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स्पीड ब्रेकर पर जैसे ही उछली बस..मां ने पलटकर देखा..सीट पर उसका मासूम बच्चा नहीं था
पानीपत, हरियाणा. यह दिल दहलाने वाली घटना 19 मार्च, 2019 को हुई थी। स्पीड ब्रेकर पर उछाल मारते ही बस की सीट के नीचे का फर्श टूटने से यह 5 साल का बच्चा सीधे सड़क पर जा गिरा था। इसके बाद बच्चे के ऊपर से बस का पहिया निकल गया था। किसी मां के लिए इससे बड़ा सदमा और क्या हो सकता है कि उसकी आंखों के सामने बच्चे की दर्दनाक मौत हो जाए। इस 5 साल के बच्चे कार्तिक की मौत के लिए प्रशासन जिम्मेदार है। इस घटना को सालभर हो गए हैं। लेकिन सिवाय इस बच्चे की मां और परिजनों के अलावा जैसे सब घटना को भूल चुके हैं। परिजन अब भी न्याय की उम्मीद में कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं। यह बस बाबा जोध सचियार पब्लिक स्कूल की थी। शर्मनाक बात यह है कि घटना के 9 महीने पहले ही बस को वीडियो देखकर फिटनेस सर्टिफिकेट दे दिया गया था। मां अब भी रो-रोकर यही सवाल उठा रही है कि अगर बस फिट थी, तो 9 महीने में बस का फर्श कैसे गल गया था? मासूम नर्सरी क्लास का स्टूडेंट था। कार्तिक अपनी मां, दो साल बड़े भाई और चाचा के साथ जोध सचियार गुरुद्धारे में चल रहे समागम से लौट रहा था। यह घटना याद कराने का मकसद यही है कि आप सचेत रहें..अनफिट बसों के खिलाफ आवाज उठाएं...
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मासूम कार्तिक कच्चा कैंप स्थित स्टार पब्लिक स्कूल में नर्सरी क्लास का स्टूडेंट था। बस का फर्श 20 दिनों से टूटा हुआ था। लेकिन मालिकों ने इसकी फिक्र नहीं की। टूटे फर्श पर लकड़ी का टुकड़ा रखकर काम चलाया जा रहा था। स्पीड ब्रेकर पर लकड़ी का टुकड़ा हटने से कार्तिक सड़क पर जा गिरा था।
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यह बस स्कूल टाइम के बाद जोध सचियार गुरुद्वारे में चल रहे समागम के लिए श्रद्धालुओं को लाने-ले जाने के लिए लगाई गई थी। पूरेवाल कॉलोनी के कच्चा कैंप में रहने वाला कार्तिक अपनी मां रजनी, 7 साल के भाई जतिन के साथ चाचा मनोज की बाइक पर बैठकर समागम में गया था। लौटते वक्त चाचा ने तीनों को इस बस में बैठा गया था।
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यह हादसा आसन कला मोड़ स्थित शिव मंदिर के पास स्पीड ब्रेकर पर हुआ था। बस स्पीड ब्रेकर पर उछली, तो होल पर रखा लकड़ी का तख्ता घिसक गया और कार्तिक सड़क पर जा गिरा। मां आगे की सीट पर बैठी थी, इसलिए उसे पता ही नहीं चला। पीछे से अपनी बाइक पर आ रहे मनोज ने जब भतीजे को सड़क पर लहूलुहान पड़े देखा, तो वे चीख पड़े। उनकी आवाज सुनकर कार्तिक की मां ने पलटकर पिछली सीट पर देखा, तो कार्तिक को न पाकर वो चिल्ला पड़ी-'बस रोको..मेरा बच्चा मर गया...!'
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इस हादसे ने पूरे शहर में आक्रोश पैदा कर दिया था। इस मुद्दे को लेकर जनआंदोलन होने लगे थे। स्कूली बच्चों ने हाथों में स्लोगन लेकर प्रशासन को ऐसी बसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की थी। लेकिन समय गुजरते सिवाय कार्तिक के परिजनों के सब घटना को जैसे भूल गए।
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कार्तिक के परिजन अब भी आंखों में आंसू लिए न्याय की उम्मीद में पुलिस-कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं। कार्तिक की मां रजनी ने कहा कि अब उनका बच्चा तो लौटने से रहा, लेकिन वे यही चाहती हैं कि ऐसी घटना दूसरे किसी बच्चे के साथ न हो।
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