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झुग्गियों में जन्मे..संतरे बेच बने करोड़पति: रामजान में प्यारे खान ने दान की एक करोड़ की ऑक्सीजन

First Published Apr 28, 2021, 12:56 PM IST
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नागपुर (महाराष्ट्र). भारत में इस वक्त कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचाकर रखा है। अस्पतालों में खाली बेड नहीं, एडमिट हो जाओ तो वहां पर ऑक्सीजन नहीं मिलेगी। हालांकि, कोरोना संक्रमण से लड़ाई में हर कोई अपने स्तर से शासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। संकट की इस घड़ी में नागपुर के एक शख्स उम्मीद की किरण बनकर सामने आए हैं। उन्होंने दरियादिली दिखाते हुए कोरोना मरीजों की जिंदगी के लिए करीब एक करोड़ रुपये की 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दान की है। बता दें कि उनकी सफलता की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है, उन्होंने संतरे बेचने से शुरुआत की थी और आज करोड़पति बन गए हैं।  किसी फिल्म से कम नहीं है उनकी कहानी..आइए जानते हैं आखिर कैसे झुग्गियों में रहने वाला एक शख्स बन गया करोड़पति...
 


दरअसल, रामजान के महीने में यह नेक काम करने वाले शख्स का नाम प्यारे खान है। जो कि नागपुर में कारोबारी हैं। वह शहर के  एक बड़े ट्रांसपोर्टर हैं। लेकिन इन दिनों उनकी पहचान किसी बिजनेसमैन की नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों क वजह से नागपुर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए एक मसीहा बने हुए हैं। वह अपने वाहनों से खुद अस्पतालों में ऑक्सीजन पहुंचा रहे हैं। साथ ही इस बात का भी ध्यान रख रहे हैं कि मरीजों को ऑक्सीजन मिलने में किसी तरह की कोई परेशानी तो नहीं आ रही।
 


दरअसल, रामजान के महीने में यह नेक काम करने वाले शख्स का नाम प्यारे खान है। जो कि नागपुर में कारोबारी हैं। वह शहर के  एक बड़े ट्रांसपोर्टर हैं। लेकिन इन दिनों उनकी पहचान किसी बिजनेसमैन की नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों क वजह से नागपुर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए एक मसीहा बने हुए हैं। वह अपने वाहनों से खुद अस्पतालों में ऑक्सीजन पहुंचा रहे हैं। साथ ही इस बात का भी ध्यान रख रहे हैं कि मरीजों को ऑक्सीजन मिलने में किसी तरह की कोई परेशानी तो नहीं आ रही।
 


बता दें कि कारोबारी प्यारे खान ने 25 टैंकरों की मदद से दस दिनों में नागपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों को 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचा चुके हैं। उनके खुद के यह टैंकर भिलाई, विशाखापट्टनम, बेल्लारी से ऑक्सीजन ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह रायपुर, भिलाई, राउरकेला जैसी जगहों पर सप्लाई करा चुके हैं।  इतना ही नहीं वह  AIIMS सहित अन्य अस्पतालों में 50 लाख रुपए की ऑक्सीजन भी दान कर चुके हैं।


बता दें कि कारोबारी प्यारे खान ने 25 टैंकरों की मदद से दस दिनों में नागपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों को 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचा चुके हैं। उनके खुद के यह टैंकर भिलाई, विशाखापट्टनम, बेल्लारी से ऑक्सीजन ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह रायपुर, भिलाई, राउरकेला जैसी जगहों पर सप्लाई करा चुके हैं।  इतना ही नहीं वह  AIIMS सहित अन्य अस्पतालों में 50 लाख रुपए की ऑक्सीजन भी दान कर चुके हैं।


प्यारे खान की पर्सनल लाइफ किसी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनका परिवार कभी नागपुर के ताजबाग इलाके की झोपड़ियों में रहता था। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन इतने बड़े आदमी बन जाएंगे। प्यारे खान ने अपनी काम की शुरूआत 1995 में नागपुर रेलवे स्टेशन के सामने संतरे बेचने से की थी। इसके बाद ऑटो रिक्शा चलाने का काम किया। इसके अलावा वह एक आर्केस्ट्रा कंपनी में भी काम कर चुके हैं।


प्यारे खान की पर्सनल लाइफ किसी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनका परिवार कभी नागपुर के ताजबाग इलाके की झोपड़ियों में रहता था। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन इतने बड़े आदमी बन जाएंगे। प्यारे खान ने अपनी काम की शुरूआत 1995 में नागपुर रेलवे स्टेशन के सामने संतरे बेचने से की थी। इसके बाद ऑटो रिक्शा चलाने का काम किया। इसके अलावा वह एक आर्केस्ट्रा कंपनी में भी काम कर चुके हैं।


प्यारे खान अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत पर करोड़पति हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आज वह 400 करोड़ रुपए कीमत की अस्मी रोडवेज नाम की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक हैं। उन्होंने सैंकड़ों लोगों को रोजगार देकर रखा है। इनता ही नहीं ट्रांसपोर्ट कारोबार पूरे भारत के साथ ही नेपाल से भूटान तक फैला हुआ है। 


प्यारे खान अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत पर करोड़पति हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आज वह 400 करोड़ रुपए कीमत की अस्मी रोडवेज नाम की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक हैं। उन्होंने सैंकड़ों लोगों को रोजगार देकर रखा है। इनता ही नहीं ट्रांसपोर्ट कारोबार पूरे भारत के साथ ही नेपाल से भूटान तक फैला हुआ है। 


बता दें कि प्यारे खान की सक्सेस स्टोरी IIM अहमदाबाद में केस स्टडी में भी शामिल है। वह आईआईएम अहमदाबाद और अन्य बड़े संस्थानों से लगभग 150 ज्यादा पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में व्यवसाइयों से अपील की थी कि वे कोरोना संकट में आर्थिक मदद करें। जिसके बाद महामारी की गंभीर स्थिति को समझते हुए प्यारे खान ने मदद करने का फैसला किया।


बता दें कि प्यारे खान की सक्सेस स्टोरी IIM अहमदाबाद में केस स्टडी में भी शामिल है। वह आईआईएम अहमदाबाद और अन्य बड़े संस्थानों से लगभग 150 ज्यादा पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में व्यवसाइयों से अपील की थी कि वे कोरोना संकट में आर्थिक मदद करें। जिसके बाद महामारी की गंभीर स्थिति को समझते हुए प्यारे खान ने मदद करने का फैसला किया।


(अपने ऑफिस में ट्रांसपोर्ट कारोबारी प्यारे खान किसी से चर्चा करते हुए।)

 

 

Asianet News का विनम्र अनुरोधः आइए साथ मिलकर कोरोना को हराएं, जिंदगी को जिताएं...। जब भी घर से बाहर निकलें माॅस्क जरूर पहनें, हाथों को सैनिटाइज करते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वैक्सीन लगवाएं। हमसब मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग जीतेंगे और कोविड चेन को तोडेंगे। #ANCares #IndiaFightsCorona


(अपने ऑफिस में ट्रांसपोर्ट कारोबारी प्यारे खान किसी से चर्चा करते हुए।)

 

 

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