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घर से भागकर मैं 'पूरी औरत' बन गया...रोंगटे खड़े कर देगी टीवी स्टार की ये दर्दनाक कहानी

First Published Feb 3, 2020, 2:31 PM IST
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मुंबई. शादियों और बच्चा होने पर किन्नरों को खुशी मनाते, आंगन में नाचते और शगुन लेते हुए आपने जरूर देखा होगा। है न? पर क्या कभी सोचा है कि ये किन्नर भीख मांगने को क्यों मजबूर हैं? ये सवाल अगर आपके मन में उठने से पहले ही खत्म हो जाते हैं तो इसलिए क्योंकि किन्नरों को अभिशाप माना जाता है। समाज में ये नफरत की नजर से देखे जाते हैं। देश में कानून ने भले इन्हें थर्ड जेंडर के रूप में पहचान दे दी लेकिन अपने वजूद और सम्मान के लिए ये समाज में जूझते रहते हैं। बचपन से ही किन्नर बच्चों के साथ बहुत सी बुरी और भयानक यादें जुड़ी होती हैं उनका यौन शोषण होता है। ऐसे ही एक ट्रांसडेंजर की आपबीती सोशल मीडिया पर सामने आई है। ये ट्रांसजेंडर आज टीवी पर डांस रियलिटी शो होस्ट करती है और एक बड़ी स्टार है लेकिन कभी उसके साथ घर, स्कूल और पड़ोस में रोंगटे खड़े कर देने वाली यौन शोषण की घटनाएं हुई थीं। 

ये कहानी हैं प्रनीत की जो आज गंगा नाम से सारी दुनिया में जानी जाती हैं। गंगा ने अपने बचपन से लेकर अब तक की संघर्ष की कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की। उनकी कहानी से न लोगों को प्रेरणा मिलती है बल्कि आंखे भी नम हो जाती हैं। वो बताती हैं कि कैसे जब वो बचपन में प्रनीत नाम का एक लड़का हुआ करती थीं तो उनको अपना मां की साड़ी पहनना पसंद था।

ये कहानी हैं प्रनीत की जो आज गंगा नाम से सारी दुनिया में जानी जाती हैं। गंगा ने अपने बचपन से लेकर अब तक की संघर्ष की कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की। उनकी कहानी से न लोगों को प्रेरणा मिलती है बल्कि आंखे भी नम हो जाती हैं। वो बताती हैं कि कैसे जब वो बचपन में प्रनीत नाम का एक लड़का हुआ करती थीं तो उनको अपना मां की साड़ी पहनना पसंद था।

जब मां घर पर नहीं होती तो मैं मां की नई-नई साड़ी पहनता था, मुझे लड़का होने के बावजूद अपनी बहनों के साथ घर-घर खेलना पसंद था। अपने स्त्रैण (लड़कियों वाली आदतें) व्यवहार के कारम मुझे अपनी बहनों के कपड़े पसंद थे लेकिन वो मैं पहन नहीं सकता था।

जब मां घर पर नहीं होती तो मैं मां की नई-नई साड़ी पहनता था, मुझे लड़का होने के बावजूद अपनी बहनों के साथ घर-घर खेलना पसंद था। अपने स्त्रैण (लड़कियों वाली आदतें) व्यवहार के कारम मुझे अपनी बहनों के कपड़े पसंद थे लेकिन वो मैं पहन नहीं सकता था।

मेरे बचपन में बहुत सी बुरी यादें जुड़ी हैं जैसे स्कूल में मेरे साथ पढ़ने वाले बच्चे (क्लासमेट्स) मुझे 'छक्का-छक्का' बुलाते थे। जब भी मैं नॉर्मल बच्चों की तरह रहने की कोशिश करता तो मुझे बार-बार एहसास दिलाया जाता कि मेरी लड़कियों वाली हरकतों की वजह से मैं नॉर्मल नहीं हूं।

