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अजीत जोगी ने जताई थी यह आखरी इच्छा, उनके निधन के 5 दिन बाद बेटे ने की पूरी..यह चाहते थे जोगी

First Published Jun 3, 2020, 6:55 PM IST
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रायपुर. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन को आज पूरे पांच दिन हो गए। उनके बेटे अमित जोगी ने अपने परिजनों की मौजूदगी में एक कलश यात्रा निकली। इस कलश में कब्र की मिट्टी रख यात्रा मुक्तिधाम से लेकर अमरकंटक के रामघाट, नर्मदा, अरंडी संगम, सोन नदी में विसर्जित किया गया। तथा यहीं पिता का पिण्डदान भी किया गया।
 

जोगी ने वसीयत में जताई थी इच्छा: दरअसल, स्वर्गीय  अजीत जोगी के विधायक प्रतिनिधि ज्ञानेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने वसीयत में इच्छा जताई थी कि कब्र से मिट्टी लेकर नर्मदा अरंडी संगम के अलावा सोनमुड़ा,अचानकमार और पीढ़ा में मिट्टी प्रवाहित की जाए। इसलिए उनकी इच्छा के अनुसार ही कलश यात्रा निकाली गई।

जोगी ने वसीयत में जताई थी इच्छा: दरअसल, स्वर्गीय  अजीत जोगी के विधायक प्रतिनिधि ज्ञानेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने वसीयत में इच्छा जताई थी कि कब्र से मिट्टी लेकर नर्मदा अरंडी संगम के अलावा सोनमुड़ा,अचानकमार और पीढ़ा में मिट्टी प्रवाहित की जाए। इसलिए उनकी इच्छा के अनुसार ही कलश यात्रा निकाली गई।


कौन-कौन शामिल हुआ इस कलश यात्रा में: बता दें कि इस कलश यात्रा में अजीत जोगी की पत्नी और  कोटा की विधायक डॉ.रेणु जोगी, बेटे अमित जोगी लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह और उनके कई चाहने वाले शामिल हुए थे।


कौन-कौन शामिल हुआ इस कलश यात्रा में: बता दें कि इस कलश यात्रा में अजीत जोगी की पत्नी और  कोटा की विधायक डॉ.रेणु जोगी, बेटे अमित जोगी लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह और उनके कई चाहने वाले शामिल हुए थे।


ईसाई रीति रिवाज से हुआ था अंतिम संस्कार: बता दें कि अजीत जोगी का निधन 29 मई 2020 को रायपुर के एक निजी अस्पताल में हो गया था। जहां उनका  अंतिम संस्कार ईसाई रीति रिवाज से गौरेला स्थित ग्रेवी यार्ड में किया गया था। 
 


ईसाई रीति रिवाज से हुआ था अंतिम संस्कार: बता दें कि अजीत जोगी का निधन 29 मई 2020 को रायपुर के एक निजी अस्पताल में हो गया था। जहां उनका  अंतिम संस्कार ईसाई रीति रिवाज से गौरेला स्थित ग्रेवी यार्ड में किया गया था। 
 

बेटे अमित जोगी ने ट्वीट कर लिखा- पापा की कविता ‘वसीयत’ के अनुरूप गौरेला में उनकी समाधि को मोहलाईन के मुलायम पत्तों से लपेटके,उसको महुआ,चार,चिरौंजी,तेंदू और बेल के फलों से सजाकर,और उनकी मिट्टी को उनके अंचल की दो पहाड़ी नदियों-उनकी गंगा और जमुना-नर्मदा और सोन के उद्गम में बहाकर, मैंने उनकी ये चार इच्छाएं पूरी की।
 

बेटे अमित जोगी ने ट्वीट कर लिखा- पापा की कविता ‘वसीयत’ के अनुरूप गौरेला में उनकी समाधि को मोहलाईन के मुलायम पत्तों से लपेटके,उसको महुआ,चार,चिरौंजी,तेंदू और बेल के फलों से सजाकर,और उनकी मिट्टी को उनके अंचल की दो पहाड़ी नदियों-उनकी गंगा और जमुना-नर्मदा और सोन के उद्गम में बहाकर, मैंने उनकी ये चार इच्छाएं पूरी की।
 

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