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15 अगस्त को पतंग उड़ाने से पहले देख लें इन दर्दनाक तस्वीरों को, आजादी पर मासूम देते हैं कुर्बानी
नई दिल्ली. बचपन में पतंग उड़ाने का शौक सभी को होता है। कुछ बड़े होने के बाद भी इस शौक को नहीं छोड़ पाते हैं और तब भी पतंग उड़ाते दिखते हैं। 15 अगस्त के दिन आसमान में तिरंगा लहराता दिखता है और लोग आजादी की इस खुशी को पतंग उड़ाकर सेलिब्रेट करते हैं। लेकिन, इस बार आप सभी को ऐसी तस्वीरें दिखा रहे हैं, जिसमें देखने के लिए मिलेगा कि लोगों के शौक के कारण कैसे पक्षियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

आसमान ना सिर्फ इंसानों का है कि हम वहां प्लेन भी उड़ाए, ध्वनि प्रदूषण भी करें, फिर पक्के मांझे से पतंग उड़ाकर पक्षियों की जिंदगियों को ही छीन लें। पक्षी अब इन मंझों में उलझें या उनकी जान इससे इंसानों को क्या मतलब? उन्हें तो बस अपने शौक पूरे करने हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आई पक्षी की फोटो रोंगटे खड़े कर देने वाली है कि कैसे हम उनकी जिंदगी को आजादी से जीने भी नहीं देते हैं।
पतंग के मांझे पक्षियों की मौत का कारण बनते हैं। वो इनमें उलझ जाते हैं, लेकिन लोगों को इससे क्या फर्क पड़ता है? हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आई फोटोज काफी पुरानी है।
फोटो भले ही पुरानी हो लेकिन, घाव नया है ना। क्योंकि, हर साल की तरह इस बार 15 अगस्त आएगा और लोग पतंग उड़ाएंगे। हम चाहते हैं पक्का मांझा… ताकि किसी दूसरे की पतंग काटी जा सके लेकिन वो मांझा कई बार इन मासूम परिंदों के पंख काट देता है।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बीते साल दिल्ली फायर सर्विस ने 700 पक्षियों को बचाया। ये पक्षी मांझे में ही फंस गए थे। ये सिर्फ और सिर्फ अगस्त महीने की बात है। इस बार तो कोरोना ने भी लोगों को घर बैठा रखा है। ऐसे में उम्मीद तो यही है कि लोग ज्यादा पतंग उड़ाने वाले हैं। ज्यादा पतंग, मतलब ज्यादा परिंदों को दिक्कतें।
हम सभी को थोड़ा सोचने की जरूरत है कि पक्षी हमारे इको सिस्टम में कितने जरूरी है। ये जीवन है। एक पक्का मांझा उस जीवन चक्र को तोड़ने का काम कर रहा है। पक्के मांझे की जगह कच्चा मांझा यूस करें। पतंग को पेड़ों के पास ना उड़ाए क्योंकि वहां पक्षी बैठे होते हैं। वो उड़ते हैं और मांझे में फंस जाते हैं।
अगर आपके मांझे के साथ कोई पक्षी फंस जाए तो तुरंत उसे बचाने की कोशिश करें। अगर ना हो सके तो फायर विभाग को कॉल कर इसकी जानकारी दें। सच्ची 15 अगस्त तो वो ही होगी, जब आपकी पतंग और मांझे से किसी पक्षी को नुकसान ना पहुंचे क्योंकि देश और आसमान तो परिंदों का भी है ना?
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