खुशखबरी: इस दिन तक आ सकता है कोरोना का टीका, इन लोगों को दिया जाएगा सबसे पहले
नई दिल्ली. कोरोना वायरस ने दुनियाभर में तबाही मचा रखी है। करोड़ों लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 6 लाख से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसकी वैक्सीन बनाने को लेकर दुनियाभर में कुल 23 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें से कुछ के ट्रायल आखिरी स्टेज में हैं। हालांकि, इस बीच वैक्सीन को लेकर रूस से अच्छी खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि यह देश जल्द ही वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी दे सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि वैज्ञानिक 10 अगस्त या उससे पहले ही वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी के लिए तेजी से काम कर रहा है। इस वैक्सीन को मॉस्को के गमलेया इंस्टीट्यूट ने विकसित किया है।

रिपोर्ट्स की मानें तो रूसी अधिकारियों ने बताया कि वैक्सीन को सार्वजनिक उपयोग के लिए मंजूरी दी जाएगी, लेकिन सबसे पहले यह फ्रंटलाइन हेल्थकेयर वर्कर्स यानी सीधे तौर पर कोरोना संक्रमित लोगों की सेवा करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को दी जाएगी।
हालांकि, रूस ने आधिकारिक तौर पर वैक्सीन के ट्रायल से संबंधित कोई जानकारी शेयर नहीं की है। ऐसे में ये कहना मुश्किल होगा कि यह वैक्सीन लोगों पर कितनी असरदार होगी। कुछ लोगों का मानना है कि जल्दी से वैक्सीन को बाजार में उपलब्ध कराने को लेकर राजनीतिक दबाव है, ताकि रूस की वैज्ञानिक शक्ति को दुनिया के सामने रखा जा सके।
रूस की वैक्सीन का अभी दूसरा चरण पूरा करना बाकी है। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि 3 अगस्त तक यह पूरा हो जाएगा। इसके बाद तीसरे चरण का ट्रायल शुरू किया जाएगा। रिपोर्ट्स में वैज्ञानिकों के हवाले से कहा जा रहा है कि वैक्सीन इसलिए जल्दी तैयार हो गई, क्योंकि यह अन्य बीमारियों से लड़ने के लिए पहले से ही निर्मित एक वैक्सीन का संशोधित संस्करण है।
रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस वैक्सीन के मानव परीक्षण में रूसी सैनिकों ने स्वयंसेवक के रूप में काम किया है। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि वैक्सीन बनाने की इस परियोजना के निदेशक अलेक्जेंडर गिन्सबर्ग ने खुद भी वैक्सीन की खुराक ली है।
वहीं, अगर अमेरिका में वैक्सीन की स्थिति के बारे में बात की जाए तो इसका ट्रायल अंतिम चरण में है। इसे मॉडर्ना कंपनी ने विकसित किया है। अभी दो दिन पहले ही 30 हजार लोगों पर इसका परीक्षण शुरू किया गया है। मॉडर्ना वैक्सीन के पहले चरण के नतीजे सकारात्मक रहे थे और दूसरे चरण के आंकड़े अगस्त के आखिर तक या सितंबर में जारी किए जाने की उम्मीद है।
ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन ChAdOx1 भी टीके की रेस में सबसे आगे है। इस वैक्सीन के ट्रायल का काम दुनिया के अलग-अलग देशों में चल रहा है। यह वैक्सीन ट्रायल के अंतिम चरण में है। भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने भी ऑक्सफोर्ड की इस वैक्सीन के भारत में इंसानों पर परीक्षण के लिए सरकार से मंजूरी मांगी है। दावा किया जा रहा है कि अगर सब कुछ सही रहा तो साल के अंत तक यह बाजार में उपलब्ध हो जाएगी।
भारत में इस समय दो वैक्सीन प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिसमें आईसीएमआर और भारत बायोटेक द्वारा तैयार वैक्सीन 'कोवैक्सीन' (Covaxin) भी शामिल है। इसका दिल्ली एम्स, पटना एम्स, रोहतक पीजीआई समेत अन्य संस्थानों में मानव परीक्षण शुरू हो चुका है। वहीं, जायडस कैडिला ने भी भारतीय औषधि महानियंत्रक से अनुमति मिलने के बाद मानव परीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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