Asianet News Hindi

मूवी देखते हुए कभी भी ना खाएं पॉपकॉर्न और मोमोज, ये 10 फूड बढ़ा सकते हैं कैंसर का खतरा

First Published Feb 4, 2021, 11:33 AM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

हेल्थ डेस्क : कैंसर कितनी गंभीर बीमारी है इसका अंदाजा उन्हीं लोग को होता है, जो इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। हालांकि कैंसर से बचाव और उसके प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) मनाया जाता है। कैंसर के संबंध में फैली गलत धारणाओं को कम करने और कैंसर मरीजों को मोटीवेट करने के लिए भी इस दिन को मनाया जाता है। कैंसर कई तरह से लोगों को हो सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाने की कई ऐसी कई चीजें हैं, जो कैंसर को बढ़ा (cancer causing food) सकती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि कैंसर के लगभग 70 प्रतिशत मामले सिर्फ खाने के जरिए कम हो सकते हैं। बाकी 30 प्रतिशत जेनेटिक्स (genetics) और वातावरण से जुड़े होते हैं। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं ऐसे खाने के बारे में जो कैंसर जैसी बीमारी का कारण बन सकते हैं....

मैदा
मैदा सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक है। ये कैंसर का कारक और डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत खतरनाक होता है, इससे ब्लड शुगर का लेवल भी बढ़ जाता है। दरअसल, आटे से मैदा बनाने की प्रक्रिया में कई कार्सिनोजेनिक तत्व निकलते हैं। इसके अलावा मैदे को सफेद रंग देने के लिए उसे क्लोरीन गैस से गुजारा जाता है, जो कैंसर का कारण बनता है।

मैदा
मैदा सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक है। ये कैंसर का कारक और डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत खतरनाक होता है, इससे ब्लड शुगर का लेवल भी बढ़ जाता है। दरअसल, आटे से मैदा बनाने की प्रक्रिया में कई कार्सिनोजेनिक तत्व निकलते हैं। इसके अलावा मैदे को सफेद रंग देने के लिए उसे क्लोरीन गैस से गुजारा जाता है, जो कैंसर का कारण बनता है।

माइक्रोवेव पॉपकॉर्न
ये ऐसे पॉपकॉर्न जिन्हें माइक्रोवेव में बनाया जाता है, वो केमिकल वाले पैकेट में आते हैं। माइक्रोवेव में बनाया गया पॉपकॉर्न कैंसर की वजह बनता है, क्योंकि माइक्रोवेव में पॉपकॉर्न डालने से परफ्यूरोक्टानोइक एसिड (perfluorooctanoic acid) बनता है। ये एक तरह का सिंथेटिक रसायन है जिससे पैंक्रियाज, किडनी, ब्लैडर, लिवर और टेस्टिकुलर कैंसर हो सकता है।

माइक्रोवेव पॉपकॉर्न
ये ऐसे पॉपकॉर्न जिन्हें माइक्रोवेव में बनाया जाता है, वो केमिकल वाले पैकेट में आते हैं। माइक्रोवेव में बनाया गया पॉपकॉर्न कैंसर की वजह बनता है, क्योंकि माइक्रोवेव में पॉपकॉर्न डालने से परफ्यूरोक्टानोइक एसिड (perfluorooctanoic acid) बनता है। ये एक तरह का सिंथेटिक रसायन है जिससे पैंक्रियाज, किडनी, ब्लैडर, लिवर और टेस्टिकुलर कैंसर हो सकता है।

शराब
किसी भी चीज की अधिकता बुरी है। ज्यादा शराब का सेवन आपके लीवर को नुकसान पहुंचाता है और किडनी पर दबाव बढ़ाता है। डॉक्टर्स का कहना है कि ज्यादा शराब के सेवन से मुंह, इसोफेगस, लिवर, कोलोन और रेक्टम के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि महिलाओं के लिए प्रति दिन एक और पुरुषों के लिए दो पेग पीना सुरक्षित है।

शराब
किसी भी चीज की अधिकता बुरी है। ज्यादा शराब का सेवन आपके लीवर को नुकसान पहुंचाता है और किडनी पर दबाव बढ़ाता है। डॉक्टर्स का कहना है कि ज्यादा शराब के सेवन से मुंह, इसोफेगस, लिवर, कोलोन और रेक्टम के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि महिलाओं के लिए प्रति दिन एक और पुरुषों के लिए दो पेग पीना सुरक्षित है।

नॉन ऑर्गेनिक फल
आजकल हम देखते हैं कि मौसमी फल भी हर सीजन में मिल जाते हैं, क्योंकि उन्हें कोल्डस्टोरेज में रखा जाता है। ऐसे फल जिन्हें लंबे समय से कोल्डस्टोरेज में रखा जाता है, उनपर केमिकल की परत चढ़ी ही रहती है। इसकी वजह से कैंसर होता है, इसलिए इन्हें खाने से बचना चाहिए।

नॉन ऑर्गेनिक फल
आजकल हम देखते हैं कि मौसमी फल भी हर सीजन में मिल जाते हैं, क्योंकि उन्हें कोल्डस्टोरेज में रखा जाता है। ऐसे फल जिन्हें लंबे समय से कोल्डस्टोरेज में रखा जाता है, उनपर केमिकल की परत चढ़ी ही रहती है। इसकी वजह से कैंसर होता है, इसलिए इन्हें खाने से बचना चाहिए।

