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मंगोलिया के सबसे पुराने मठ में मोदी ने बोद्ध प्रतिमा का किया अनावरण, यहां 120 साल से जारी है पूजा-पाठ

First Published Sep 20, 2019, 3:32 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति खाल्टमा बटुल्गा ने बौद्ध मंत्रोच्चार के बीच शुक्रवार को रिमोट के जरिये संयुक्त रूप से मंगोलिया के गंडन मठ में भगवान बुद्ध की प्रतिमा का अनावरण किया। मंगोलिया के राष्ट्रपति पांच दिन की भारत यात्रा पर आए हैं और इस दौरान नई दिल्ली से दोनों नेताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मूर्ति का अनावरण किया। इससे पहले, मंगोलिया के राष्ट्रपति बटुल्गा का राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्वागत किया । मंगोलिया के राष्ट्रपति ने सलामी गारद का निरीक्षण भी किया।

प्रधानमंत्री के लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर आयोजित एक समारोह के दौरान भगवान बुद्ध की स्वर्ण प्रतिमा का अनावरण किया गया।

प्रधानमंत्री के लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर आयोजित एक समारोह के दौरान भगवान बुद्ध की स्वर्ण प्रतिमा का अनावरण किया गया।

प्रतिमा के अनावरण से पहले मठ में युवा भिक्षुओं ने बौद्ध मंत्रों का पाठ किया। गंडन मठ मंगोलिया की राजधानी उलनबटोर में स्थित है।

प्रतिमा के अनावरण से पहले मठ में युवा भिक्षुओं ने बौद्ध मंत्रों का पाठ किया। गंडन मठ मंगोलिया की राजधानी उलनबटोर में स्थित है।

इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में उपस्थित भिक्षुओं ने प्रार्थना की, जिसमें पमोदी और राष्ट्रपति बटुलगा भी शामिल हुए।

इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में उपस्थित भिक्षुओं ने प्रार्थना की, जिसमें पमोदी और राष्ट्रपति बटुलगा भी शामिल हुए।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने मूर्ति अनावरण समारोह को “भारत-मंगोलिया की आध्यात्मिक साझेदारी और साझा बौद्ध विरासत का प्रतीक” बताया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने मूर्ति अनावरण समारोह को “भारत-मंगोलिया की आध्यात्मिक साझेदारी और साझा बौद्ध विरासत का प्रतीक” बताया है।

मोदी ने मई 2015 में गंडन मठ की यात्रा की थी, जहां उन्होंने एक बोधि पौधा भी भेंट किया था। गंडन मंगोलिया का सबसे पुराना और सबसे महत्वपूर्ण मठ है। इसका निर्माण 19वीं सदी में हुआ और यह एकमात्र मठ है, जहां बौद्ध गतिविधियां बिना रुके कम्युनिस्ट शासन में भी जारी रहीं।

मोदी ने मई 2015 में गंडन मठ की यात्रा की थी, जहां उन्होंने एक बोधि पौधा भी भेंट किया था। गंडन मंगोलिया का सबसे पुराना और सबसे महत्वपूर्ण मठ है। इसका निर्माण 19वीं सदी में हुआ और यह एकमात्र मठ है, जहां बौद्ध गतिविधियां बिना रुके कम्युनिस्ट शासन में भी जारी रहीं।

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