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महाराष्ट्र: 15 दिन कर्फ्यू की घोषणा के बाद घर लौटने लगे प्रवासी मजदूर, पुलिस पर जबरन वसूली का आरोप
महाराष्ट्र में 15 दिन के कर्फ्यू की घोषणा के बाद मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के लोग अपने घर लौट रहे हैं। इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर परेशान करने और जबरन वसूली का आरोप लगाया है। महाराष्ट्र में बुधवार को कोरोना संक्रमण के 58 हजार ने केस सामने आए। जबकि 278 लोगों की मौत हो गई। राज्य में 11 अप्रैल को कोरोना 63 हजार केस आए थे, जो कि अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

इस साल भी पुलिस कर रही परेशान
एक टैक्सी ड्राइवर ने कहा, कर्फ्यू की घोषणा के बाद हम अपने घरों को लौट रहे हैं। यहां पर आजीविका की समस्या है। पिछले साल भी लॉकडाउन के बाद अपने घर लौट गया था। स्थिति में सुधार होने के बाद वापस लौट आया। पिछले साल की तरह इस बार भी पुलिस ने हमें परेशान किया और जबरन वसूली की।
ढाई से तीन हजार रुपए टिकट के दाम
50 से ज्यादा प्रवासी मजदूर इंदौर बाईपास के पास दो जीपों में जाते हुए देखे गए। महाराष्ट्र से लौट रहे एक कार्यकर्ता सनाउल्लाह खान ने कहा, हम पुणे से आ रहे हैं। बस ने उनसे प्रति टिकट 2,500-3000 रुपए लिए। फिर भी उन्होंने हमें महाराष्ट्र के बॉर्डर पर बस से उतार दिया। वहां से दूसरी गाड़ी में बैठने के लिए कह दिया। वहां बॉर्डर चेक प्वॉइंट पर पुलिस और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के लोग तैनात थे, लेकिन किसी ने मदद नहीं की।
कई जगहों पर पुलिस ने मदद भी की
एक सामाजिक कार्यकर्ता शैलेश कुमावत ने कहा, पुलिस प्रशासन की मदद से हमने प्रवासी लोगों की मदद के लिए टैंट लगाया है। खाना और आराम करने के लिए जगह के अलावा डॉक्टर और दवाइयां भी उपलब्ध हैं। यदि जरूरत पड़ी तो हॉस्पिटल की भी सुविधा है। महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ते COVID-19 मामलों के मद्देनजर बुधवार से राज्य में धारा 144 लगा दी है। इसके बाद से ही कई प्रवासी श्रमिक अपने घर लौट रहे हैं।
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