स्मोकड और प्रोसेस्ड मीट
स्मोक्ड और प्रोसेस्ड मीट को प्रीजर्व करने के लिए में नाइट्रेट और सोडियम का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है, जो कैंसर से जुड़े होते हैं। लाल मांस में गोमांस, भेड़ का बच्चा और पोर्क खाने से हमें बचना चाहिए, क्योंकि इसमें वसा बहुत अधिक मात्रा में होती है।

स्मोकड और प्रोसेस्ड मीट
स्मोक्ड और प्रोसेस्ड मीट को प्रीजर्व करने के लिए में नाइट्रेट और सोडियम का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है, जो कैंसर से जुड़े होते हैं। लाल मांस में गोमांस, भेड़ का बच्चा और पोर्क खाने से हमें बचना चाहिए, क्योंकि इसमें वसा बहुत अधिक मात्रा में होती है।

पैक्ड अचार
अधिकतर बाजार में मिलने वाले अचार बनाने के लिए कई तरह के प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल होता है, जिसमें नाइट्रेट, नमक और आर्टिफिशियल रंग शामिल हैं। इनके ज्यादा सेवन से पेट और कोलोन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

पैक्ड अचार
अधिकतर बाजार में मिलने वाले अचार बनाने के लिए कई तरह के प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल होता है, जिसमें नाइट्रेट, नमक और आर्टिफिशियल रंग शामिल हैं। इनके ज्यादा सेवन से पेट और कोलोन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

आलू चिप्स
बाजार में मिलने वाले आलू के चिप्स में बहुत ज्यादा नमक और सेच्युरेटेड फैट होता है जो सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक है। इसके अलावा चिप्स में acrylamide तत्व होता है जो कार्सिनोजेनिक केमिकल यानी कैंसर पैदा करने वाला रसायन होता है।

आलू चिप्स
बाजार में मिलने वाले आलू के चिप्स में बहुत ज्यादा नमक और सेच्युरेटेड फैट होता है जो सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक है। इसके अलावा चिप्स में acrylamide तत्व होता है जो कार्सिनोजेनिक केमिकल यानी कैंसर पैदा करने वाला रसायन होता है।

सोडा
हम सभी जानते हैं कि सोडा हमारे शरीर के लिए बुरा है और अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह जानलेवा भी बन जाता है। इसमें शुगर की अधिक मात्रा होती है जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ाती है। जिससे कैंसर का खतरा भी बढ़ता है।

सोडा
हम सभी जानते हैं कि सोडा हमारे शरीर के लिए बुरा है और अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह जानलेवा भी बन जाता है। इसमें शुगर की अधिक मात्रा होती है जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ाती है। जिससे कैंसर का खतरा भी बढ़ता है।

हाइड्रोजेनेटेड ऑयल्स
वनस्‍पति तेल में आमतौर पर हाइड्रोजेनेटेड ऑयल मिलाया जाता है, जो कैंसर का बड़ा कारण होता है। इसमें ट्रांस-फैट्स भी काफी मात्रा में होता है। ये मोटापा बढ़ाते हैं और कहा जाता है कि मोटापे से कैंसर का खतरा बढ़ता है।

हाइड्रोजेनेटेड ऑयल्स
वनस्‍पति तेल में आमतौर पर हाइड्रोजेनेटेड ऑयल मिलाया जाता है, जो कैंसर का बड़ा कारण होता है। इसमें ट्रांस-फैट्स भी काफी मात्रा में होता है। ये मोटापा बढ़ाते हैं और कहा जाता है कि मोटापे से कैंसर का खतरा बढ़ता है।

फार्म्ड सैल्मन मछली 
यदि आप खेती की गई सैल्मन फिश का सेवन कर रहे हैं और आपको लगता है कि आप हेल्दी खाना खा रहे हैं, तो हम आपको बता दें कि रिसर्च में साबित हुआ है कि खेती की गई सैल्मन कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ाती है, क्योंकि आजकल मछली की बढ़ती मांग को देखते हुए इसे पानी की टंकियों में पाला जा रहा है। उन्हें एंटीबायोटिक्स से भरी डाइट दी जाती है ताकि वे बीमारियों से बची रहें। यही एंटीबायोटिक्स हमारे शरीर के अंदर पहुंचकर कैंसर की वजह बन जाते हैं।

फार्म्ड सैल्मन मछली 
यदि आप खेती की गई सैल्मन फिश का सेवन कर रहे हैं और आपको लगता है कि आप हेल्दी खाना खा रहे हैं, तो हम आपको बता दें कि रिसर्च में साबित हुआ है कि खेती की गई सैल्मन कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ाती है, क्योंकि आजकल मछली की बढ़ती मांग को देखते हुए इसे पानी की टंकियों में पाला जा रहा है। उन्हें एंटीबायोटिक्स से भरी डाइट दी जाती है ताकि वे बीमारियों से बची रहें। यही एंटीबायोटिक्स हमारे शरीर के अंदर पहुंचकर कैंसर की वजह बन जाते हैं।

Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios