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साथी की मौत के बाद दोस्तों ने बनाया ऑक्सीजन बैंक, मसीहा बन बचा रहे कई जिंदगी..बांट रहे मरीजों को खाना

First Published Apr 25, 2021, 12:38 PM IST
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मुंबई (Maharashtra) । कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लोग डरे हुए हैं। ऐसे में कुछ लोग अब दूसरों की जान बचाने के बारे में भी सोचने लगे हैं। इसके लिए वो खुलकर आगे आ रहे हैं। ऐसे में आज हम आपको दो सक्सेज कहानियां सुना रहे हैं, जिसे पढ़ने के बाद निश्चित ही आप भी कुछ ऐसा ही करना चाहेंगे। इनमें एक कहानी 14 दोस्तों की भी है, जो मिलकर ऑक्सीजन बैंक संचालित कर रहे हैं।

नवी मुंबई में चार्टर्ड अकाउंटेंट, प्रॉपर्टी डीलर व अन्य पेशें से जुड़े 14 दोस्तों ने मिलकर ऑक्सीजन बैंक शुरू किया है। जिसमें, रश्मिकांत महापात्रा भी जुड़े हुए हैं। वे बताते हैं कि इसमें किसी ने 20 तो किसी ने 25 लाख रुपए दिए हैं। 

नवी मुंबई में चार्टर्ड अकाउंटेंट, प्रॉपर्टी डीलर व अन्य पेशें से जुड़े 14 दोस्तों ने मिलकर ऑक्सीजन बैंक शुरू किया है। जिसमें, रश्मिकांत महापात्रा भी जुड़े हुए हैं। वे बताते हैं कि इसमें किसी ने 20 तो किसी ने 25 लाख रुपए दिए हैं। 

रश्मिकांत महापात्रा के मुताबिक कोरोना के दूसरे लहर में हमारे ग्रुप के एक सदस्य को समय से ऑक्सीजन नहीं मिलने की वजह मौत हो गई थी। इस घटना के बाद हम दोस्तों ने ऑक्सीजन बैंक बनाने का फैसला लिया।

रश्मिकांत महापात्रा के मुताबिक कोरोना के दूसरे लहर में हमारे ग्रुप के एक सदस्य को समय से ऑक्सीजन नहीं मिलने की वजह मौत हो गई थी। इस घटना के बाद हम दोस्तों ने ऑक्सीजन बैंक बनाने का फैसला लिया।

रश्मिकांत महापात्रा बताते हैं कि करीब 200 मरीजों को मुफ्त और कुछ को मामूली कीमत पर ऑक्सीजन दी गई है। 100 पोर्टेबल ऑक्सीजन बॉटल्स का स्टॉक है, जो इमरजेंसी वाले कोविड पेशेंट के लिए रिजर्व है।

(प्रतीकात्मक फोटो) 

रश्मिकांत महापात्रा बताते हैं कि करीब 200 मरीजों को मुफ्त और कुछ को मामूली कीमत पर ऑक्सीजन दी गई है। 100 पोर्टेबल ऑक्सीजन बॉटल्स का स्टॉक है, जो इमरजेंसी वाले कोविड पेशेंट के लिए रिजर्व है।

(प्रतीकात्मक फोटो) 

एडवांस में 200 यूनिट ऑक्सीजन का ऑर्डर दिया जा चुका है। ऑक्सीजन बैंक से जुड़े सुरेंद्र सिंह और अमित तेनानी कहते हैं कि यह भगवान का काम है। ऐसा काम करने का मौका बहुत कम मिलता है।

(प्रतीकात्मक फोटो) 

एडवांस में 200 यूनिट ऑक्सीजन का ऑर्डर दिया जा चुका है। ऑक्सीजन बैंक से जुड़े सुरेंद्र सिंह और अमित तेनानी कहते हैं कि यह भगवान का काम है। ऐसा काम करने का मौका बहुत कम मिलता है।

(प्रतीकात्मक फोटो) 

इसी तरह दूसरी कहानी महाजन संस्था के ट्रस्टी गिरीश भाई जे. शाह की है, जिन्होंने मुंबई के पश्चिम उपनगर में 20 लोगों की टीम बनाई है। ये टीम होम क्वारंटाइन लोगों को घर जाकर मुफ्त में खाना पहुंचा रहे हैं।

इसी तरह दूसरी कहानी महाजन संस्था के ट्रस्टी गिरीश भाई जे. शाह की है, जिन्होंने मुंबई के पश्चिम उपनगर में 20 लोगों की टीम बनाई है। ये टीम होम क्वारंटाइन लोगों को घर जाकर मुफ्त में खाना पहुंचा रहे हैं।

परेश शाह के मुताबिक ऑटो रिक्शा और दूसरी गाड़ियों से टिफिन पहुंचाया जाता है। रोजाना करीब 500 लोगों को ये सर्विस दी जाती है। शनिवार और रविवार को मांग बढ़ भी जाती है, लेकिन हम सेवा देने का काम करते हैं। 
 

परेश शाह के मुताबिक ऑटो रिक्शा और दूसरी गाड़ियों से टिफिन पहुंचाया जाता है। रोजाना करीब 500 लोगों को ये सर्विस दी जाती है। शनिवार और रविवार को मांग बढ़ भी जाती है, लेकिन हम सेवा देने का काम करते हैं। 
 

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