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2 साल की उम्र में कई गुना बड़े आदमी से हुई शादी, इस दिव्यांग महिला ने जो किया वो है एक मिसाल
नई दिल्ली. विकलांग लोगों की जिंदगी किसी नर्क से कम नहीं होती है। खासतौर पर भारत जैसे विकासशील और अधिकतर अनपढ़ जनसंख्या वाले देश में। यूं तो कहेंगे कि मां-बाप भगवान होते हैं लेकिन सिर्फ सूरज बड़जात्या की फिल्मों में। रियल लाइफ में मां-बाप भी किस हद क्रूर और असंवेदनशील हो सकते हैं इसकी सैकड़ों बानगी आपने देखी-सुनी होंगी। पर आज हम आपको मात्र 2 साल की उम्र में ब्याह दी गई एक विकलांग बेटी की कहानी सुनाने जा रहे हैं।
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इस कहानी को सुनकर आप बेटी को योद्धा कहेंगे प्रेरणा कहेंगे लेकिन उसकी जिंदगी आसान बनाने की बजाय बदतर कर देने वाले समाज पर भी थूंकेंगे। इसी समाज से लड़कर औरतें जब निकलती हैं तो देश-विदेश में मिसाल बन जाती हैं। राजस्थान की एक महिला ने आज कई साल बाद अपने दर्द की दास्तान सुनाई है। वह एक गांव में पैदा हुई थी। उसके पैदा होने पर मां-बाप को पता चल गया था कि वह पोलियोग्रस्त है। विकलांगता के कारण एक पैर कभी काम नहीं करेगा। उसे किसी छड़ी के सहारे चलना होगा। पोलियो पीड़ित बेटी को देख मां बाप ने सिर पीट लिया। गांवों में कहावत है कि "एक तो बेटी पैदा हुई और वो भी बदसूरत।" उन्हें लगा बेटी नहीं बोझ पैदा हुई है।
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इसके बाद मां-बाप ने उससे छुटकारा पाने के लिए मात्र दो साल की छोटी उम्र में उसकी शादी कर दी। सुनकर हैरान मत होइए राजस्थान में आज भी बाल-विवाह जैसी घटिया प्रथाएं चल रही हैं। इस महिला को 2 साल की उम्र में उससे कई गुना बड़े आदमी के साथ ब्याह दिया गया। जब वह बड़ी हुई तो उसे पता चला कि मां बाप विकलांग लड़की को पाल-पोसकर अपना पैसा और टाइम खराब नहीं करना चाहते थे। इसलिए उसका इस तरह किसी के घर की नौकरानी और सेक्स स्लैव के तौर पर सौदा कर दिया गया। महिला को कुछ समझ नहीं आया कि वह करे तो क्या करे?
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कुछ समय बाद एक एक्सीडेंट में महिला के पति की मौत हो गई। वह विधवा हो गई तो जिंदगी पूरी तरह नर्क बन गई। महिला को ससुराल वाले टॉर्चर करने लगे। ससुराल वाले महिला से घर के सारे काम करवाते, गाली गलौच करते और उसे खाना नहीं देते थे। वह कही बाहर आ जा नहीं सकती थी। महिला पर गर्भपात करवाने के और दूसरे आदमियों से संबंध रखने के इल्जाम लगाए गए। इतना ही नहीं महिला को ससुरावालों ने आधी रात को घर से बाहर फेंक दिया और संपत्ति में से उसका हिस्सा हड़पने के लिए खुद ही पुलिस केस दाखिल कर दिया।
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ऐसे में महिला के पास कोई चारा नहीं बचा। उसने सोचा अब मुझे अपनी आवाज उठानी ही होगी। उसने अजमेर में स्थित एक महिला हेल्प लाइन से संपर्क किया। हेल्पलाइन ने महिला की पूरी मदद की केस लड़ा और वह केस जीत गई। महिला ने जैसे ही केस जीता उसे संपत्ति में हिस्सा भी मिला। इसके बाद ये विकलांग महिला न सिर्फ राजस्थान में बल्कि दूसरे राज्यों में भी प्रेरणा और हिम्मत की एक मिसाल बन गई। आज इस घटना को करीब 20 साल हो गए हैं। वह हेल्पलाइन संस्था से जुड़ी गई और आज करीब 2 हजार से ज्यादा महिलाओं को घरेलू हिंसा और शोषण से निकाल चुकी हैं। वह पीड़ित महिलाएं की मदद करने को आगे रहती हैं, लड़ती हैं और न्याय दिलवाकर ही दम लेती हैं। ये पूरी कहनी महिला ने ह्यूमन्स ऑफ बाम्बे नामक पेज पर साझा की है।
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