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पति की मौत के बाद बदतर हो गई थी करीना की मौसी की हालत, घेर लिया था कई बीमारियों ने, किसी ने नहीं की मदद

First Published Sep 2, 2020, 12:20 PM IST
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मुंबई. वेटरन एक्ट्रेस साधना की आज 79वीं बर्थ एनिवर्सरी है। उनका जन्म 2 सितंबर, 1941 को  कराची, पाकिस्तान में हुआ था। साधना शिवदासनी अपने जमाने की सुपरस्टार हुआ करती थीं। वे रिश्ते में करीन कपूर और करिश्मा कपूर की मौसी लगती हैं। दरअसल, करीना की मम्मी बबिता और साधना चचेरी बहनें हैं। वैसे, आपको बता दें कि साधना के स्टार बनने के पीछे फेमस प्रोडूसर सशाधर मुखर्जी का हाथ है। मुखर्जी की फिल्म 'लव इन शिमला' ने उनको रातोंरात स्टार बना दिया था। इसी फिल्म में साधना का हेयर स्टाइल उन्हीं के नाम से काफी फेमस हुआ। उनका नाम उनके पापा की पसंदीदा एक्ट्रेस और डांसर साधना बोस के नाम पर रखा गया था।

साधना पहली बार 1955 में आई राज कपूर की फिल्म श्री 420 में नजर आई थीं। उनको फिल्म के एक गाने इचक दाना बिचक दाना.. में नरगिस के पीछे बच्चों की भीड़ में देखा गया था।

साधना पहली बार 1955 में आई राज कपूर की फिल्म श्री 420 में नजर आई थीं। उनको फिल्म के एक गाने इचक दाना बिचक दाना.. में नरगिस के पीछे बच्चों की भीड़ में देखा गया था।

इस फिल्म के लिए राज कपूर को कुछ बच्चों की जरूरत थी, जो नरगिस के पीछे बैठ सकें। इसके लिए उन्होंने बच्चों को अरेंज करने का जिम्मा सेट पर मौजूद लोगों को दिया था। वहां मौजूद लोगों में से कुछ साधना के पिता को जानते थे। इसलिए उन्हें भी उन बच्चों में शामिल कर लिया गया था।

इस फिल्म के लिए राज कपूर को कुछ बच्चों की जरूरत थी, जो नरगिस के पीछे बैठ सकें। इसके लिए उन्होंने बच्चों को अरेंज करने का जिम्मा सेट पर मौजूद लोगों को दिया था। वहां मौजूद लोगों में से कुछ साधना के पिता को जानते थे। इसलिए उन्हें भी उन बच्चों में शामिल कर लिया गया था।

1958 में साधना को उनकी पहली फिल्म (सिंधी) अबाना के लिए साइन कर लिया गया। इस फिल्म के लिए उन्हें महज एक रुपए का टोकन अमाउंट दिया गया था।

1958 में साधना को उनकी पहली फिल्म (सिंधी) अबाना के लिए साइन कर लिया गया। इस फिल्म के लिए उन्हें महज एक रुपए का टोकन अमाउंट दिया गया था।

प्रोड्यूसर सशाधर मुखर्जी अपने बेटे जॉय मुखर्जी को लॉन्च करना चाहते थे। इसलिए सशाधर एक नए चेहरे की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान साधना ने सिंधी फिल्म अबाना की थी और उनकी फोटो एक मैगजीन में छपी थी। सशाधर ने साधना को अपनी फिल्म 'लव इन शिमला' कास्ट किया गया।

प्रोड्यूसर सशाधर मुखर्जी अपने बेटे जॉय मुखर्जी को लॉन्च करना चाहते थे। इसलिए सशाधर एक नए चेहरे की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान साधना ने सिंधी फिल्म अबाना की थी और उनकी फोटो एक मैगजीन में छपी थी। सशाधर ने साधना को अपनी फिल्म 'लव इन शिमला' कास्ट किया गया।

