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कोरोना वॉरियर्स: पुलिस में भर्ती होने पहुंची बेटी ने जब शहीद पिता का कटआउट देखा, तो सैल्यूट करके रो पड़ी

First Published Apr 29, 2020, 9:42 AM IST
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उज्जैन, मध्य प्रदेश. एक बेटी के लिए इससे बड़ा दु:ख और क्या हो सकता है कि वो अपने शहीद पिता का आखिरी बार चेहरा तक नहीं देख पाए। लेकिन कोरोना के कारण उसे ऐसा करना पड़ा। यह हैं पिछले दिनों कोरोना संक्रमण से शहीद हुए टीआई यशवंत पाल की बेटी फाल्गुनी। स्वर्गीय पाल उज्जैन के नीलगंगा थाने के टीआई थे। अपने पिता की शहादत के हफ्तेभर बाद उनकी बेटी पुलिस भर्ती के लिए फिटनेस टेस्ट देने इंदौर से उज्जैन पहुंची। यहां पुलिस लाइन में उनके शहीद पिता का कटआउट लगाया गया था। उसे देखकर बेटी की आंखों में आंसू निकल पड़े। लेकिन साहस देखिए, बेटी ने कटआउट को सैल्यूट किया और फिटनेस टेस्ट देने आगे बढ़ गई। फाल्गुनी ने कहा कि वो अपने पिता की तरह देश की सेवा करेगी।

शहीद टीआई पाल का घर इंदौर में है। उनके घर में पत्नी मीना के अलावा दो बेटियां फाल्गुनी और ईशा हैं। अपने पिता के साहस को याद करके उनकी बेटियां रो पड़ती हैं। पत्नी इतना कहती हैं कि उन्होंने अपनी ड्यूटी निभाई, हमारे लिए यह गर्व की बात है। उल्लेखनीय है कि सरकार के ऐलान के बाद फाल्गुनी SI में भर्ती होने फिटनेस टेस्ट देने पहुंची थीं। आईजी राकेश गुप्ता ने कहा कि जल्द ही फाल्गुनी को ज्वाइन मिल जाएगी।

शहीद टीआई पाल का घर इंदौर में है। उनके घर में पत्नी मीना के अलावा दो बेटियां फाल्गुनी और ईशा हैं। अपने पिता के साहस को याद करके उनकी बेटियां रो पड़ती हैं। पत्नी इतना कहती हैं कि उन्होंने अपनी ड्यूटी निभाई, हमारे लिए यह गर्व की बात है। उल्लेखनीय है कि सरकार के ऐलान के बाद फाल्गुनी SI में भर्ती होने फिटनेस टेस्ट देने पहुंची थीं। आईजी राकेश गुप्ता ने कहा कि जल्द ही फाल्गुनी को ज्वाइन मिल जाएगी।

यह तस्वीर टीआई यशवंत पाल के अंतिम संस्कार के दौरान की है। पापा की तस्वीर को देखकर बेटी फूट-फूटकर रो पड़ी थी। संक्रमण के डर से उसे तस्वीर के दर्शन करके अपने मन को तसल्ली देनी पड़ी। पाल के अंतिम संस्कार के दौरान दोनों बेटियां और पत्नी मौजूद थीं। आखिरी बार जब बेटियों ने पिता से बात की थी, तो कहा था-'पापा आप स्ट्रांग हैं..आप जरूर कोरोना को हरा दोगे।' टीआई ने हाथ के इशारे से सबको हिम्मत रखने को कहा था।'

यह तस्वीर टीआई यशवंत पाल के अंतिम संस्कार के दौरान की है। पापा की तस्वीर को देखकर बेटी फूट-फूटकर रो पड़ी थी। संक्रमण के डर से उसे तस्वीर के दर्शन करके अपने मन को तसल्ली देनी पड़ी। पाल के अंतिम संस्कार के दौरान दोनों बेटियां और पत्नी मौजूद थीं। आखिरी बार जब बेटियों ने पिता से बात की थी, तो कहा था-'पापा आप स्ट्रांग हैं..आप जरूर कोरोना को हरा दोगे।' टीआई ने हाथ के इशारे से सबको हिम्मत रखने को कहा था।'

बता दें कि 59 वर्षीय यशवंत पाल ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए थे। मूलत: बुरहानपुर के रहने वाले पाल फिलहाल इंदौर में रह रहे थे। उन्हें 6 अप्रैल को कोरोना संक्रमण रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद इंदौर के सीएचएल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहां से उन्हें अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया था। यहां उन्होंने अंतिम सांस ली थी।

बता दें कि 59 वर्षीय यशवंत पाल ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए थे। मूलत: बुरहानपुर के रहने वाले पाल फिलहाल इंदौर में रह रहे थे। उन्हें 6 अप्रैल को कोरोना संक्रमण रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद इंदौर के सीएचएल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहां से उन्हें अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया था। यहां उन्होंने अंतिम सांस ली थी।

इसे पहले इंदौर के जूनी थाना प्रभारी 45 वर्षीय देवेंद्र चंद्रवंशी भी कोरोना से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। उनका भी इंदौर के अरबिंदो हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था।

इसे पहले इंदौर के जूनी थाना प्रभारी 45 वर्षीय देवेंद्र चंद्रवंशी भी कोरोना से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। उनका भी इंदौर के अरबिंदो हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था।

जाबांज देवेंद्र चंद्रवंशी के अंतिम संस्कार के दौरान उनकी पत्नी को तस्वीर के दर्शन करके अपने मन को संभालना पड़ा। कोरोना वायरस के चलते उनकी पार्थिव देह तक किसी को नहीं जाने दिया गया था। 
(आगे पढ़िए पंजाब की एक ऐसी लेडी पुलिस अफसर की कहानी, जो कैंसर होने के बावजूद अपनी ड्यूटी कर रही)

जाबांज देवेंद्र चंद्रवंशी के अंतिम संस्कार के दौरान उनकी पत्नी को तस्वीर के दर्शन करके अपने मन को संभालना पड़ा। कोरोना वायरस के चलते उनकी पार्थिव देह तक किसी को नहीं जाने दिया गया था। 
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यह मामला पंजाब के अमृतसर का है। ये हैं पुलिस इंस्पेक्टर राजविंदर कौर। जानकार ताज्जुब होगा कि ये कैंसर पीड़ित हैं। यह जानते हुए भी ये पूरी शिद्दत से अपनी ड्यूटी निभा रही हैं। यही नहीं, ये अपने हाथों से खाना बनाकर लॉकडाउन में फंसे गरीब-असहायों को खिला रही हैं। राजविंदर कौर के पति को 1990 में आतंकियों ने मार दिया था। राजविंदर रोज 70 लोगों का खाना बनाकर जरूरतमंदों में बांटती हैं।

यह मामला पंजाब के अमृतसर का है। ये हैं पुलिस इंस्पेक्टर राजविंदर कौर। जानकार ताज्जुब होगा कि ये कैंसर पीड़ित हैं। यह जानते हुए भी ये पूरी शिद्दत से अपनी ड्यूटी निभा रही हैं। यही नहीं, ये अपने हाथों से खाना बनाकर लॉकडाउन में फंसे गरीब-असहायों को खिला रही हैं। राजविंदर कौर के पति को 1990 में आतंकियों ने मार दिया था। राजविंदर रोज 70 लोगों का खाना बनाकर जरूरतमंदों में बांटती हैं।

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