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Success Story: पिता ने जबरदस्ती करवाई इंजीनियरिंग, JEE में फेल होने वाला बेटा बन गया IAS

First Published Mar 1, 2021, 2:49 PM IST
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करियर डेस्क. Success Story: देश में हजारों-लाखों बेरोजगार युवाओं का सपना किसी भी हाल में सरकारी नौकरी पाना है। इसलिए तो Mtech, Btech, MBBS, MA जैसी डिग्री रखने वाले युवा भी चपरासी की भर्ती में पहुंच जाते हैं। वहीं हर साल लाखों लोग UPSC की परीक्षा भी देते हैं जिसके बाद ब्यूरोक्रेट का पद मिलता है। ऐसे ही दिल्ली के रहने वाले लक्ष्य सिंघल ने हर सरकारी नौकरी के एग्जाम में अपनी किस्मत आजमाई। और तो और उन्होंने उन्होंने बारहवीं के बाद इंजीनियरिंग ज्वॉइन करने के लिए जितनी भी परीक्षाएं दी जैसे एआईईईई, जेईई वगैरह, वे किसी में सेलेक्ट नहीं हुए। उन्होंने दिल्ली की एक स्टेट यूनिवर्सिटी में एडमीशन ले लिया। उनके लगातार फेल होने से उनके परिवार का भरोसा उन पर से उठ गया था कि नकारा लड़का कभी कुछ न कर पाएगा। लेकिन लक्ष्य ने UPSC पास कर सिविल सर्वेंट बनने का सपना देखा। इस सपने को उन्होंने कड़ी मेहनते के दम पर पूरा भी किया। आईएएस सक्सेज स्टोरी (IAS Success Story)  में हम आपको लक्ष्य के फेलियर से अफसर बनने की कहानी सुना रहे हैं-

पड़ोसी के बेटे को IPS बनता देख अफसर बनने की ठानी

 

दिल्ली में पले-बढ़े लक्ष्य के पिता व्यापारी हैं और मां हाउस मेकर हैं। उनके खानदान में किसी के पास कोई सरकारी नौकरी नहीं थी। लेकिन लक्ष्य ने काफी छोटी उम्र से सिविल सर्वेंट बनने का ख्वाब संजो लिया था। जिस परिवार में कोई क्लर्क भी नहीं हो उसमें लक्ष्य प्रशासनिक अधिकारी बन गए लेकिन उनका सफर काफी मुश्किल रहा। लक्ष्य के पास जीरो गाइडेंस थी।

 

उन्हें इस परीक्षा के विषय में जानकारी नहीं थी न कोई इंस्पिरेशन। फिर एक बार लक्ष्य के एक पड़ोसी का बेटा IPS में सेलेक्ट हो गया। तब उन्हें लेने रोज़ सरकारी गाड़ी सायरन बजाते हुए आती थी। लक्ष्य IPS पड़ोसी के इस रुतबे से बहुत प्रभावित हुए और उस समय 10वीं क्लास में होते हुए उन्होंने अफसर बनने की ठान ली।  

 

पड़ोसी के बेटे को IPS बनता देख अफसर बनने की ठानी

 

दिल्ली में पले-बढ़े लक्ष्य के पिता व्यापारी हैं और मां हाउस मेकर हैं। उनके खानदान में किसी के पास कोई सरकारी नौकरी नहीं थी। लेकिन लक्ष्य ने काफी छोटी उम्र से सिविल सर्वेंट बनने का ख्वाब संजो लिया था। जिस परिवार में कोई क्लर्क भी नहीं हो उसमें लक्ष्य प्रशासनिक अधिकारी बन गए लेकिन उनका सफर काफी मुश्किल रहा। लक्ष्य के पास जीरो गाइडेंस थी।

 

उन्हें इस परीक्षा के विषय में जानकारी नहीं थी न कोई इंस्पिरेशन। फिर एक बार लक्ष्य के एक पड़ोसी का बेटा IPS में सेलेक्ट हो गया। तब उन्हें लेने रोज़ सरकारी गाड़ी सायरन बजाते हुए आती थी। लक्ष्य IPS पड़ोसी के इस रुतबे से बहुत प्रभावित हुए और उस समय 10वीं क्लास में होते हुए उन्होंने अफसर बनने की ठान ली।  

 

पिता ने जबरदस्ती करवाई इंजीनियरिंग –

 

