीमी रही स्पूतनिक की रफ्तार
स्पूतनिक वीके भारत आने के बाद उम्मीद थी कि टीकाकरण में यह तेजी लाएगा, लेकिन उत्पादन की धीमी रफ्तार, भारी कोल्ड स्टोरेज की जरूरतें, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से मंजूरी का इंतजार जैसी जरूरतों ने इस वैक्सीन की रफ्तार भारत में थाम दी। एक मई 2021 को इसे भारत में पहली बार लॉन्च किया गया था। इसके बाद दोनों डोज समय पर उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण भारत में इस वैक्सीन के रोलआउट को रोक दिया था। भारत में इस वैक्सीन का उत्पादन डाॅक्टर रेड्‌डीज कर रही है। 

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