शॉकिंग: क्या एलियंस धरती पर ला देंगे तबाही? वैज्ञानिकों ने जताई चेतावनी, जानें
ट्रेंडिंग डेस्क. अंतरिक्ष एजेंसी ने कई बार एलियंस को लेकर खुलासे किए हैं। सभी ने अलग-अलग अंदेशा जताया है कि अंतरिक्ष में एलियंस रहते हैं। ऐसे अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) को अगले साल तक स्पेस में लॉन्च करने का प्लान बना रहा है, जो सुदूर अंतरिक्ष में जीवन की संभावनाओं को तलाशेगा। वहीं, नेक्स्ट वेब की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि इसे लेकर अमेरिका के ही एक शीर्ष अंतरिक्ष वैज्ञानिक ने चेतावनी दी है।

उन्होंने कहा कि 'अंतरिक्ष में एलियंस से संपर्क नहीं करना चाहिए।' उन्होंने इसे एक भयानक विचार बताते हुए कहा कि 'इनसे संपर्क का मतलब इन्हें धरती पर शासन के लिए निमंत्रण देना है।'
वर्तमान में अंतरिक्ष में एक्टिव हबल टेलिस्कोप मौजूद है। बताया जा रहा है कि हबल टेलिस्कॉप की ताकत इस नई जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के आगे कुछ नहीं होगी। ये अंतरिक्ष में इंसानों की पहुंच को कई गुना ज्यादा बढ़ाएगा। इस टेलीस्कोप की सहायता से वैज्ञानिक लाखों किलोमीटर दूर तर देख सकेंगे।
हालांकि, इस टेलिस्कोप को लेकर कई वैज्ञानिकों ने डर भी जताया है। उनका मानना है कि इससे धरती पर तबाही आ सकती है। नासा के शक्तिशाली टेलीस्कोप से कुछ वैज्ञानिकों को डर है कि ये अंतरिक्ष के जीवों (एलियंस) को परेशान कर सकता है। वो अभी तक मानव के अस्तित्व से अनजान हैं और शायद ये धरती के अनुकूल नहीं होगा।
स्ट्रिंग थियरिस्ट मिचियो काकू ने ऑब्जर्वर के साथ बातचीत की और कहा कि नया टेलीस्कोप लोगों को हजारों ग्रहों को देखने की ताकत तो देगा, लेकिन उन्हें उनके निवासियों तक पहुंचने के बारे में सावधानी से सोचना चाहिए। काकू ने कहा कि जल्द ही जेम्स वेब टेलीस्कोप उनकी धरती की ऑर्बिट में होगा और उनके पास देखने के लिए हजारों ग्रह होंगे।
इसलिए, उन्हें लगता है कि इसकी संभावना काफी अधिक है कि वो एक विदेशी सभ्यता के साथ संपर्क बना सकते हैं। उनके कुछ सहयोगी हैं, जो मानते हैं कि उन्हें उनके पास पहुंचना चाहिए। काकू को लगता है कि यह एक भयानक विचार है। नासा का ये नया टेलिस्कोप पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर धरती का चक्कर लगाएगा।
इस टेलिस्कोप को मई 2022 तक लॉन्च करने की योजना बनाई जा रही है। यह हबल से 100 गुना अधिक ताकतवर होगा और अंतरिक्ष में जीवन के संकेतों के लिए हजारों संभावित ग्रहों को स्कैन करेगा। इससे नासा के शोधकर्ता ब्रह्मांड की उत्पत्ति को देखने और ग्रहों की खोज करने में सक्षम होंगे।
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