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बर्ड फ्लू में भी खा सकते हैं चिकन और अंडा, बस उसे 70 डिग्री सेल्सियस पर पका लें, जानें और क्या-क्या उपाय हैं?

First Published Jan 9, 2021, 8:25 AM IST
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नई दिल्ली. देश के 6 राज्यों में बर्ड फ्लू का कहर है। केरल, राजस्थान , मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में मुर्गियों की मरने की खबर आ रही है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एडवाइजरी जारी कर बताया है कि बर्ड फ्लू में चिकन और अंडा खाया जा सकता है या नहीं? WHO ने बताया, H5N1 की वजह से बर्ड फ्लू फैलता है। यह एक प्रकार का इन्फ्लूएंजा वायरस है, जो पक्षियों में अत्यधिक संक्रामक, गंभीर रोग का कारण बनता है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि एवियन इन्फ्लुएंजा की पुष्टि राष्ट्रीय पशु रोग संस्थान ने की है।
 

बर्ड फ्लू के कारण पोल्ट्री में मुर्गियों की मौत हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस समय चिकन और अंडा खाना सुरक्षित होगा? डब्ल्यूएचओ ने खुद इसका जवाब दिया है।

बर्ड फ्लू के कारण पोल्ट्री में मुर्गियों की मौत हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस समय चिकन और अंडा खाना सुरक्षित होगा? डब्ल्यूएचओ ने खुद इसका जवाब दिया है।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि जब तक चिकन या अंडे को ठीक से तैयार और पकाया जाता है, तब तक यह खाने के लिए सुरक्षित है।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि जब तक चिकन या अंडे को ठीक से तैयार और पकाया जाता है, तब तक यह खाने के लिए सुरक्षित है।

WHO ने कहा, चिकन को अच्छे से पकाकर ही खाए। करीब 70 डिग्री सेल्सियस पर खाना पकाने पर वायरस खुब ब खुद मर जाते हैं। ऐसे में अच्छे से पका खाना बर्ड फ्लू में भी खाया जा सकता है।

WHO ने कहा, चिकन को अच्छे से पकाकर ही खाए। करीब 70 डिग्री सेल्सियस पर खाना पकाने पर वायरस खुब ब खुद मर जाते हैं। ऐसे में अच्छे से पका खाना बर्ड फ्लू में भी खाया जा सकता है।

WHO का कहना है कि कसाईघरों में काम करने वाले और बीमार मुर्गियों के संपर्क में आने वाले इंसान में ही यह वायरस मिलता है। इनसे खुद को बचाने की कोशिश करें। बर्ड फ्लू का वायरस H5N1 गंभीर संक्रमण फैलाने के लिए जाना जाता है। यह पक्षियों में सांस से जुड़ी बीमारी की वजह बनता है। इसे एवियन इनफ्लुएंजा कहते हैं।

WHO का कहना है कि कसाईघरों में काम करने वाले और बीमार मुर्गियों के संपर्क में आने वाले इंसान में ही यह वायरस मिलता है। इनसे खुद को बचाने की कोशिश करें। बर्ड फ्लू का वायरस H5N1 गंभीर संक्रमण फैलाने के लिए जाना जाता है। यह पक्षियों में सांस से जुड़ी बीमारी की वजह बनता है। इसे एवियन इनफ्लुएंजा कहते हैं।

बर्ड फ्लू से संक्रमित होने वालों में 60% लोगों की मौत हो जाती है। लेकिन अच्छी बात ये है कि ये पक्षियों से इंसानों में जल्दी नहीं फैलता है। इससे भी अच्छी बात ये है कि ये इंसानों से इंसानों में नहीं फैलता है।

बर्ड फ्लू से संक्रमित होने वालों में 60% लोगों की मौत हो जाती है। लेकिन अच्छी बात ये है कि ये पक्षियों से इंसानों में जल्दी नहीं फैलता है। इससे भी अच्छी बात ये है कि ये इंसानों से इंसानों में नहीं फैलता है।

भारत में तो बर्ड फ्लू से किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन साल 1997 में चीन के हांगकांग में 18 लोग बर्ड फ्लू से संक्रमित हुए थे, जिसमें 6 लोगों की बीमारी से मौत हो गई थी।

भारत में तो बर्ड फ्लू से किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन साल 1997 में चीन के हांगकांग में 18 लोग बर्ड फ्लू से संक्रमित हुए थे, जिसमें 6 लोगों की बीमारी से मौत हो गई थी।