साधना का हर स्टाइल एक ट्रेंड बन जाया करता था। उन्होंने अपने जमाने में चूड़ीदार सलवार का फैशन चलाया था। यही नहीं, उनका हेयरस्टाइल भी काफी फेमस था। 

साधना का हर स्टाइल एक ट्रेंड बन जाया करता था। उन्होंने अपने जमाने में चूड़ीदार सलवार का फैशन चलाया था। यही नहीं, उनका हेयरस्टाइल भी काफी फेमस था। 

साधना ने 'लव इन शिमला' के डायरेक्टर राम कृष्ण नय्यर से शादी की थी। दोनों की मुलाकात फिल्म के सेट पर हुई। शादी के वक्त साधना 16 साल और नय्यर 22 साल के थे। साधना के घरवाले शादी के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन राज कपूर की मदद से दोनों की ने शादी कर ली।

साधना ने 'लव इन शिमला' के डायरेक्टर राम कृष्ण नय्यर से शादी की थी। दोनों की मुलाकात फिल्म के सेट पर हुई। शादी के वक्त साधना 16 साल और नय्यर 22 साल के थे। साधना के घरवाले शादी के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन राज कपूर की मदद से दोनों की ने शादी कर ली।

1995 में साधना के पति नय्यर का निधन हो गया। दोनों की कोई भी संतान नहीं थी। पति की मौत के बाद साधना बिल्कुल अकेली हो गईं और बीमार रहने लगीं।

1995 में साधना के पति नय्यर का निधन हो गया। दोनों की कोई भी संतान नहीं थी। पति की मौत के बाद साधना बिल्कुल अकेली हो गईं और बीमार रहने लगीं।

उन्हें थाइरॉइड की बीमारी हो गई थी। अपने इस रोग का इलाज करवाने साधना अमेरिका गईं, लेकिन लोगों को लगने लगा कि साधना अब फिल्मों से रिटायर हो गई हैं। इसके बाद साधना वापस लौटीं और फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। बीमारी से ठीक होने के बाद उनकी पहली फिल्म थी इंतकाम जो बड़ी हिट रही। 

उन्हें थाइरॉइड की बीमारी हो गई थी। अपने इस रोग का इलाज करवाने साधना अमेरिका गईं, लेकिन लोगों को लगने लगा कि साधना अब फिल्मों से रिटायर हो गई हैं। इसके बाद साधना वापस लौटीं और फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। बीमारी से ठीक होने के बाद उनकी पहली फिल्म थी इंतकाम जो बड़ी हिट रही। 

धीरे-धीरे थायरॉइड की वजह से साधना की आंखों में भी परेशानी बढ़ गई और एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्होंने पब्लिक इवेंट्स, फंक्शन में जाना और फोटो तक खिंचवाना बंद कर दिया। 

धीरे-धीरे थायरॉइड की वजह से साधना की आंखों में भी परेशानी बढ़ गई और एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्होंने पब्लिक इवेंट्स, फंक्शन में जाना और फोटो तक खिंचवाना बंद कर दिया। 

अपने अंतिम दिनों में साधना ने गुमनामी जैसी जिंदगी जी। उन्हें दिखना भी कम हो गया था। उनकी मदद तक करने कोई आगे नहीं आया था। आखिरी दिनों में वो मुंबई के एक पुराने बंगले में किराए पर रहती थीं। यह बंगला आशा भोंसले का था। 25 दिसंबर 2015 को साधना इस दुनिया को अलविदा कह गईं।

अपने अंतिम दिनों में साधना ने गुमनामी जैसी जिंदगी जी। उन्हें दिखना भी कम हो गया था। उनकी मदद तक करने कोई आगे नहीं आया था। आखिरी दिनों में वो मुंबई के एक पुराने बंगले में किराए पर रहती थीं। यह बंगला आशा भोंसले का था। 25 दिसंबर 2015 को साधना इस दुनिया को अलविदा कह गईं।

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