Asianet News Hindi

भंडारा हादसे की भयावह तस्वीर: नन्हें शरीर भभक रहे थे, काले पड़ चुके थे मासूमों के चेहरे..कांप गए लोग

First Published Jan 10, 2021, 4:52 PM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

भंडाला (महाराष्ट्र). शुक्रवार- शनिवार की दरमियानी रात भंडारा के जिला अस्पताल के हादसे ने हर किसी को हिलाकर रख दिया है। उस भयानक मंजर को जिसने अपनी आंखों से देखा वह पूरी रात सो नहीं सका। सुरक्षा गार्ड से लेकर अस्पताल के डॉक्टर और नर्स सब यही कह रहे हैं कि हमारे सामने 10 नवजात बच्चों की जिंदा जलकर मौत हो गई और चाहकर भी मासूमों को नहीं बचा सके। चश्मदीद बोले कि उन्हें पूरी जिंदगी अफसोस रहेगा कि वह नवजातों को नहीं बचा पाए। पढ़िए चश्मदीदों की आपबीती जिस जान दिल कांप जाएगा...
 


दरअसल, जिस वक्त यह भयानक हदासा हुआ उस दौरान भंडारा जिला अस्पताल में सुरक्षाकर्मी गौरव रहपड़े ड्यूटी पर तैनात थे। उसने दैनिक भास्कर के रिपोर्टर को बयां की हादसे की आपबीती। गौरव ने बताया कि जैसे ही मुझे पता चला कि न्यू बोर्न केयर यूनिट में आग लगी है तो मैं दौड़ते हुए वहां पहुंचा तो देखा तो बच्चों का वार्ड धुएं से भरा हुआ था। हम लोग चाहकर भी अंदर नहीं जा पा रहे थे। क्योंकि सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और दम घुट रहा था। आग की वजह से बिजली कट चुकी थी और पूरे यूनिट में सिर्फ काला धुआं ही था। किसी तरह से दरवाजों और खिड़की को तोड़करधुंए के निकलने की जगह बनाई। 


दरअसल, जिस वक्त यह भयानक हदासा हुआ उस दौरान भंडारा जिला अस्पताल में सुरक्षाकर्मी गौरव रहपड़े ड्यूटी पर तैनात थे। उसने दैनिक भास्कर के रिपोर्टर को बयां की हादसे की आपबीती। गौरव ने बताया कि जैसे ही मुझे पता चला कि न्यू बोर्न केयर यूनिट में आग लगी है तो मैं दौड़ते हुए वहां पहुंचा तो देखा तो बच्चों का वार्ड धुएं से भरा हुआ था। हम लोग चाहकर भी अंदर नहीं जा पा रहे थे। क्योंकि सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और दम घुट रहा था। आग की वजह से बिजली कट चुकी थी और पूरे यूनिट में सिर्फ काला धुआं ही था। किसी तरह से दरवाजों और खिड़की को तोड़करधुंए के निकलने की जगह बनाई। 


चश्मदीद ने बताया कि जब अंदर पहुंचे तो वहां का भयानक सीन बेहद डरावना था। बच्चों के शरीर बुरी तरह से गर्म हो चुके थे। उनके शरीर पर काले निशान पड़ गए थे। नन्हें शरीर इतने गर्म हो चुके थे कि उनको हाथों से महसूस किया जा सकता था। किसी तरह हम 7 बच्चों को बचाने में कामयाब हुआ और उनको दूसरे वार्ड में शिपट किया। लेकिन उस दौरान मासूमों की आंखे बेहद डरावनी थी, जिसे में पूरी जिंदगी नहीं भूल सकता हूं। (न्यू बोर्न केयर यूनिट, जो आग के बाद काली पड़ गई)


चश्मदीद ने बताया कि जब अंदर पहुंचे तो वहां का भयानक सीन बेहद डरावना था। बच्चों के शरीर बुरी तरह से गर्म हो चुके थे। उनके शरीर पर काले निशान पड़ गए थे। नन्हें शरीर इतने गर्म हो चुके थे कि उनको हाथों से महसूस किया जा सकता था। किसी तरह हम 7 बच्चों को बचाने में कामयाब हुआ और उनको दूसरे वार्ड में शिपट किया। लेकिन उस दौरान मासूमों की आंखे बेहद डरावनी थी, जिसे में पूरी जिंदगी नहीं भूल सकता हूं। (न्यू बोर्न केयर यूनिट, जो आग के बाद काली पड़ गई)


किसी तरह हम उन 10 बच्चों के पास पहुंचे जो इस हादसे में मारे जा चुके थे। उनके चेहरे पूरी तरह से काले पड़ चुके थे। जिन्हें देखने में भी डर लग रहा था, जो जब आग की भयानक लपटें मासूमों पर पड़ी होंगी तो क्या हाल हुआ होगा। जैसे तैसे कपड़ों में लपेट कर उन बच्चों को वहां से हटाया गया और बच्चों के शव परिजनों तक पहुंचाए गए। न्यू बॉर्न यूनिट का वह भयावह काले धुंए से भरा मंजर याद करते हुए गौरव की आंखें भी नम हो जाती हैं। (हादसे का चश्मदीद गौरव रहपड़े)


किसी तरह हम उन 10 बच्चों के पास पहुंचे जो इस हादसे में मारे जा चुके थे। उनके चेहरे पूरी तरह से काले पड़ चुके थे। जिन्हें देखने में भी डर लग रहा था, जो जब आग की भयानक लपटें मासूमों पर पड़ी होंगी तो क्या हाल हुआ होगा। जैसे तैसे कपड़ों में लपेट कर उन बच्चों को वहां से हटाया गया और बच्चों के शव परिजनों तक पहुंचाए गए। न्यू बॉर्न यूनिट का वह भयावह काले धुंए से भरा मंजर याद करते हुए गौरव की आंखें भी नम हो जाती हैं। (हादसे का चश्मदीद गौरव रहपड़े)