मेरे बचपन में बहुत सी बुरी यादें जुड़ी हैं जैसे स्कूल में मेरे साथ पढ़ने वाले बच्चे (क्लासमेट्स) मुझे 'छक्का-छक्का' बुलाते थे। जब भी मैं नॉर्मल बच्चों की तरह रहने की कोशिश करता तो मुझे बार-बार एहसास दिलाया जाता कि मेरी लड़कियों वाली हरकतों की वजह से मैं नॉर्मल नहीं हूं।

बचपन में मेरे साथ वो भी हुआ जो मैं याद कर थर्रा जाता हूं, जब हम अपनी बिल्डिंग में छुपन-छुपाई (हाइड एंड सीक) खेलते थे तो वहां पड़ोस के लड़के मुझे कोने में दबोच लेते थे। वे जबरन मेरा हाथ पकड़ मुझसे अपने प्राइवेट पार्टस छूने को कहते थे। उन्हें इसमें मजा आता था पूरा ग्रुप मेरे साथ यही करता, एक एक करके वे मुझे अपने लिंग (पीनस) की लंबाई मापने को कहते।

बचपन में मेरे साथ वो भी हुआ जो मैं याद कर थर्रा जाता हूं, जब हम अपनी बिल्डिंग में छुपन-छुपाई (हाइड एंड सीक) खेलते थे तो वहां पड़ोस के लड़के मुझे कोने में दबोच लेते थे। वे जबरन मेरा हाथ पकड़ मुझसे अपने प्राइवेट पार्टस छूने को कहते थे। उन्हें इसमें मजा आता था पूरा ग्रुप मेरे साथ यही करता, एक एक करके वे मुझे अपने लिंग (पीनस) की लंबाई मापने को कहते।

ये सब जितना परेशान करने वाला था उससे ज्यादा मुझे डर ही लगता था। मुझे बहुत शर्मिंदगी होती थी जब वो लोग मुझे प्रताड़ित करते थे। पर इतना ही नहीं जब मैं मदद मांगने के लिए अपने परिवार के पास भागा-भागा गया तो उन्होंने उल्टा मुझे ही डांट दिया। उन्होंने कहा कि लड़कों जैसे रहोगे तो कोई क्यों तंग करेगा? स्कूल में भी टीचर्स मुझसे पूछते तुम लड़का हो या लड़की हो? मुझे ये सब बहुत परेशान करता था। मैं बाथरूम में कई घंटो रोता था। ऐसे में एक दिन मैंने सोच लिया कि बस बहुत हो गया और घर से निकल गया।

ये सब जितना परेशान करने वाला था उससे ज्यादा मुझे डर ही लगता था। मुझे बहुत शर्मिंदगी होती थी जब वो लोग मुझे प्रताड़ित करते थे। पर इतना ही नहीं जब मैं मदद मांगने के लिए अपने परिवार के पास भागा-भागा गया तो उन्होंने उल्टा मुझे ही डांट दिया। उन्होंने कहा कि लड़कों जैसे रहोगे तो कोई क्यों तंग करेगा? स्कूल में भी टीचर्स मुझसे पूछते तुम लड़का हो या लड़की हो? मुझे ये सब बहुत परेशान करता था। मैं बाथरूम में कई घंटो रोता था। ऐसे में एक दिन मैंने सोच लिया कि बस बहुत हो गया और घर से निकल गया।

फिर साल 2015 में मैं मुंबई में होने वाली प्राइड परेड में शामिल हुआ। यहां मैंने एक बेहद खूबसूरत साड़ी पहनी और खुद को पूरी औरत बनने के लिए मंजूर कर लिया। उस दिन मैंने खुद को असली रूप में पाया और उससे बड़ी खुशी कुछ नहीं थी। सब लोग मेरी साड़ी की तारीफ कर रहे थे कितना अच्छा लग रहा था। वहीं पर फिल्ममेकर विशाल श्रीवास्तव भी थे जिन्होंने मुझे दोखा और अपनी फिल्म 'वजूद' में कास्ट कर लिया। मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ लेकिन बाद में मैंने वाकई इस फिल्म में काम किया और ये पूरी दुनिया में पसंद की गई। लोग मुझे पहचानने लगे और मुझे काम भी मिला। हालांकि कुछ ट्रांसजेंडर्स सड़कों पर भीख मांगते हैं या सेक्स वर्कर बन जाते हैं लेकिन मैं आज एक स्टार हूं।

