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विश्व कैंसर दिवस: मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी हिम्मत देखकर 'मौत' ने भी पीछे खींच लिए कदम

First Published Feb 3, 2021, 11:58 PM IST
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यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल(UICC) हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day) मनाता है। इसका मकसद लोगों में कैंसर जैसी घातक बीमारी को लेकर जागरुकता लाना है। आमतौर पर कैंसर कई तरह के होते हैं। लेकिन 4 प्रकार के कैंसर आम हैं। ये हैं- फेफड़े (Lung), स्तन (Breast), ग्रीवा(Cervix या गर्भाशय) और कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer)। अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की बात करें, तो आने वाले समय में भारत में हर 10 में से एक व्यक्ति का कैंसर हो सकता है। हर 15 में से 1 मरीज की मौत हो जाएगी। लेकिन कहते हैं कि इंसान का हौसला हर मुसीबत से लड़कर जीत हासिल कर लेता है। हम ऐसे ही लोगों से मिलवा रहे, जो कैंसर से जीते या लड़ाई लड़ रहे हैं।
 

दुनिया में कैंसर तेजी से फैल रहा है। अगर अकेले भारत की बात करें, तो पिछले साल 11 लाख लोगों को कैंसर का पता चला था। इसमें से 7 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। 22 लाख से ज्यादा लोग पिछले 6 साल से कैंसर से जूझ रहे हैं। खैर, इस सबके बीच ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने कैंसर से लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की।

दुनिया में कैंसर तेजी से फैल रहा है। अगर अकेले भारत की बात करें, तो पिछले साल 11 लाख लोगों को कैंसर का पता चला था। इसमें से 7 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। 22 लाख से ज्यादा लोग पिछले 6 साल से कैंसर से जूझ रहे हैं। खैर, इस सबके बीच ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने कैंसर से लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की।

आपने हाल में ग्वालियर की रहने वालीं प्रो. किरण बाजपेयी को कौन बनेगा करोड़पति में हॉट सीट पर देखा होगा। जीवाजी विवि में गेस्ट फैकल्टी किरण ने 50 लाख रुपए जीते थे। ये सवाईकल कैंसर से जूझ रही हैं। पेड वीमन फांउंडेशन की फांउडर किरण बताती हैं कि 2019 में उन्हें कैंसर का पता चला था। लेकिन उन्होंने सकारात्मक होकर कैंसर से लड़ाई लड़ी। अब वे 10 साल से सोशल वर्क कर रही हैं।

आपने हाल में ग्वालियर की रहने वालीं प्रो. किरण बाजपेयी को कौन बनेगा करोड़पति में हॉट सीट पर देखा होगा। जीवाजी विवि में गेस्ट फैकल्टी किरण ने 50 लाख रुपए जीते थे। ये सवाईकल कैंसर से जूझ रही हैं। पेड वीमन फांउंडेशन की फांउडर किरण बताती हैं कि 2019 में उन्हें कैंसर का पता चला था। लेकिन उन्होंने सकारात्मक होकर कैंसर से लड़ाई लड़ी। अब वे 10 साल से सोशल वर्क कर रही हैं।

ये हैं गुरुग्राम की रहने वालीं बलविंदर कौर। इन्हें 2013 में कमर में दर्द हुआ। तब ये जुबिलेंट लाइफ साइंसेज में ट्रेनिंग हेड थीं। पति गुरुग्राम में जॉब कर रहे थे। बड़ी बेटी चंडीगढ़ में पढ़ाई। मालूम चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है। इनकी 7 महीने कीमोथैरेपी चली। इनकी हिम्मत देखिए तीन महीने बाद ही इन्होंने जॉब ज्वाइन कर ली। फिर अपना ट्रांसफर रूड़की ले लिया। आज ये कैंसर रोगियों को प्रेरित कर रही हैं।

ये हैं गुरुग्राम की रहने वालीं बलविंदर कौर। इन्हें 2013 में कमर में दर्द हुआ। तब ये जुबिलेंट लाइफ साइंसेज में ट्रेनिंग हेड थीं। पति गुरुग्राम में जॉब कर रहे थे। बड़ी बेटी चंडीगढ़ में पढ़ाई। मालूम चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है। इनकी 7 महीने कीमोथैरेपी चली। इनकी हिम्मत देखिए तीन महीने बाद ही इन्होंने जॉब ज्वाइन कर ली। फिर अपना ट्रांसफर रूड़की ले लिया। आज ये कैंसर रोगियों को प्रेरित कर रही हैं।

ये हैं कोलकाता की रहने वालीं आकांक्षा। ये इकोनॉमिक्स से मास्टर्स डिग्री कर रही हैं। ये कैंसर पीड़ित तो नहीं, लेकिन इनहोंने अपने नाना को कैंसर से मरते देखा है। इसके बाद इन्होंने सोशल मीडिया पर कई ग्रुप बनाए। इस पर ये कैंसर से जंग जीतने वालों की स्टोरीज शेयर करती हैं। 

ये हैं कोलकाता की रहने वालीं आकांक्षा। ये इकोनॉमिक्स से मास्टर्स डिग्री कर रही हैं। ये कैंसर पीड़ित तो नहीं, लेकिन इनहोंने अपने नाना को कैंसर से मरते देखा है। इसके बाद इन्होंने सोशल मीडिया पर कई ग्रुप बनाए। इस पर ये कैंसर से जंग जीतने वालों की स्टोरीज शेयर करती हैं। 

यह हैं 42 वर्षीय अनिल कुमार। इन्हें 2013 में कैंसर का पता चला था। नई दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित एमटीएनएल क प्रबंधक अनिल कहते हैं कि उन्होंने मौत को काफी करीब से देखा है। शुरुआत में यूं लगा जैसे सब खत्म हो गया हो। लेकिन फिर हिम्मत जुटाई। 2016 में अपने वजन को कम करना शुरू किया। आज ये कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने एक ग्रुप चलाते हैं। इससे 1200 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। ये अब इतने फिट हैं कि 5 घंटे में 42 किमी की दौड़ लगा चुके हैं।

यह हैं 42 वर्षीय अनिल कुमार। इन्हें 2013 में कैंसर का पता चला था। नई दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित एमटीएनएल क प्रबंधक अनिल कहते हैं कि उन्होंने मौत को काफी करीब से देखा है। शुरुआत में यूं लगा जैसे सब खत्म हो गया हो। लेकिन फिर हिम्मत जुटाई। 2016 में अपने वजन को कम करना शुरू किया। आज ये कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने एक ग्रुप चलाते हैं। इससे 1200 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। ये अब इतने फिट हैं कि 5 घंटे में 42 किमी की दौड़ लगा चुके हैं।

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