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झारखंड चुनाव में बड़ा चेहरा बन सकती है ये लड़की, जज्बा देख राहुल को भी आना पड़ा था रैली करने
रांची. झारखंड विधानसभा चुनाव के सोमवार को नतीजे घोषित हो गए हैं जिसमें बड़कागांव से उम्मीदवार अंबा प्रसाद ने जीत दर्ज कर दी है। इस पूरे चुनाव में 28 साल की उम्मीदवार अम्बा लगातार सुर्खियों में रही हैं। हजारीबाग जिले के बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र की ग्रेस उम्मीदवार अंबा अकेली चुनाव लड़ी हैं उनके पिता इस समय जेल में हैं और मां राज्य से बाहर। कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी खुद अंबा के लिए रैली करने आए थे। अंबा की मां निर्मला देवी इसी क्षेत्र से विधायक रही हैं उनकी अनुपस्थिति में अंबा विधायक का काम करते और जनता की समस्याओं के बारे में कैंपेन करते-करते राजनीति में ही उतर गईं।
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अम्बा के बारे में बात करें तो उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव से ही हुई है। बीबीए में ग्रेजुएट अम्बा को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता योगेंद्र साव और मां निर्मला देवी इसी क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक रहे हैं। झारंखड के टॉप कॉलेजों में से एक एक्सआईएसएस से पढ़ी अम्बा ने ह्यूमन रिसोर्स का कोर्स किया है।
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वह आईएएस बनना चाहती थीं जिसके लिए उन्होंने कोचिंग ली। साल 2014 में आईएएस की तैयारी करने के लिए अम्बा दिल्ली चली गई थीं। अम्बा ने कुछ महीने ही कोचिंग ली लेकिन उनके पिता पर लगे गंभीर राजनीतिक आरोपों के कारण उन्हें वापस लौटन पड़ा। यहीं से उनका राजनीतिक करियर शुरू हो गया।
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अम्बा की मां निर्मला देवी 2014 में कांग्रेस से विधायक चुनी गईं। इसके बाद से एनटीपीसी प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के कारण उनके पिता अभी तक जेल में हैं, और मां राज्य से बाहर हैं। इस बीच अम्बा को भाई को भी जेल में डाल दिया गया था जिसके लिए वह कोर्ट-कचहरी के टक्कर काटती रहीं। उन्होंने अपने भाई को जेल से निकाला और फिर राजनीति में उतरने की ठान ली।
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अम्बा अपने कैंपेन और चुनावी मुद्दों के कारण सुर्खियों में हैं। वह क्षेत्र की समस्याएं जनता के बीच जाकर सुनती हैं, चार साल से वह लगातार क्षेत्र में काम कर रही हैं और मां निर्मला देवी के लिए भी प्रचार-प्रसार में जुटी रही है। जब अम्बा का नाम सामने आया कि विधानसभा चुनाव 2019 के लिए उन्हें खड़ा किया जा रहा है तो वह सारी रात दुविधा में रही और सोचती रहीं।
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24 साल की उम्र से अंबा चुनावी रैलियों में घूम-घूमकर प्रचार में लगी थीं फिर अचानक जब उनका नाम उम्मीदवार के तौर पर रखा गय तो राजनीतिक गलियारों में उनकी उम्र और अनुभव को लेकर सवाल भी उठे लेकिन कांग्रेस पार्टी के सहयोग,अंबा की अथक मेहनत और क्षेत्र में उनकी पॉप्युलैरिटी को देख पार्टी ने उन्हें टिकिट दे दिया। चानक जब उनका नाम उम्मीदवार के तौर पर रखा गय तो राजनीतिक गलियारों में उनकी उम्र और अनुभव को लेकर सवाल भी उठे लेकिन कांग्रेस पार्टी के सहयोग,अंबा की अथक मेहनत और क्षेत्र में उनकी पॉप्युलैरिटी को देख पार्टी ने उन्हें टिकिट दे दिया।
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अम्बा राजनीति में आने के बाद बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र में अपने माता-पिता के नक्शेकदम पर विकास और शिक्षा क्षेत्र में विस्तार और बदलाव की बाद करती हैं। वह अपनी प्रतिद्वंदी पार्टी बीजेपी के खिलाफ जमकर चुनावी रैलियों में बोलती हैं।
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अम्बा चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ जिले में विकास को लेकर होने वाली बैठकों में काग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसलिए राहुल गांधी खुद अंबा के लिए रैली करने आए थे।
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