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अक्षय ने डेढ़ साल की चपरासी की नौकरी, फिर ऐसे पलटी किस्मत, आम आदमी से सुपरस्टार बनने की कहानी

First Published Sep 7, 2020, 7:45 PM IST
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मुंबई। अक्षय कुमार 53 साल के होने वाले हैं। 9 सितंबर, 1967 को अमृतसर में पैदा हुए अक्षय कुमार इन दिनों लंदन में फिल्म 'बेलबॉटम' की शूटिंग कर रहे हैं। अक्षय कुमार उर्फ राजीव हरिओम भाटिया आज भले ही बॉलीवुड के सुपरस्टार हैं, लेकिन यहां तक पहुंचना उनके लिए इतना भी आसान नहीं था। अक्षय के जन्मदिन से पहले हम बता रहे हैं आखिर कैसे एक आम आदमी से लेकर सुपरस्टार तक का सफर उन्होंने तय किया। 

अक्षय कुमार भी हर आम बच्चे की तरह पढ़ाई पूरी करके नौकरी करने का ख्वाब देखते थे। हालांकि वो बचपन से ही डांसर अच्छे थे। लेकिन उन्होंने एक्टिंग के बारे में कभी सीरियसली नहीं सोचा था। 

अक्षय कुमार भी हर आम बच्चे की तरह पढ़ाई पूरी करके नौकरी करने का ख्वाब देखते थे। हालांकि वो बचपन से ही डांसर अच्छे थे। लेकिन उन्होंने एक्टिंग के बारे में कभी सीरियसली नहीं सोचा था। 

इसके बाद कॉलेज के दिनों में अक्षय ने अपनी लाइफ में एक बड़ा फैसला लेते हुए  मार्शल आर्ट में करियर बनाने की सोची और बैंकॉक चले गए। यहां उन्होंने बतौर वेटर काम किया और शेफ बनने की ट्रेनिंग भी ली।

इसके बाद कॉलेज के दिनों में अक्षय ने अपनी लाइफ में एक बड़ा फैसला लेते हुए  मार्शल आर्ट में करियर बनाने की सोची और बैंकॉक चले गए। यहां उन्होंने बतौर वेटर काम किया और शेफ बनने की ट्रेनिंग भी ली।

ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट पाने के बाद अक्षय थाइलैंड से इंडिया आ गए। यहां उन्होंने मार्शल आर्ट सिखाना शुरू किया। लेकिन आगे की राह उनके लिए इतनी भी आसान नहीं थी। हमारे देश में उस वक्त मार्शल आर्ट सिखाकर ज्यादा कमाई नहीं की जा सकती थी।

ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट पाने के बाद अक्षय थाइलैंड से इंडिया आ गए। यहां उन्होंने मार्शल आर्ट सिखाना शुरू किया। लेकिन आगे की राह उनके लिए इतनी भी आसान नहीं थी। हमारे देश में उस वक्त मार्शल आर्ट सिखाकर ज्यादा कमाई नहीं की जा सकती थी।

ऐसे में अक्षय ने अपने लिए नौकरी ढूंढनी शुरू की। रिपोर्ट्स की मानें तो उन्हें सबसे पहली नौकरी कोलकाता की एक ट्रैवल एजेंसी में चपरासी के रूप में मिली थी। यहां उन्होंने करीब डेढ़ साल तक काम किया और इसके बाद वे सेल्समैन बनकर ढाका चले गए। फिर वहां से लौटने के बाद दिल्ली में ज्वैलरी ट्रेडर के रूप में काम किया और बाद में फिर मुंबई में मार्शल आर्ट टीचर के रूप में काम करने लगे।

ऐसे में अक्षय ने अपने लिए नौकरी ढूंढनी शुरू की। रिपोर्ट्स की मानें तो उन्हें सबसे पहली नौकरी कोलकाता की एक ट्रैवल एजेंसी में चपरासी के रूप में मिली थी। यहां उन्होंने करीब डेढ़ साल तक काम किया और इसके बाद वे सेल्समैन बनकर ढाका चले गए। फिर वहां से लौटने के बाद दिल्ली में ज्वैलरी ट्रेडर के रूप में काम किया और बाद में फिर मुंबई में मार्शल आर्ट टीचर के रूप में काम करने लगे।

अक्षय भले ही लोगों को मार्शल आर्ट सिखा रहे थे लेकिन उनकी किस्मत में तो शायद कुछ और ही लिखा था। मार्शल आर्ट सीखने आए स्टूडेंट्स अक्षय को मॉडलिंग में जाने की सलाह देने लगे। लेकिन इसके लिए दमदार पोर्टफोलियो की जरूरत थी। 

अक्षय भले ही लोगों को मार्शल आर्ट सिखा रहे थे लेकिन उनकी किस्मत में तो शायद कुछ और ही लिखा था। मार्शल आर्ट सीखने आए स्टूडेंट्स अक्षय को मॉडलिंग में जाने की सलाह देने लगे। लेकिन इसके लिए दमदार पोर्टफोलियो की जरूरत थी। 

अक्षय का एक स्टूडेंट, जो एक फोटोग्राफर भी था, उसने उन्हें मॉडलिंग करने को कहा। उस स्टूडेंट ने उन्हें एक छोटी कंपनी में एक मॉडलिंग असाइनमेंट दिया। उन्हें कैमरे के सामने पोज देने के लिए दो घंटे के 5,000 रुपए मिलते थे।

अक्षय का एक स्टूडेंट, जो एक फोटोग्राफर भी था, उसने उन्हें मॉडलिंग करने को कहा। उस स्टूडेंट ने उन्हें एक छोटी कंपनी में एक मॉडलिंग असाइनमेंट दिया। उन्हें कैमरे के सामने पोज देने के लिए दो घंटे के 5,000 रुपए मिलते थे।

इसके बाद अब अपना दमदार पोर्टफोलियो तैयार कराने के लिए अक्षय ने फोटोग्राफर जयेश सेठ के साथ बतौर असिस्टेंट 18 महीने तक फ्री में काम किया था। जब पोर्टफोलियो तैयार हुआ तो अक्षय ऑडिशन के लिए यहां-वहां जाने लगे। 

इसके बाद अब अपना दमदार पोर्टफोलियो तैयार कराने के लिए अक्षय ने फोटोग्राफर जयेश सेठ के साथ बतौर असिस्टेंट 18 महीने तक फ्री में काम किया था। जब पोर्टफोलियो तैयार हुआ तो अक्षय ऑडिशन के लिए यहां-वहां जाने लगे। 

इसी दौरान अक्षय ने बतौर बैकग्राउंड डांसर भी फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। जल्द ही उन्हें बेहतर जिंदगी जीने के लिए पर्याप्त पैसे मिलने लगे। हालांकि अब भी अक्षय नहीं जानते थे कि भगवान ने तो उनके नसीब में कुछ और ही लिख रखा है। 

इसी दौरान अक्षय ने बतौर बैकग्राउंड डांसर भी फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। जल्द ही उन्हें बेहतर जिंदगी जीने के लिए पर्याप्त पैसे मिलने लगे। हालांकि अब भी अक्षय नहीं जानते थे कि भगवान ने तो उनके नसीब में कुछ और ही लिख रखा है। 

एक बार अक्षय मॉडलिंग असाइनमेंट के लिए बैंगलोर जा रहे थे। लेकिन किस्मत से उनकी फ्लाइट छूट गई। इससे अक्षय बेहद निराश हुए। वे अपना पोर्टफोलियो लेकर फिल्म स्टूडियोज का राउंड लगाने निकल पड़े। यहीं एक स्टूडियो में उनकी मुलाकात प्रोड्यूसर प्रमोद चक्रवर्ती से हुई और उन्होंने अक्षय को फिल्म 'दीदार' के लिए साइन कर लिया। 

एक बार अक्षय मॉडलिंग असाइनमेंट के लिए बैंगलोर जा रहे थे। लेकिन किस्मत से उनकी फ्लाइट छूट गई। इससे अक्षय बेहद निराश हुए। वे अपना पोर्टफोलियो लेकर फिल्म स्टूडियोज का राउंड लगाने निकल पड़े। यहीं एक स्टूडियो में उनकी मुलाकात प्रोड्यूसर प्रमोद चक्रवर्ती से हुई और उन्होंने अक्षय को फिल्म 'दीदार' के लिए साइन कर लिया। 

ये फिल्म 1992 में रिलीज हुई और इसने अक्षय के लिए आगे के रास्ते खोल दिए थे। हालांकि इससे पहले अक्षय ने डेब्यू फिल्म 'सौगंध' (1991) में काम किया था। बतौर लीड एक्टर ये उनकी पहली फिल्म थी, जो बॉक्सऑफिस पर फ्लॉप हुई। इसके बाद उन्हें 'खिलाड़ी (1993)' से लोग जानने लगे।

ये फिल्म 1992 में रिलीज हुई और इसने अक्षय के लिए आगे के रास्ते खोल दिए थे। हालांकि इससे पहले अक्षय ने डेब्यू फिल्म 'सौगंध' (1991) में काम किया था। बतौर लीड एक्टर ये उनकी पहली फिल्म थी, जो बॉक्सऑफिस पर फ्लॉप हुई। इसके बाद उन्हें 'खिलाड़ी (1993)' से लोग जानने लगे।

