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जमीन पर 2, हवा में 2.5 किमी तक दुश्मनों के मार सकती है शिल्का, इस खतरनाक गन की कमांड संभाल रही पानीपत की बेटी

First Published Jan 26, 2021, 11:32 AM IST
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नई दिल्ली. गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के मौके पर राजपथ पर भारतीय सेना अपनी ताकत दिखा रही हैं। इस परेड में आर्मी की एंटी एयरक्राफ्ट गन अपग्रेडेड शिल्का को पहली बार शामिल किया गया है। इसी के साथ महिलाओं का शौर्य और पराक्रम को दिखाने कैप्टन प्रीति चौधरी आईं। पानीपत के लोगों के लिए ये बहुत ही गौरव की बात है। प्रीति गांव बिंझौल, पानीपत से ताल्लुक रखती हैं और इस गांव से ताल्लुक रखने वाली इस बहादुर बेटी को शिल्का की कमांड सौंपी गई। वो 140 वायु रक्षा रेजिमेंट की कैप्टन हैं। 

प्रीति चौधरी के पिता इंद्र सिंह आर्मी से रिटायर्ड कैप्टन हैं। पैतृक घर गांव बिंझौल में है। सर्विस के दौरान पिता की पोस्टिंग कई जगह होने के कारण बारहवीं तक उन्होंने आठ स्कूल बदले। सेवानिवृत्ति के समय इंद्र सिंह ने चंडीगढ़ के नजदीक गांव जीरकपुर में घर बना लिया।

प्रीति चौधरी के पिता इंद्र सिंह आर्मी से रिटायर्ड कैप्टन हैं। पैतृक घर गांव बिंझौल में है। सर्विस के दौरान पिता की पोस्टिंग कई जगह होने के कारण बारहवीं तक उन्होंने आठ स्कूल बदले। सेवानिवृत्ति के समय इंद्र सिंह ने चंडीगढ़ के नजदीक गांव जीरकपुर में घर बना लिया।

प्रीति ने चंडीगढ़ के कॉलेज जीजीजी-11 से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज में ही उन्होंने एनसीसी ज्वॉइन की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सर्विस सलेक्शन बोर्ड (SSB) का टेस्ट क्लीयर किया था। इसके बाद ऑफिसर ट्रेनिंग कैंप चेन्नई में ट्रेनिंग पूरी की।

प्रीति ने चंडीगढ़ के कॉलेज जीजीजी-11 से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज में ही उन्होंने एनसीसी ज्वॉइन की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सर्विस सलेक्शन बोर्ड (SSB) का टेस्ट क्लीयर किया था। इसके बाद ऑफिसर ट्रेनिंग कैंप चेन्नई में ट्रेनिंग पूरी की।

10 मार्च 2018 को चेन्नई कैंप में हुई पासिंग आउट परेड में प्रीति (उस समय लेफ्टिनेंट) को प्रतिष्ठित स्वार्ड ऑफ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। प्रीति के पिता ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी बेटी इन दिनों अंबाला में तैनात हैं। 
 

10 मार्च 2018 को चेन्नई कैंप में हुई पासिंग आउट परेड में प्रीति (उस समय लेफ्टिनेंट) को प्रतिष्ठित स्वार्ड ऑफ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। प्रीति के पिता ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी बेटी इन दिनों अंबाला में तैनात हैं। 
 

एंटी एयरक्राफ्ट गन की कमान संभालने वाली प्रीति चौधरी सेना की ओर से अकेली महिला टुकड़ी की कमांडर हैं। पिता के हवाले से कहा जा रहा है कि रेजिमेंट का उपकरण होने के चलते उन्हें ये गौरव हासिल हुआ है, जैंडर के कारण नहीं।

एंटी एयरक्राफ्ट गन की कमान संभालने वाली प्रीति चौधरी सेना की ओर से अकेली महिला टुकड़ी की कमांडर हैं। पिता के हवाले से कहा जा रहा है कि रेजिमेंट का उपकरण होने के चलते उन्हें ये गौरव हासिल हुआ है, जैंडर के कारण नहीं।

एंटी एयरक्राफ्ट गन को भारत इलेक्ट्रोनिक्स ने अपग्रेड किया है। इसके ड्यूल इंजिन को आधुनिक बनाया गया है। आधुनिक कंप्यूटर डिफेंस प्रणाली से लैस है। जमीन पर दो किमी. तक दुश्मन के ठिकानों को टारगेट कर सकती है। हवा में इसकी मार 2.5 किमी. तक है।
 

एंटी एयरक्राफ्ट गन को भारत इलेक्ट्रोनिक्स ने अपग्रेड किया है। इसके ड्यूल इंजिन को आधुनिक बनाया गया है। आधुनिक कंप्यूटर डिफेंस प्रणाली से लैस है। जमीन पर दो किमी. तक दुश्मन के ठिकानों को टारगेट कर सकती है। हवा में इसकी मार 2.5 किमी. तक है।
 

प्रीति अपने पिता से प्रेरित हैं, क्योंकि उन्होंने हमेशा उन्हें वर्दी में देखा है। पिते के अनुशासन, वर्दी में उनकी चाल-ढाल ने उनके दिमाग पर छाप छोड़ी और उन्होंने भी सेना में जाने निर्णय लिया। उसी हिसाब से तैयारी भी की। प्रीति की मां सुनीता टीचर हैं और बड़ी बहन सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। वहीं, छोटा भाई बीटेक करने के बाद किसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी कर रहा है।

प्रीति अपने पिता से प्रेरित हैं, क्योंकि उन्होंने हमेशा उन्हें वर्दी में देखा है। पिते के अनुशासन, वर्दी में उनकी चाल-ढाल ने उनके दिमाग पर छाप छोड़ी और उन्होंने भी सेना में जाने निर्णय लिया। उसी हिसाब से तैयारी भी की। प्रीति की मां सुनीता टीचर हैं और बड़ी बहन सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। वहीं, छोटा भाई बीटेक करने के बाद किसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी कर रहा है।

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