भारत में बर्ड फ्लू की पहली रिपोर्ट 19 फरवरी 2006 को महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के नवापुर गांव से आई। ग्रामीणों ने गांव में कई पक्षियों की मौत की सूचना दी। महाराष्ट्र राज्य पशुपालन मंत्रालय के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की। लैब में जांच करने पर पता चला कि मुर्गी H5N1 वायरस से संक्रमित थी।

भारत में बर्ड फ्लू की पहली रिपोर्ट 19 फरवरी 2006 को महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के नवापुर गांव से आई। ग्रामीणों ने गांव में कई पक्षियों की मौत की सूचना दी। महाराष्ट्र राज्य पशुपालन मंत्रालय के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की। लैब में जांच करने पर पता चला कि मुर्गी H5N1 वायरस से संक्रमित थी।

बर्ड फ्लू के वायरस पक्षियों में सीधे आंत को संक्रमित करते हैं, लेकिन इंसानों में ऐसा नहीं है। इंसानों में ये वायरस सांस नली पर हमला करते हैं, जिससे सांस लेने से जुड़ी बीमारियां जैसे निमोनिया या एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) हो सकती हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश और कभी-कभी पेट दर्द और दस्त शामिल हैं।

बर्ड फ्लू के वायरस पक्षियों में सीधे आंत को संक्रमित करते हैं, लेकिन इंसानों में ऐसा नहीं है। इंसानों में ये वायरस सांस नली पर हमला करते हैं, जिससे सांस लेने से जुड़ी बीमारियां जैसे निमोनिया या एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) हो सकती हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश और कभी-कभी पेट दर्द और दस्त शामिल हैं।

पहली बार 1996 में चीन में गीज में इस वायरस (H5N1) का पता चला। जहां तक मनुष्यों में इस वायरस के होने का सवाल है तो अगले ही साल यानी 1997 में हांगकांग में एक मुर्गी के जरिए इंसान में इस वायरस के होने का पता चला। वायरस का नाम H5N1 स्ट्रेन था, जिससे 18 संक्रमित इंसानों में से 6 की बीमारी से मृत्यु हो गई।

पहली बार 1996 में चीन में गीज में इस वायरस (H5N1) का पता चला। जहां तक मनुष्यों में इस वायरस के होने का सवाल है तो अगले ही साल यानी 1997 में हांगकांग में एक मुर्गी के जरिए इंसान में इस वायरस के होने का पता चला। वायरस का नाम H5N1 स्ट्रेन था, जिससे 18 संक्रमित इंसानों में से 6 की बीमारी से मृत्यु हो गई।

आमतौर पर संक्रमित जीवित या मृत पक्षियों के संपर्क में आने वाले लोग H5N1 बर्ड फ्लू से संक्रमित हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। अभी तक इसके कोई सबूत नहीं मिले हैं। डब्लूएचओ का कहना है कि अच्छी तरह से तैयार और पके हुए भोजन के माध्यम से इसे फैलने से रोक सकते हैं। वायरस गर्मी के टिक नहीं पाते हैं और खाना पकाने के तापमान में मर जाता है। 
 

आमतौर पर संक्रमित जीवित या मृत पक्षियों के संपर्क में आने वाले लोग H5N1 बर्ड फ्लू से संक्रमित हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। अभी तक इसके कोई सबूत नहीं मिले हैं। डब्लूएचओ का कहना है कि अच्छी तरह से तैयार और पके हुए भोजन के माध्यम से इसे फैलने से रोक सकते हैं। वायरस गर्मी के टिक नहीं पाते हैं और खाना पकाने के तापमान में मर जाता है। 
 

कोई भी वायरल लगातार अपना दूसरा स्टेन तैयार करते हैं। उनमें से कुछ स्टेन पहले से कमजोर या घातक हो सकते हैं। ऐसे में अगर बर्ड फ्लू का वायरस कोई ऐसा स्टेन तैयार कर लेता है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित हो जाता है तो मानव कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है और एक महामारी का कारण बन सकता है। H5N1 से प्रभावित इंसानों में से 60% की मृत्यु हो जाती है।
 

कोई भी वायरल लगातार अपना दूसरा स्टेन तैयार करते हैं। उनमें से कुछ स्टेन पहले से कमजोर या घातक हो सकते हैं। ऐसे में अगर बर्ड फ्लू का वायरस कोई ऐसा स्टेन तैयार कर लेता है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित हो जाता है तो मानव कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है और एक महामारी का कारण बन सकता है। H5N1 से प्रभावित इंसानों में से 60% की मृत्यु हो जाती है।
 

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