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IIT टॉपर चिराग मंगल पर बनाना चाहता है घर, PM मोदी कहते उसे अपना दोस्त..बड़ा ही होनहार है ये बच्चा

First Published Oct 5, 2020, 8:50 PM IST
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पुणे (महाराष्ट्र). ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JEE MAINS) एडवांस्ड 2020 के परिणाम आज IIT (Delhi) द्वारा घोषित कर दिए गए हैं। इस परीक्षा में पुणे के रहने वाले चिराग फ्लोर ने AIR-1 हासिल कर टॉपर बने। उन्होंने 396 में से 352 मार्कस प्राप्त किए हैं। चिराग की इस कामयाबी के बाद उनके घर में जश्न का महौल है। सुबह से ही उनको लोग बधाइयां दे रहे हैं। बता दें कि अनोखी प्रतिभा के धनी चिराग को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति सम्मानित कर चुके हैं। 

एक मीडिया वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में चिराग ने बताया कि उनका सपना है कि वह मंगल गृह पर कॉलोनी बसाना चाहते हैं। चिराग अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता बहन, टीचर और आकाश इंस्टिट्यूट को देते हैं। बता दें कि चिराग ने आईआईटी की तैयारी 9वीं कक्षा से ही शुरू कर दी थी। वह रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे।

एक मीडिया वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में चिराग ने बताया कि उनका सपना है कि वह मंगल गृह पर कॉलोनी बसाना चाहते हैं। चिराग अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता बहन, टीचर और आकाश इंस्टिट्यूट को देते हैं। बता दें कि चिराग ने आईआईटी की तैयारी 9वीं कक्षा से ही शुरू कर दी थी। वह रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे।

बता दें कि आईआईटी टॉप करने के बाद भी चिराग भारत के किसी भी इंस्टिट्यूट में एडमिशन नहीं लेंगे। क्योंकि उनका मैनचेस्टर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(एमआईटी, अमेरिका) में दाखिला हो चुका है, वह यहीं से अपनी इंजीनियरिंग कर रहे हैं।  लॉकडाउन की वजह वे वहां नहीं जा सके है। लेकिन ऑनलाइन क्लास के जरिए अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। 

बता दें कि आईआईटी टॉप करने के बाद भी चिराग भारत के किसी भी इंस्टिट्यूट में एडमिशन नहीं लेंगे। क्योंकि उनका मैनचेस्टर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(एमआईटी, अमेरिका) में दाखिला हो चुका है, वह यहीं से अपनी इंजीनियरिंग कर रहे हैं।  लॉकडाउन की वजह वे वहां नहीं जा सके है। लेकिन ऑनलाइन क्लास के जरिए अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। 

चिराग ने बताया था कि बचपन से उनका सपना था कि वह एमआईटी से इंजीनियरिंग करें। हालांकि चिराग ने साफ कर दिया कि वह सिर्फ पढ़ाई के लिए विदेश जा रहे हैं। लेकिन काम आकर भारत देशे के लिए करेंगे। अपने लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने दो साल तक मोबाइल फोन छूआ तक नहीं। इतना ही नहीं इस दौरान चिराग ने टीवी तक नहीं देखी।

चिराग ने बताया था कि बचपन से उनका सपना था कि वह एमआईटी से इंजीनियरिंग करें। हालांकि चिराग ने साफ कर दिया कि वह सिर्फ पढ़ाई के लिए विदेश जा रहे हैं। लेकिन काम आकर भारत देशे के लिए करेंगे। अपने लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने दो साल तक मोबाइल फोन छूआ तक नहीं। इतना ही नहीं इस दौरान चिराग ने टीवी तक नहीं देखी।


बता दें कि चिराग के पिता पवन कुमार फलोर पुणे में एक बड़ी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। साथ ही उनकी मां पूजा देवी एक हाउसवाइफ हैं। वहीं उनकी बहन लावण्या फिलहाल पढ़ाई कर रही हैं। उनको अपनी मां के हाथ के बने हुए गोलगप्पे खाना बेहद पसंद हैं।
 


बता दें कि चिराग के पिता पवन कुमार फलोर पुणे में एक बड़ी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। साथ ही उनकी मां पूजा देवी एक हाउसवाइफ हैं। वहीं उनकी बहन लावण्या फिलहाल पढ़ाई कर रही हैं। उनको अपनी मां के हाथ के बने हुए गोलगप्पे खाना बेहद पसंद हैं।
 


चिराग को 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है, वह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गणित और विज्ञान प्रतियोगिताओं के विजेता रहे हैं। उन्होंने खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी पर अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाड पुरस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए चिराग को दोस्त कहकर संबोधित किया था।  चिराग राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों भी सम्मानित हो चुके हैं।
 


चिराग को 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है, वह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गणित और विज्ञान प्रतियोगिताओं के विजेता रहे हैं। उन्होंने खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी पर अंतर्राष्ट्रीय ओलंपियाड पुरस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए चिराग को दोस्त कहकर संबोधित किया था।  चिराग राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों भी सम्मानित हो चुके हैं।
 

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