दरिंदों को मिली किए की सजा, दोषियों को मौत तक पहुंचाने में अहम रहे ये 2 किरदार
नई दिल्ली. निर्भया केस में चारों दोषियों विनय, मुकेश, पवन और अक्षय को शुक्रवार सुबह 5 बजे फांसी दे दी गई। 7 साल के बाद आखिरकार न्याय की जीत हुई। दोषियों को फांसी देने के बाद निर्भया की मां ने कहा, आज हमको इंसाफ मिला। यह दिन देश की बच्चियों को समर्पित है। मैं न्याय तंत्र और सरकार का धन्यवाद करती हूं। दोषियों को फांसी तक पहुंचाने और निर्भया को न्याय दिलाने में दो लोगों ने अहम भूमिका निभाई। ये दो नाम हैं सीमा समृद्धि और अवनींद्र। आईए जानतें हैं कि ये कौन हैं और इन्होंने कैसे निर्भया को न्याय दिलाया।
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अवनींद्र पांडेय : निर्भया मामले में अवनींद्र पांडेय इकलौते गवाह थे। उन्हीं की गवाही ने निर्भया को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अवनींद्र घटना के वक्त निर्भया के साथ बस में मौजूद थे।
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चलती बस में जब निर्भया के साथ दरिंदगी हुई तब अवनींद्र को भी बुरी तरह पीटा गया था। इसके बाद उन्हें निर्भया के साथ बस से बाहर फेंक दिया गया। निर्भया के दोस्त की गवाही को निचली अदालत, दिल्ली हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने सही माना और फांसी की सजा सुनाई।
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अवनींद्र यूपी के गोरखपुर के रहने वाले हैं। तुर्कमानपुर स्थित घर में आज भी उनका परिवार रहता है। उनके पिता भानु प्रताप पांडेय शहर के जाने माने वकील हैं। वो कहते हैं, इस घटना को 7 साल हो गए। अब बेटा इन सब से दूर दूसरी जिंदगी जी रहा है।
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उन्होंने बताया, घटना के बाद बेटे से इतने सवाल पूछे गए कि वो अपनी लाइफ में आगे ही नहीं बढ़ पा रहा था। हालांकि, अब ऐसा नहीं है। पुणे में कॉम्पटीशन की तैयारी करने के बाद वो विदेश में प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर के पद पर तैनात है। वो बस यही चाहता है कि निर्भया के दोषियों को फांसी हो।
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सीमा समृद्धि: दरिंदों को फांसी की सजा दिलाकर निर्भया को इंसाफ दिलाने में वकील सीमा समृद्धि का अहम रोल रहा। सीमा समृद्धि शुरुआत से ही निर्भया की माता-पिता की वकील हैं। सीमा कुशवाहा पिछले एक दशक से वकालत कर रही हैं।
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सीमा ने 2014 में सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की। इसके बाद वे निर्भया ज्योति ट्रस्ट से भी जुड़ीं। सीमा ने दोषियों के हर पैतरेंबाजी का कोर्ट में खुलकर जवाब दिया। इसी का नतीजा ये हुआ कि एक दोषियों की एक के बाद एक याचिका खारिज होती चली गईं। सीमा को चौथे डेथ वारंट के बाद विश्वास था कि इस बार दोषियों को फांसी होकर रहेगी।
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16 दिसंबर, 2012 की रात में 23 साल की निर्भया से दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 6 लोगों ने दरिंदगी की थी। साथ ही निर्भया के साथ बस में मौजूद दोस्त के साथ भी मारपीट की गई थी। दोनों को चलती बस से फेंक कर दोषी फरार हो गए थे।
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इसके बाद निर्भया का दिल्ली के अस्पताल में इलाज चला था। जहां से उसे सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया था। 29 दिसंबर को निर्भया ने सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
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7 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब निर्भया को न्याय मिला है। चारों दोषियों को तिहाड़ में फांसी दे दी गई। हालांकि, इससे पहले दोषियों के वकील ने फांसी टालने के लिए काफी कोशिश की। लेकिन उनकी कोई चाल कामयाब नहीं हुई।
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