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आधी रात विमान से लाया गया निर्भया का शव, गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार.. पिता ने दी थी मुखाग्नि
नई दिल्ली. निर्भया के दोषियों को सात साल के लंबे इंतजार के बाद अब फांसी देने के तैयारी हो गई है। कोर्ट के आदेश के बाद 22 जनवरी को चारों दोषियों को फांसी पर लटकाया जाना है। हालांकि इससे पहले चारों दोषी बचने के लिए हर कोशिश कर रहे है। जिसका नतीजा है कि दो दोषियों ने क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल किया था। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है। जिसके बाद से उनके मौत का रास्ता साफ हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश को दिसंबर 2012 की याद दिला दी है। जब निर्भया के पार्थिव शरीर को विमान से दिल्ली लाया गया और पिता ने अपनी बेटी को मुखाग्नि दी थी।
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16 दिसंबर 2012 की रात वसंत बिहार में अपने दोस्तों के साथ मूवी देखकर घर लौट रही पैरामेडिकल स्टूडेंट निर्भया को चलती बस में दरिंदों ने अपना शिकार बनाया था। इस दौरान दरिंदों ने मानवता की हदे पार करते हुए गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था। जिसके बाद पीड़िता को बहुत ही बुरे हालत में उपचार के लिए अस्पताल में दाखिल कराया गया था। जहां उसका इलाज किया जा रहा था। लेकिन हालत में कोई सुधार न होने के कारण निर्भया को एयरलिफ्ट कर सिंगापुर ले जाया गया। जहां घटना के 10 दिन बाद यानी 26 दिसंबर को दम तोड़ दिया।
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इस घटना के बाद से देशभर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आक्रोश और मातम का माहौल था। इसके बीच निर्भया के पार्थिव शरीर को विशेष विमान के जरिए दिल्ली लाया गया। जिसके बाद लोगों की नजरों से दूर आनन-फानन में उसका अंतिम संस्कार किया गया। निर्भया के मौत के बाद एयर इंडिया का विशेष विमान पार्थिव शरीर को लेकर तड़के करीब साढ़े तीन बजे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा। उस वक्त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी वहीं मौजूद थे।
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जिसके बाद दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में निर्भया के निवास स्थान पर अंतिम संस्कार की अन्य रीतियों के बाद द्वारका के श्मशान में उसके पिता ने उसे मुखाग्नि दी। मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पालम तकनीकी क्षेत्र में पार्थिव शरीर को लेकर आ रहे एयर इंडिया के विशेष विमान का इंतजार कर रहे थे। विमान के साढ़े तीन बजे उतरते ही मनमोहन सिंह और सोनिया ने छात्रा के माता-पिता और भाईयों से बात की और उन्हें ढांढस बंधाया।
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निर्भया के पार्थिव शरीर को महावीर एन्क्लेव स्थित उसके आवास ले जाया गया और धार्मिक रस्में पूरी की गईं। इसके बाद पार्थिव शरीर को द्वारका सेक्टर 24 स्थित श्मशान ले जाया गया। इस दौरान तत्कालीन सीएम स्वर्गीय शीला दीक्षित ने श्मशान पहुंचकर उसे श्रद्धांजलि दी थी। इस दौरान गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह, पश्चिमी दिल्ली के सांसद महाबल मिश्र और दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष विजेंदर गुप्ता भी अंतिम संस्कार के वक्त मौजूद थे। श्मशान को आम लोगों और मीडिया के लिए बंद कर दिया गया था।
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पीड़िता के अंतिम संस्कार के लिए पुलिस ने दक्षिण दिल्ली स्थित एक श्मशान के अधिकारियों से कल देर रात संपर्क किया था। अंतिम संस्कार की योजनाओं को पूरी तरह गुप्त रखा गया। पुलिस को डर था कि बड़ी संख्या में लोग श्मशान पहुंचकर हंगामा कर सकते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए पुलिस ने सारी कवायदें की थी।
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कानून व्यवस्था की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए अधिकारी चाहते थे कि अंतिम संस्कार सूर्योदय से पहले साढ़े छह बजे तक कर दिया जाए लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी क्योंकि हिन्दू परंपराओं के अनुसार सूर्योदय से पहले अंतिम संस्कार नहीं किया जा सकता इसलिए उन्हें सूर्य निकलने का इंतजार करना पड़ा। पीड़िता के पिता ने सुबह साढ़े सात बजे उसके भाईयों और अन्य रिश्तेदारों के सामने अपनी बेटी को मुखाग्नि दी।
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निर्भया के अंतिम संस्कार के लिए छात्रा के परिजनों को पुलिस सुरक्षा में बस से श्मशान लाया गया। हालांकि उस दौरान यह जानकारी सामने आई थी कि पुलिस ने सरकार से कहा था कि लड़की को सीधा लखनऊ या वाराणसी होते हुए उत्तर प्रदेश के बलिया ले जाया जाए लेकिन सरकार ने इसके लिए मना कर दिया था।
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