बड़े होकर अफसर बनने का सपना देखने वाले लक्ष्य की लाइफ डगमगाती हुई गुजरी।  उन्होंने दसवीं में काफी अच्छे अंक हासिल किए मां-बाप और परिवार के बीच प्यार मिला। लेकिन उनके पिता ने उन्हें इंजीनियरिंग में डाल दिया। उस समय हर बच्चा इंजीनियरिंग कर रहा था पिता ने भी बेटे को यही करने को कहा। लक्ष्य कंप्यूटर इंजीनियरिंग लेना चाहते थे पर उनके पिता ने लक्ष्य को मैकेनिकल इंजीनियरिंग चुनने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर कुछ न कर पाए जीवन में तो कम से कम मैकेनिकल इंजीनियरिंग करके अपना घर का बिजनेस संभाल लोगे।

पिता ने जबरदस्ती करवाई इंजीनियरिंग –

 

बड़े होकर अफसर बनने का सपना देखने वाले लक्ष्य की लाइफ डगमगाती हुई गुजरी।  उन्होंने दसवीं में काफी अच्छे अंक हासिल किए मां-बाप और परिवार के बीच प्यार मिला। लेकिन उनके पिता ने उन्हें इंजीनियरिंग में डाल दिया। उस समय हर बच्चा इंजीनियरिंग कर रहा था पिता ने भी बेटे को यही करने को कहा। लक्ष्य कंप्यूटर इंजीनियरिंग लेना चाहते थे पर उनके पिता ने लक्ष्य को मैकेनिकल इंजीनियरिंग चुनने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर कुछ न कर पाए जीवन में तो कम से कम मैकेनिकल इंजीनियरिंग करके अपना घर का बिजनेस संभाल लोगे।

UPSC करने पहुंच गए दिल्ली

 

इस प्रकार लक्ष्य ने इसी ब्रांच से ग्रेजुएशन किया। हालांकि बीई करने के बाद उन्होंने अपने पिता से कहा कि वे सिविल सर्विस देना चाहते हैं। उनके घर में सबको लगा कि चयन तो होना नहीं है पर प्रयास करने में क्या जाता है। इस प्रकार लक्ष्य गाजियाबाद से दिल्ली आ गए कोचिंग करने। फिर लक्ष्य ने पढ़ाई को काफी सीरियसली लिया और जुट गए प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए। कोचिंग और रूम लेकर रहने के अपने एक्सपीरियंस को लक्ष्य बहुत ही खराब मानते हैं।

 

UPSC करने पहुंच गए दिल्ली

 

इस प्रकार लक्ष्य ने इसी ब्रांच से ग्रेजुएशन किया। हालांकि बीई करने के बाद उन्होंने अपने पिता से कहा कि वे सिविल सर्विस देना चाहते हैं। उनके घर में सबको लगा कि चयन तो होना नहीं है पर प्रयास करने में क्या जाता है। इस प्रकार लक्ष्य गाजियाबाद से दिल्ली आ गए कोचिंग करने। फिर लक्ष्य ने पढ़ाई को काफी सीरियसली लिया और जुट गए प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए। कोचिंग और रूम लेकर रहने के अपने एक्सपीरियंस को लक्ष्य बहुत ही खराब मानते हैं।

 

लक्ष्य को मिला कोचिंग का भयानक अनुभव

 

वे कहते हैं दिल्ली में कोचिंग्स को इतना ज्यादा कमर्शलाइज़ कर दिया गया है कि वहां हर जगह लोग पैसा लूटने बैठे हैं। लक्ष्य ने अपना अनुभव शेयर करते हुये कहा की किसी परीक्षा में सफल होने के लिए जरूरी नहीं कि कैंडिडेट घर से दूर ही रहे। यहां तक की उनका मानना है कि घर से दूर रहने पर पढ़ाई का ज्यादा नुकसान होता है।

 

बाहर आपका जितना समय खाना-पीना बनाने या अरेंज करने, कपड़े धोने, रूम की साफ-सफाई आदि में जाता है, वह सब घर में रहकर बचाया जा सकता है। बाहर एक्स्ट्रा पैसे खर्च होते हैं सो अलग। लक्ष्य ने भी सारा स्टडी मैटेरियल इकट्टा करके और परीक्षा को ठीक से समझकर अपने घर से तैयारी करने का फैसला किया।

 

लक्ष्य को मिला कोचिंग का भयानक अनुभव

 

वे कहते हैं दिल्ली में कोचिंग्स को इतना ज्यादा कमर्शलाइज़ कर दिया गया है कि वहां हर जगह लोग पैसा लूटने बैठे हैं। लक्ष्य ने अपना अनुभव शेयर करते हुये कहा की किसी परीक्षा में सफल होने के लिए जरूरी नहीं कि कैंडिडेट घर से दूर ही रहे। यहां तक की उनका मानना है कि घर से दूर रहने पर पढ़ाई का ज्यादा नुकसान होता है।

 

बाहर आपका जितना समय खाना-पीना बनाने या अरेंज करने, कपड़े धोने, रूम की साफ-सफाई आदि में जाता है, वह सब घर में रहकर बचाया जा सकता है। बाहर एक्स्ट्रा पैसे खर्च होते हैं सो अलग। लक्ष्य ने भी सारा स्टडी मैटेरियल इकट्टा करके और परीक्षा को ठीक से समझकर अपने घर से तैयारी करने का फैसला किया।

 

पहले प्रयास में पहुंचे इंटरव्यू राउंड तक –

 

लक्ष्य ने घर पर रहकर ही तैयारी करी और स्ट्रेटजी बनाकर सीमित संसाधनों के माध्यम से पढ़ाई की। बार-बार उन्हीं किताबों को रिवाइज़ किया और यूपीएससी पास करने के लिए दिनरात पढ़ते रहे। इस तरह लक्ष्य पहली बार में ही प्री, मेन्स क्वालिफाई करते हुए इंटरव्यू  राउंड तक पहुंच गए. हालांकि इंटरव्यू में उनका 6 अंकों से सेलेक्शन नहीं हुआ था।

पहले प्रयास में पहुंचे इंटरव्यू राउंड तक –

 

लक्ष्य ने घर पर रहकर ही तैयारी करी और स्ट्रेटजी बनाकर सीमित संसाधनों के माध्यम से पढ़ाई की। बार-बार उन्हीं किताबों को रिवाइज़ किया और यूपीएससी पास करने के लिए दिनरात पढ़ते रहे। इस तरह लक्ष्य पहली बार में ही प्री, मेन्स क्वालिफाई करते हुए इंटरव्यू  राउंड तक पहुंच गए. हालांकि इंटरव्यू में उनका 6 अंकों से सेलेक्शन नहीं हुआ था।

ओवर कांफिडेंस में डूबी नैया

 

लक्ष्य कहते हैं कि कांफिडेंस और ओवर कांफिडेंस में अंतर होता है और वे पहली ही बार में प्री में सेलेक्ट हो जाने पर घमंडी हो गए थे। चयन पक्का समझकर तैयारी नहीं की। खुद को पॉलिश नहीं किया। फिर लक्ष्य ने अपनी कमियों को देखा और उन्हें दूर किया। अपने दूसरे प्रयास में लक्ष्य ने वो गलतियां नहीं दोहरायीं पर लक्ष्य यह भी तय कर चुके थे कि इस बार सेलेक्शन नहीं होता है तो यह राह छोड़कर कुछ और करेंगे।

ओवर कांफिडेंस में डूबी नैया

 

लक्ष्य कहते हैं कि कांफिडेंस और ओवर कांफिडेंस में अंतर होता है और वे पहली ही बार में प्री में सेलेक्ट हो जाने पर घमंडी हो गए थे। चयन पक्का समझकर तैयारी नहीं की। खुद को पॉलिश नहीं किया। फिर लक्ष्य ने अपनी कमियों को देखा और उन्हें दूर किया। अपने दूसरे प्रयास में लक्ष्य ने वो गलतियां नहीं दोहरायीं पर लक्ष्य यह भी तय कर चुके थे कि इस बार सेलेक्शन नहीं होता है तो यह राह छोड़कर कुछ और करेंगे।

3 साल तक कोई पार्टी, फंक्शन अटैंड नही किए

 

लक्ष्य ने अपनी UPSC तैयारी के तीन साल में कभी कोई पार्टी, फंक्शन अटैंड नही किए क्योंकि वे मानते थे कि एक बार रिदम टूट जाती है या टारगेट एचीव नहीं होता तो अगली बार बहुत समय लग जाता है उसे सेट करते। इसलिए उन्होंने इन सालों में केवल पढ़ाई पर फोकस किया।

