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BIHAR BUDGET 2022: उस वित्तमंत्री की कहानी, जिसने बदली बिहार की तस्वीर, जिन्हें कहा जाता है राज्य का निर्माता
पटना. बिहार विधानसभा में सोमवार दोपहर 2 बजे सीएम नीतीश कुमार के वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद वित्तीय वर्ष 2022-23 का बजट पेश करेंगे। तारकिशोर प्रसाद बिहार के 24वें वित्त मंत्री हैं। वहीं आजादी के बाद बिहार का पहला बजट अनुग्रह नारायण सिन्हा ने किया था। अनुग्रह नारायण सिन्हा 2 अप्रैल 1946 से 5 जुलाई 1957 तक वित्त मंत्री रहे। इस दौरान सूबे के पहले मुख्यमंत्री केसरी श्रीकृष्ण सिंह थे। बता दें कि श्रीकृष्ण सिंह ने 5 जुलाई 1957 से 31 जनवरी 1961 बीच बिहार का बजट पेश किया था। जानिए क्यों इन्हें कहा जाता है बिहार का निर्माता भी...

दरअसल, सूबे के पहले मुख्यमंत्री बने बिहार केसरी श्रीकृष्ण सिंह को इसलिए बिहार का निर्माता इसलिए कहा जाता है कि क्योंकि इन्होंने अपने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के कार्यकाल में कई ऐसे अहम फैसले किए हैं जिन्हें आज भी बिहार के विकास की कहानी कहते हैं। बिहार में औद्योगिक क्रांति के लिए आज भी लोग उन्हें याद करते हैं। उन्हें करीब से जानने वाले लोग कहते हैं कि श्रीबाबू उसूलों से कभी कोई समझौता नहीं करते थे। बिहार में जमींदारी प्रथा खत्म करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है।
बता दें कि ने अपने समय के दौरान आजाद भारत की पहली रिफाइनरी – बरौनी ऑयल रिफाइनरी, पहला खाद कारखाना – सिन्दरी व बरौनी रासायनिक खाद कारखाना, एशिया का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग कारखाना – भारी उद्योग निगम हटिया, एशिया का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड – गढ़हरा, आजादी के बाद गंगोत्री से गंगासागर के बीच प्रथम रेल सह सड़क, देश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट – सेल बोकारो, बरौनी डेयरी, राजेंद्र पुल, कोशी प्रोजेक्ट, बिहार, भागलपुर, रांची विश्वविद्यालय जैसे और भी कई ऐसी चीजों की नींव रखी जिनके चलते वह हमेशा याद किए जाएंगे।
बता दें कि श्रीकृष्ण सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1887 को बिहार के मुंगेर जिले में स्थित खनवां गांव में हुआ था। जिन्हें बिहार केसरी ने नाम से भी जाना जाता है। हालांकि राजनीतिक-सामाजिक जीवन में उन्हें लोग सम्मान से श्रीबाबू के नाम से पुकारते थे। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और अनुग्रह नारायण सिन्हा के साथ श्रीकृष्ण सिंह को बिहार का शिल्पकार भी कहा जाता है। उन्होंने उच्च शिक्षा कोलकाता विश्वविद्यालय से एम.ए. और कानून की डिग्री हासिल की है। इसके बाद वह मुंगेर जिले में वकालत करने लगे। उसी दौर में महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन आरंभ करने पर इन्होंने वकालत छोड़ दी और फिर ऐसे ही वह राजनीति में आ गए।
वह 1946 से 1961तक वह बिहार के मुख्यमंत्री रहे और बिहार को आगे बढ़ाने के लिए कई कार्य किए। बताया जाता है कि वह एक तेज तर्रार वक्त थे। जिनके भाषण सुनने के लिए दूर-दूर से लोग आते थे। जानकार बताते हैं कि श्रीकृष्ण सिंह एक ऐसे नेता थे जो चुनाव के वक्त प्रचार-प्रचार पर ध्यान नहीं देते थे। अपने लिए कभी प्रचार के लिए नहीं जाते थे। उनका कहना था कि अगर मैंने काम किया है या जनता मुझे अपने नेता होने के लायक समझेगी, तो मुझे खुद ही वोट देगी।
बता दें कि बिहार के मसीहा के नाम से जाने वाले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के लिए पिछली साल 2021 में भारत रत्न देने की मांग भी उठाई थी। इतना ही नहीं विधान परिषद में संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने घोषणा भी की थी कि राज्य सरकार श्रीकृष्ण सिंह को भारत रत्न देने की सिफारिश केंद्र सरकार से करेगी।
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