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अपने ही पराए बनकर बिगाड़ेंगे दिग्गजों का चुनावी खेल, गुजरात में आसान नहीं इन युवा नेताओं की राह

आंदोलनकारी से माननीय बनने की चाह रखने वाले कई युवा नेताओं को गुजरात चुनाव में अपनों से ही काफी तकलीफें मिल सकती हैं।

close friends spoil the election game of veterans in gujrat election uja
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First Published Nov 4, 2022, 3:23 PM IST

अहमदाबाद(Gujrat). किसी न किसी आन्दोलन के सहारे लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने वाले गुजरात के युवा नेताओं के सामने मुश्किलें आने वाली हैं। आंदोलनकारी से माननीय बनने की चाह रखने वाले कई युवा नेताओं को इस चुनाव में अपनों से ही काफी तकलीफें मिल सकती हैं। आन्दोलन में इनके सहभागी रहे और इनके जाति समुदाय से आने वाले लोगों द्वारा इनके खिलाफ दावेदारी करने से इनकी मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर, जिग्नेश मेवाणी जैसे नेताओं की राह में उनके ही समुदाय के लोग बाधक बन रहे हैं।  


गुजरात में 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पाटीदार आंदोलन के जरिए पूरे देश में चर्चा में आने वाले आंदोलनकारी हार्दिक पटेल अब भाजपाई हो गए हैं। हार्दिक पटेल अहमदाबाद जिले की वीरमगाम सीट से बीजेपी के टिकट के लिए दावेदारी ठोंक रहे हैं। दीवाली पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर हार्दिक पटेल ने जहां अपनी मंशा साफ़ की वहीं उन्होंने टिकट की दावेदारी भी की थी। लेकिन उसके अगले ही दिन उनकी मुश्किलें बढ़ गईं। पाटीदार आन्दोलन में उनके साथी आंदोलनकारी एवं अब भाजपा नेता बने वरुण पटेल ने भी अमित शाह से मुलाकात कर उसी वीरमगाम सीट से दावेदारी ठोक दी जहां से हार्दिक टिकट की मांग कर रहे हैं।

दलबदलुओं के लिए भी मुश्किलें बढीं 
कांग्रेस से चुनाव जीतकर विधायक बने अल्पेश ठाकोर ने भी अब भाजपा की छत्रछाया में आगे की राजनीति करने का पक्का इरादा बना लिया है। अल्पेश ने कुछ दिन पहले ही भाजपा में शामिल होकर उपचुनाव में हार के बावजूद फिर बनासकांठा की राधनपुर सीट से दावेदारी की है। लेकिन यहां भी उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं, उनके सामने ठाकोर समाज के दिग्गज भाजपा नेतालविंगजी ठाकोर ने टिकट की दावेदारी कर दी है। ऐसे में अब अल्पेश को टिकट की चुनौती तो मिल ही रही साथ ही समाज के वोट बैंक को बचाना भी उनके लिए चैलेंज बन गया है।

जिग्नेश मेवाड़ी के सामने ताल ठोंकने को तैयार वाघेला 
गुजरात में दलित नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले जिग्नेश मेवाणी भी संकट में आ सकते हैं। बनासकांठा की ही वडगाम सीट से निर्दलीय विधायक चुने जिग्नेश अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और अब वह गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बन गये हैं। ऐसे में कभी कांग्रेस के विधायक रहे मणीभाई वाघेला अब भाजपा में हैं और जिग्नेश मेवाड़ी के खिलाफ ताल ठोकने की तैयारी कर रहे हैं।

मोरबी हादसे के बाद बढ़ा मेरजा का विरोध 
मोरबी में पुल हादसे के बाद से वहां के वर्तमान विधायक एवं राज्य सरकार के मंत्री ब्रजेश मेरजा की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। पुल हादसे के बाद से मोरबी में मंत्री ब्रजेश मेरजा का विरोध बढ गया है। सूत्रों की मानें तो मोरबी हादसे के दौरान बचाव कार्य तल्लीनता से जुटे भाजपा के पूर्व विधायक कांतिलाल अम्रतिया ने मोरबी से दावेदारी की है। आलाकमान मोरबी से कांतिलाल को भी प्रत्याशी बना सकती है। ऐसे में मंत्री ब्रजेश मेरजा की सीट बदलेगी तो नई जगह उनके लिए मुश्किलें भी बढ़ने के कयास लगाए जा रहे हैं।

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