फिर साल 2015 में मैं मुंबई में होने वाली प्राइड परेड में शामिल हुआ। यहां मैंने एक बेहद खूबसूरत साड़ी पहनी और खुद को पूरी औरत बनने के लिए मंजूर कर लिया। उस दिन मैंने खुद को असली रूप में पाया और उससे बड़ी खुशी कुछ नहीं थी। सब लोग मेरी साड़ी की तारीफ कर रहे थे कितना अच्छा लग रहा था। वहीं पर फिल्ममेकर विशाल श्रीवास्तव भी थे जिन्होंने मुझे दोखा और अपनी फिल्म 'वजूद' में कास्ट कर लिया। मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ लेकिन बाद में मैंने वाकई इस फिल्म में काम किया और ये पूरी दुनिया में पसंद की गई। लोग मुझे पहचानने लगे और मुझे काम भी मिला। हालांकि कुछ ट्रांसजेंडर्स सड़कों पर भीख मांगते हैं या सेक्स वर्कर बन जाते हैं लेकिन मैं आज एक स्टार हूं।

मेरा नाम गंगा है, मैं ट्रांसजेंडर हूं और मुंबई में मराठी डांस रियलिटी शो 'युवा डांसिग क्वीन' शो की को-होस्ट हूं। डांस की वजह से ही मुझे ये पहचान मिली है। हर दूसरा शख्स मेरी स्ट्रगल और पहचान की तारीफ करता है। अब मैं एक ट्रांसजेंडर के तौर पर खुद को स्थापित कर चुका था, प्रनीत कौन है मैं नहीं जानती। मैं एक महिला हूं।

मेरा नाम गंगा है, मैं ट्रांसजेंडर हूं और मुंबई में मराठी डांस रियलिटी शो 'युवा डांसिग क्वीन' शो की को-होस्ट हूं। डांस की वजह से ही मुझे ये पहचान मिली है। हर दूसरा शख्स मेरी स्ट्रगल और पहचान की तारीफ करता है। अब मैं एक ट्रांसजेंडर के तौर पर खुद को स्थापित कर चुका था, प्रनीत कौन है मैं नहीं जानती। मैं एक महिला हूं।

मेरे शुरुआती दिन बहुत बुरे और डरावने थे, लेकिन मैंने उन सभी से लड़ाई लड़ी, जो केवल मेरे होने में ही सुंदरता ढूंढते हैं। मैं आप सभी को अपनी कहानी में अब गर्व महसूस करती हूं। दुनिया बहुत बड़ी है और जिंदगी उससे भी बड़ी इसलिए खुद पर भरोसा करो और आगे बढ़ने के लिए लंबी छलांग लगाओ, मुझे भरोसा है आप उड़ जाओगे! ” (सभी तस्वीरें प्रनीत के फेसबुक अकाउंट से)

मेरे शुरुआती दिन बहुत बुरे और डरावने थे, लेकिन मैंने उन सभी से लड़ाई लड़ी, जो केवल मेरे होने में ही सुंदरता ढूंढते हैं। मैं आप सभी को अपनी कहानी में अब गर्व महसूस करती हूं। दुनिया बहुत बड़ी है और जिंदगी उससे भी बड़ी इसलिए खुद पर भरोसा करो और आगे बढ़ने के लिए लंबी छलांग लगाओ, मुझे भरोसा है आप उड़ जाओगे! ” (सभी तस्वीरें प्रनीत के फेसबुक अकाउंट से)

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