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खुलासा: मात्र 30 हजार में बन जाता है iPhone 12 Pro, भारत पहुंचते-पहुंचते कीमत हो जाती है 1 लाख 20 हजार

First Published Nov 29, 2020, 1:12 PM IST
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टेक डेस्क: दुनिया में आईफोन के दीवाने कई लोग हैं। बात अगर दुनिया के बेस्ट फोन की करें तो ज्यादातर लोग आईफोन का ही नाम लेंगे। हालांकि ये भी सच है कि सबसे महंगे फोन भी इसी के आते हैं। भारत में तो आईफोन स्टेटस के लिए भी लोग खरीदते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस आईफोन को खरीदने के लिए भारत में लोग किडनी बेचने की बात कहते हैं, उसे बनाने में मात्र 30 हजार की लागत आती है। जी हां, जिस आईफोन को खरीदने के लिए भारत में लोग लोन ले लेते हैं, उसकी लागत सिर्फ तीस हजार रूपये हैं। फिर ऐसा क्यों होता है कि भारत पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत लाखों में पहुंच जाती है। 

जापानी फर्म फ़ोमलहट टेक्नो सॉल्यूशंस की एक नई रिपोर्ट में आईफोन बनाने की वास्तविक लागत का पता चला है। रिपोर्ट ने iPhone 12 प्रो के मटेरियल बिल को कैलकुलेट किया, तो पता चला कि इसे बनाने में केवल $ 406, यानी लगभग 30,000 रु का खर्च आता है। लेकिन इसे  भारत में 1,19,900 रुपये में बेचा जाता है।

जापानी फर्म फ़ोमलहट टेक्नो सॉल्यूशंस की एक नई रिपोर्ट में आईफोन बनाने की वास्तविक लागत का पता चला है। रिपोर्ट ने iPhone 12 प्रो के मटेरियल बिल को कैलकुलेट किया, तो पता चला कि इसे बनाने में केवल $ 406, यानी लगभग 30,000 रु का खर्च आता है। लेकिन इसे  भारत में 1,19,900 रुपये में बेचा जाता है।

इस कंपनी रिपोर्ट में पता चला है कि आईफोन में उपयोग किए जाने वाली सबसे महंगी चीज  क्वालकॉम X50 5G मॉडेम हैं, जिनका उपयोग 5G कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए किया जाता है। आईफोन में इस्तेमाल होने वाली ये चीज लगभग $ 90 की है, जबकि सैमसंग का मॉडेम सिर्फ थोड़ा सा सस्ता है, जिसकी लागत $ 70 है।

इस कंपनी रिपोर्ट में पता चला है कि आईफोन में उपयोग किए जाने वाली सबसे महंगी चीज  क्वालकॉम X50 5G मॉडेम हैं, जिनका उपयोग 5G कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए किया जाता है। आईफोन में इस्तेमाल होने वाली ये चीज लगभग $ 90 की है, जबकि सैमसंग का मॉडेम सिर्फ थोड़ा सा सस्ता है, जिसकी लागत $ 70 है।

आईफ़ोन के अन्य पार्ट्स में Apple के A14 बायोनिक चिपसेट के लिए $ 40, RAM मॉड्यूल के लिए $ 12.8, फ़्लैश मेमोरी के लिए $ 19.2 और Sony कैमरा के लिए $ 7.4 और $ 7.9 खर्च होते हैं। ये सारे खर्च पर यूनिट है। 

आईफ़ोन के अन्य पार्ट्स में Apple के A14 बायोनिक चिपसेट के लिए $ 40, RAM मॉड्यूल के लिए $ 12.8, फ़्लैश मेमोरी के लिए $ 19.2 और Sony कैमरा के लिए $ 7.4 और $ 7.9 खर्च होते हैं। ये सारे खर्च पर यूनिट है। 

ऊपर बताई गई चीजें आईफोन में इस्तेमाल होने वाली सबसे महंगी चीजें हैं। इसमें इस्तेमाल होने वाली बाकी चीजों की लागत ऊपर की तुलना में बहुत कम है। इसके साथ, iPhone 12 के लिए BoM $ 373 यानी करीब 27,500 रुपये के आसपास आता है। ये IPhone मॉडल भारत में 79,900 रुपये में बिकता है।

ऊपर बताई गई चीजें आईफोन में इस्तेमाल होने वाली सबसे महंगी चीजें हैं। इसमें इस्तेमाल होने वाली बाकी चीजों की लागत ऊपर की तुलना में बहुत कम है। इसके साथ, iPhone 12 के लिए BoM $ 373 यानी करीब 27,500 रुपये के आसपास आता है। ये IPhone मॉडल भारत में 79,900 रुपये में बिकता है।

इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि आईफोन को बनाने के लिए कंपनी किस देश से क्या मंगवाती है?  रिपोर्ट के अनुसार, iPhone 12 सीरीज के अधिकांश पार्ट्स को दक्षिण कोरिया (26.8 प्रतिशत) से मंगवाया जाता है। 

इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि आईफोन को बनाने के लिए कंपनी किस देश से क्या मंगवाती है?  रिपोर्ट के अनुसार, iPhone 12 सीरीज के अधिकांश पार्ट्स को दक्षिण कोरिया (26.8 प्रतिशत) से मंगवाया जाता है। 

इसके बाद अमेरिका से 21.9 प्रतिशत और जापान का 13.6 प्रतिशत हिस्सा है। दिलचस्प बात यह है कि Apple ने चीन से इस फ़ोन का केवल 4.6 प्रतिशत पार्ट मंगवाया जाता है। जबकि आज तक चीन को ही Apple iPhones का सबसे बड़ा निर्माता 

इसके बाद अमेरिका से 21.9 प्रतिशत और जापान का 13.6 प्रतिशत हिस्सा है। दिलचस्प बात यह है कि Apple ने चीन से इस फ़ोन का केवल 4.6 प्रतिशत पार्ट मंगवाया जाता है। जबकि आज तक चीन को ही Apple iPhones का सबसे बड़ा निर्माता 

एप्पल कंपनी ने अपनी बैटरी को जापान की TDK की हांगकांग स्थित सहायक कंपनी एम्पीरेक्स टेक्नोलॉजी से खरीदती है। इन सभी देशों से पार्ट्स को इक्कठा करने के बाद सिर्फ इन्हें असेम्बल किया जाता है। एक बार जब फ़ोन बनकर तैयार हो जाता है तो फिर इसे इतने महंगे दाम में बेचा जाता है। 
 

एप्पल कंपनी ने अपनी बैटरी को जापान की TDK की हांगकांग स्थित सहायक कंपनी एम्पीरेक्स टेक्नोलॉजी से खरीदती है। इन सभी देशों से पार्ट्स को इक्कठा करने के बाद सिर्फ इन्हें असेम्बल किया जाता है। एक बार जब फ़ोन बनकर तैयार हो जाता है तो फिर इसे इतने महंगे दाम में बेचा जाता है। 
 

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