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इस मुस्लिम महिला IAS ने लिया पुलवामा हमले में शहीद की बेटियों को गोद, लोगों ने की तारीफ

First Published Feb 13, 2020, 7:56 PM IST
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नई दिल्ली. 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी है। सीआरपीएफ काफिले पर हुए इस हमले में 40 जवानों ने अपनी जान गंवा दी थी। इस हमले से पूरा देश दुखी था। हर किसी की आंख में आंसू था। बॉलीवुड स्टार्स से लेकर सरकारी कर्मचारी तक शहीदों के परिवार की मदद के लिए आगे आए थे। इसमें से एक मुस्लिम महिला  IAS भी थीं, जो पुलवामा हमले के वक्त शहीद की बेटियों को गोद लेकर चर्चा में आईं थीं। 

हम बात कर रहे हैं, बिहार के शेखपुरा में तैनात IAS अफसर और डीएम इनायत खान की। इनायत पुलवामा हमले के बाद शहीद की बेटियों को गोद लेकर चर्चा में आई थीं।

हम बात कर रहे हैं, बिहार के शेखपुरा में तैनात IAS अफसर और डीएम इनायत खान की। इनायत पुलवामा हमले के बाद शहीद की बेटियों को गोद लेकर चर्चा में आई थीं।

इनायत खान ने पुलवामा में शहीद हुए 2 जवानों की बेटियों को गोद लिया है। इनायत उनका सारा खर्च भी उठा रही हैं। इसे लेकर इनायत खान की सोशल मीडिया पर काफी तारीफ भी हुई थी।

इनायत खान ने पुलवामा में शहीद हुए 2 जवानों की बेटियों को गोद लिया है। इनायत उनका सारा खर्च भी उठा रही हैं। इसे लेकर इनायत खान की सोशल मीडिया पर काफी तारीफ भी हुई थी।

इनायत ने पुलवामा हमले में शहीद हुए रतन ठाकुर और संजय कुमार की बेटियों को गोद लेना का ऐलान किया था, इसके अलावा उन्होंने अपना दो दिन का वेतन शहीदों को देने के कहा था।

इनायत ने पुलवामा हमले में शहीद हुए रतन ठाकुर और संजय कुमार की बेटियों को गोद लेना का ऐलान किया था, इसके अलावा उन्होंने अपना दो दिन का वेतन शहीदों को देने के कहा था।

उन्होंने अपने जिले में तैनात सभी अफसरों से भी पुलवामा में शहीद जवानों के परिवारों को एक दिन का वेतन दान देने के लिए कहा था।

उन्होंने अपने जिले में तैनात सभी अफसरों से भी पुलवामा में शहीद जवानों के परिवारों को एक दिन का वेतन दान देने के लिए कहा था।

इनायत खान 2012 बैच की बिहार कैडर की आईएएस अफसर हैं। अभी बिहार के शेखपुर में डीएम पद पर तैनात हैं। उन्होंने 2011 में यूपीएससी एग्जाम में 176 वीं रैंक हासिल की थी।

इनायत खान 2012 बैच की बिहार कैडर की आईएएस अफसर हैं। अभी बिहार के शेखपुर में डीएम पद पर तैनात हैं। उन्होंने 2011 में यूपीएससी एग्जाम में 176 वीं रैंक हासिल की थी।

वे उत्तर प्रदेश के आगरा की रहने वाली हैं। यहीं से उन्होंने इंजीनियरिंग की है। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने एक साल तक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी भी की है, लेकिन उन्होंने एक साल बाद ही यह नौकरी छोड़ दी है।

वे उत्तर प्रदेश के आगरा की रहने वाली हैं। यहीं से उन्होंने इंजीनियरिंग की है। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने एक साल तक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी भी की है, लेकिन उन्होंने एक साल बाद ही यह नौकरी छोड़ दी है।

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