 

3 साल तक कोई पार्टी, फंक्शन अटैंड नही किए

 

लक्ष्य ने अपनी UPSC तैयारी के तीन साल में कभी कोई पार्टी, फंक्शन अटैंड नही किए क्योंकि वे मानते थे कि एक बार रिदम टूट जाती है या टारगेट एचीव नहीं होता तो अगली बार बहुत समय लग जाता है उसे सेट करते। इसलिए उन्होंने इन सालों में केवल पढ़ाई पर फोकस किया।

 

दूसरे प्रयास में पायी सफलता –

 

लक्ष्य ने दूसरी कोशिश में UPSC को पार करने का टारगेट रखा। इसका फल भी उन्हें जल्दी ही मिल गया जब दूसरे प्रयास में साल 2018 में लक्ष्य ने 38वीं रैंक के साथ परीक्षा पास कर ली। पूरे खानदार में अफसर बनने वाले वो अकेले लड़के थे। किसी को यकीन नहीं था एआईईईई, JEE में फेल होने वाले लक्ष्य अब IAS अफसर बन गए हैं। बहरहाल मोहल्ले में उनका धूमधाम से स्वागत हुआ। 

दूसरे प्रयास में पायी सफलता –

 

लक्ष्य ने दूसरी कोशिश में UPSC को पार करने का टारगेट रखा। इसका फल भी उन्हें जल्दी ही मिल गया जब दूसरे प्रयास में साल 2018 में लक्ष्य ने 38वीं रैंक के साथ परीक्षा पास कर ली। पूरे खानदार में अफसर बनने वाले वो अकेले लड़के थे। किसी को यकीन नहीं था एआईईईई, JEE में फेल होने वाले लक्ष्य अब IAS अफसर बन गए हैं। बहरहाल मोहल्ले में उनका धूमधाम से स्वागत हुआ। 

UPSC पार कर कम पढ़े लेकिन रोज पढ़ो

 

अपनी तैयारी के टिप्स देते हुए लक्ष्य कहते हैं कि हर किसी की कंपीटेंसी अलग होती है। किसी को किसी से कंपेयर नहीं कर सकते इसलिए अपने लिए प्लानिंग अपने हिसाब से करें। लक्ष्य शुरू में दस से बारह घंटे पढ़ते थे जो धीरे-धीरे छ से आठ घंटे में बदला। हालांकि उनका कहना है कि कंसीसटेंसी इस परीक्षा में पास होने के लिए बहुत जरूरी है। जितना भी पढ़ो रोज़ पढ़ो।

UPSC पार कर कम पढ़े लेकिन रोज पढ़ो

 

अपनी तैयारी के टिप्स देते हुए लक्ष्य कहते हैं कि हर किसी की कंपीटेंसी अलग होती है। किसी को किसी से कंपेयर नहीं कर सकते इसलिए अपने लिए प्लानिंग अपने हिसाब से करें। लक्ष्य शुरू में दस से बारह घंटे पढ़ते थे जो धीरे-धीरे छ से आठ घंटे में बदला। हालांकि उनका कहना है कि कंसीसटेंसी इस परीक्षा में पास होने के लिए बहुत जरूरी है। जितना भी पढ़ो रोज़ पढ़ो।

लक्ष्य कहते हैं कि जो समय आप तैयारी में देते हैं, उसे इनवेस्टमेंट मानें और मन लगाकर पढ़ाई करें। हां साथ में बैकअप प्लान तैयार रखें तो बेहतर है क्योंकि इस परीक्षा में सफलता की कोई गारंटी नहीं, लेकिन जो अपने जीवन का लक्ष्य यूपीएससी बना लेते हैं उन्हें उनका सपना पाने से कोई रोक भी नहीं सकता।

लक्ष्य कहते हैं कि जो समय आप तैयारी में देते हैं, उसे इनवेस्टमेंट मानें और मन लगाकर पढ़ाई करें। हां साथ में बैकअप प्लान तैयार रखें तो बेहतर है क्योंकि इस परीक्षा में सफलता की कोई गारंटी नहीं, लेकिन जो अपने जीवन का लक्ष्य यूपीएससी बना लेते हैं उन्हें उनका सपना पाने से कोई रोक भी नहीं सकता।

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