खुशियों पर संक्रमण: किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि एक ऐसा भी 'दिन' आएगा

First Published 11, Aug 2020, 11:55 AM

मुंबई. शायद किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक ऐसा भी दिन आएगा, जो खुशियों पर ग्रहण बनकर छा जाएगा। कोरोना संक्रमण के कारण इस वर्ष लगभग सारे त्योहार सूखे निकलेंगे। जन्माष्टमी पर देशभर में होने वाले दही-हांडी के आयोजन भी देखने को नहीं मिलेंगे। बता दें कि इस बार जन्माष्टमी दो तिथियों 11 और 12 अगस्त को मनाई जाएगी। जन्माष्टमी पर देशभर में दही हांड का आयोजन होता रहा है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। खासकर महाराष्ट्र और गुजरात में तो दही हांडी एक ऐतिहासिक आयोजन माना जाता है। शायद ऐसा पहली बार होगा, दाही हांडी पर कोरोना के चलते ग्रहण लगा है। छोटे-मोटे आयोजनों को छोड़ दिया जाए, तो इस साल बड़े आयोजन संभव नहीं होंगे। बता दें कि अकेले महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमितों की संख्या 5 लाख 15 हजार पार कर चुकी है। इसमें से 17757 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि इसमें से 3 लाख 52 हजार से ज्यादा ठीक हो चुके हैं।  मुंबई के भाजपा नेता और दही हांडी आयोजन समिति के प्रमुख राम कदम पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि इस साल घाटकोपर में दही हांडी समारोह नहीं होगा। वहीं, गुजरात में संक्रमितों की संख्या 72 हजार से ज्यादा है। इसमें से 2674 की मौत हो चुकी है। हालांकि यहां भी 55 हजार से ज्यादा रिकवर हो चुके हैं। जानिए क्यों मनाया जाता है दही हांडी समारोह और देखिए कुछ पुरानी तस्वीरें..

<p>दाही हांडी की कहानी महाभारतकालीन है। कहते हैं कि भगवान कृष्ण से माखन छुपाने के लिए वृंदावन की महिलाओं ने उसे मटकी में भरकर टांगना शुरू कर दिया था। लेकिन कान्हा अपने साथियों के साथ पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ देते थे। यह पर्व तब से चला आ रहा है। दही हांडी में कई फिल्म सितारे शामिल होते रहे हैं।</p>

दाही हांडी की कहानी महाभारतकालीन है। कहते हैं कि भगवान कृष्ण से माखन छुपाने के लिए वृंदावन की महिलाओं ने उसे मटकी में भरकर टांगना शुरू कर दिया था। लेकिन कान्हा अपने साथियों के साथ पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ देते थे। यह पर्व तब से चला आ रहा है। दही हांडी में कई फिल्म सितारे शामिल होते रहे हैं।

<p>मुंबई के दही हांडी आयोजन देशभर में प्रसिद्ध हैं।</p>

मुंबई के दही हांडी आयोजन देशभर में प्रसिद्ध हैं।

<p>इस बार दही हांडी का यह हर्ष-उल्लास देखने को नहीं मिलेगा।</p>

इस बार दही हांडी का यह हर्ष-उल्लास देखने को नहीं मिलेगा।

<p>दही-हांडी का आयोजन हर उम्र के लोगों में उत्साह भरता रहा है।</p>

दही-हांडी का आयोजन हर उम्र के लोगों में उत्साह भरता रहा है।

<p>जन्माष्टमी पर स्कूलों में भी कार्यक्रम होते रहे हैं। इस बार ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला।</p>

जन्माष्टमी पर स्कूलों में भी कार्यक्रम होते रहे हैं। इस बार ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला।

<p>जन्माष्टमी पर सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रम होते रहे हैं।</p>

जन्माष्टमी पर सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रम होते रहे हैं।

<p>इस तरह देखने को मिलता रहा है जन्माष्टमी पर जोश।</p>

इस तरह देखने को मिलता रहा है जन्माष्टमी पर जोश।

<p>दही-हांडी के कार्यक्रम में फिल्म सितारे शामिल होते रहे हैं।</p>

दही-हांडी के कार्यक्रम में फिल्म सितारे शामिल होते रहे हैं।

<p>कोरोना के चलते दही-हांडी के आयोजन कैंसल कर दिए गए हैं।</p>

कोरोना के चलते दही-हांडी के आयोजन कैंसल कर दिए गए हैं।

<p>पूरे देश में ऐसे आयोजन होते रहे हैं।</p>

पूरे देश में ऐसे आयोजन होते रहे हैं।

<p>दही-हांडी के आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते रहे हैं।</p>

दही-हांडी के आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते रहे हैं।

<p>कोरोना के कारण इस बार दही-हांडी के आयोजन नहीं होंगे।</p>

कोरोना के कारण इस बार दही-हांडी के आयोजन नहीं होंगे।

<p>कोरोना संक्रमण के चलते दही-हांडी सहित तमाम धार्मिक आयोजन नहीं हो पाए।</p>

कोरोना संक्रमण के चलते दही-हांडी सहित तमाम धार्मिक आयोजन नहीं हो पाए।

<p>इस तरह के दृश्य दिखते रहे हैं जन्माष्टमी पर।</p>

इस तरह के दृश्य दिखते रहे हैं जन्माष्टमी पर।

<p>यह तस्वीर जन्माष्टमी पर दही-हांडी आयोजन की पुरानी याद ताजा कराती है।</p>

यह तस्वीर जन्माष्टमी पर दही-हांडी आयोजन की पुरानी याद ताजा कराती है।

<p>इस बार निराश हैं मस्तानों की टोलियां।</p>

इस बार निराश हैं मस्तानों की टोलियां।

<p>दही-हांडी आयोजन की एक पुरानी तस्वीर।</p>

दही-हांडी आयोजन की एक पुरानी तस्वीर।

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