1994 में आई 'मोहरा' अक्षय कुमार के करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। खासकर इसके गाने 'तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त' से अक्षय को खूब पॉपुलैरिटी मिली। खुद अक्षय ने एक इंटरव्यू में कहा था, "मेरे जीवन में तीन चीजों ने खास भूमिका निभाई है। 'खिलाड़ी' फिल्म, 'तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त' और 'चुरा के दिल मेरा' सॉन्ग। इन तीन चीजों ने मेरे करियर को संवारा है। 

1994 में आई 'मोहरा' अक्षय कुमार के करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। खासकर इसके गाने 'तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त' से अक्षय को खूब पॉपुलैरिटी मिली। खुद अक्षय ने एक इंटरव्यू में कहा था, "मेरे जीवन में तीन चीजों ने खास भूमिका निभाई है। 'खिलाड़ी' फिल्म, 'तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त' और 'चुरा के दिल मेरा' सॉन्ग। इन तीन चीजों ने मेरे करियर को संवारा है। 

1995 से 1999 के बीच का दौर अक्षय कुमार के लिए कमजोर रहा। इस दौरान उनकी 20 फिल्मों में से सिर्फ 'सबसे बड़ा खिलाड़ी', 'खिलाड़ियों का खिलाड़ी', 'जानवर' और 'इंटरनेशनल खिलाड़ी' ही सक्सेसफुल रहीं।, लेकिन 1997 में 'दिल तो पागल है' में किया गया उनका कैमियो जरूर यादगार रहा।

1995 से 1999 के बीच का दौर अक्षय कुमार के लिए कमजोर रहा। इस दौरान उनकी 20 फिल्मों में से सिर्फ 'सबसे बड़ा खिलाड़ी', 'खिलाड़ियों का खिलाड़ी', 'जानवर' और 'इंटरनेशनल खिलाड़ी' ही सक्सेसफुल रहीं।, लेकिन 1997 में 'दिल तो पागल है' में किया गया उनका कैमियो जरूर यादगार रहा।

2000 से 2008 तक अक्षय का करियर अच्छा चला। इस दौरान अक्षय ने एक नए जॉनर कॉमेडी को पकड़ा और 'हेरा फेरी', 'आवारा पागल दीवाना', 'मुझसे शादी करोगी', 'गरम मसाला', 'भागम भाग' और 'नमस्ते लंदन' जैसी कई फिल्मों से ऑडियंस को खूब हंसाया।

2000 से 2008 तक अक्षय का करियर अच्छा चला। इस दौरान अक्षय ने एक नए जॉनर कॉमेडी को पकड़ा और 'हेरा फेरी', 'आवारा पागल दीवाना', 'मुझसे शादी करोगी', 'गरम मसाला', 'भागम भाग' और 'नमस्ते लंदन' जैसी कई फिल्मों से ऑडियंस को खूब हंसाया।

इसके बाद चार साल यानी 2012 तक 'चांदनी चौक टू चाइना', '8x10 तस्वीर' और 'कमबख्त इश्क' जैसी उनकी कई फिल्में लगातार फ्लॉप हुईं। हालांकि, इस बीच 'हाउसफुल' (1 और 2), 'देसी ब्वॉयज' और 'राउडी राठौर' जैसी कुछ फिल्में उनके करियर को सहारा देती रहीं। 

इसके बाद चार साल यानी 2012 तक 'चांदनी चौक टू चाइना', '8x10 तस्वीर' और 'कमबख्त इश्क' जैसी उनकी कई फिल्में लगातार फ्लॉप हुईं। हालांकि, इस बीच 'हाउसफुल' (1 और 2), 'देसी ब्वॉयज' और 'राउडी राठौर' जैसी कुछ फिल्में उनके करियर को सहारा देती रहीं। 

फिर 2013 में 'स्पेशल 26' करने के बाद से अब तक अक्षय ने 'हॉलिडे', 'बेबी'. 'गब्बर इज बैक', 'एयरलिफ्ट', 'टॉयलेट : एक प्रेमकथा', 'पैडमैन', गोल्ड, मिशन मंगल, केसरी और गुड न्यूज जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं।

फिर 2013 में 'स्पेशल 26' करने के बाद से अब तक अक्षय ने 'हॉलिडे', 'बेबी'. 'गब्बर इज बैक', 'एयरलिफ्ट', 'टॉयलेट : एक प्रेमकथा', 'पैडमैन', गोल्ड, मिशन मंगल, केसरी और गुड न्यूज जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं।

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