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25 पैसे बचाने 8 किमी पैदल चला करते थे महाभारत के युधिष्ठिर, पहले शो में काम करने मिले थे 201 रु
मुंबई. दूरदर्शन पर जब से पुराने शो वापस आए हैं। लोगों की खुशी की ठिकाना नहीं है। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच बी आर चोपड़ा की महाभारत को जनता का ढेर सारा प्यार मिल रहा है। आज भले ही 3 दशक हो गए हैं, लेकिन महाभारत में काम करने वाले एक्टर्स को खूब पसंद किया जा रहा है। इन एक्टर्स को महाभारत में काम मिलने की कहानी बहुत दिलचस्प है। ऐसे में युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले एक्टर गजेन्द्र चौहान के संघर्षों के बारे में बता रहे हैं।

गजेन्द्र एक्टर्स बनने से पहले AIIMS में कर्मचारी के रूप में काम करते थे इसके बाद उन्होंने एक्टिंग की ओर रुख किया। उनका जन्म दिल्ली के छोटे से इलाके खामपुर में हुआ था। खामपुर दिल्ली के वेस्ट पटेल नगर के पास है। उन्होंने आनंद पर्वत के रामजस स्कूल से पढ़ाई की थी। गजेन्द्र के 4 भाई और चार बहनें थे और वे अपने घर के सबसे छोटे और सबसे लाडले थे।
स्कूल में पढ़ने के बाद उन्होंने कॉलेज में जाने का फैसला किया। गजेन्द्र को दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में एडमिशन मिला था, हालांकि उन्होंने AIIMS में भी अप्लाई किया था, तो उन्हें वहां से कॉल आई।
गजेंद्र ने 2 साल पढ़ाई की और फिर जॉब भी ले ली, लेकिन उनके पिता ने आगे पढ़ाई करने का बोलकर उन्हें मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने बीएस की पढ़ाई भी पूरी कर ली। इस दौरान गजेन्द्र चौहान को नौकरी के खूब ऑफर आ रहे थे।
उन्होंने सी टी स्कैन का कोर्स किया था और उस समय ज्यादा लोगों को ये नहीं आता था, इसलिए उनके पास ऑफर्स की भरमार थी। 1979 में गजेन्द्र ने पढ़ाई के साथ-साथ AIIMS में नौकरी करनी शुरू कर दी थी।
इसके बाद गजेंद्र ने IAS सिविल सर्विसेज की तैयारी की लेकिन वे पास नहीं हो सके। इसके बाद उन्हें बॉम्बे से एक्टिंग क्लासेज का ऑफर आया। गजेन्द्र को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था। वो बचपन में गांव में होली के त्योहार में एक्टिंग किया करते थे। उन्होंने स्कूल में सांतवी क्लास में श्रवण कुमार का रोल निभाया था, जिसके लिए उन्हें अवॉर्ड भी मिला था।
गजेंद्र चौहान ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें कभी एक्टिंग में करियर बनाने का मौका मिलेगा। 1982 में वो एक्टिंग क्लासेज के लिए बॉम्बे चले गए थे। अपनी दिनचर्या को चलाने के लिए उन्होंने यहां पर पार्ट टाइम नौकरी की। वो पैसे बचाने के लिए ट्रेवल भी पैदल ही करते थे। बस या ट्रेन का कम इस्तेमाल करते थे।
बताया जाता है कि उस समय गजेन्द्र चौहान अंधेरी में रहा करते थे, लेकिन 25 पैसे बचाने के लिए वो 8 किलोमीटर दूर बांद्रा में खाना खाने पैदल जाया करते थे। उन्होंने अपनी जिंदगी में पाई-पाई जमा करके अपना गुजारा किया था। राजश्री प्रोडक्शन के सीरियल पेइंग गेस्ट में गजेंद्र को काम करने के लिए 201 रुपये मिले थे। ये बतौर एक्टर उनकी पहली कमाई थी। इसके बाद उन्हें अपनी पहली ऐड से 101 रुपये मिले थे। ये 1983 की बात है।
इसके बाद गजेंद्र ने 'रजनी', 'दर्पण', 'कशमकश' और 'सिहांसन' 'बत्तीसी' में काम किया। इन सबके बाद एक्टर को सीरियल 'महाभारत' में युधिष्ठिर का रोल निभाने का मौका मिला, जिससे वे देशभर में फेमस हो गए। गजेन्द्र चौहान हनुमान के भक्त हैं। ऐसे में वे मानते हैं कि भगवान पल पल आपकी मदद करते हैं। एक बार उन्होंने बताया था कि 1983 में वे मुंबई के एक ट्रेन स्टेशन पर जल्दी ट्रेन पकड़ने के लिए पटरी पार कर रहे थे। वो बीच में थे और अपने दोस्त को पुकार रहे थे। उन्हें नहीं पता था कि पीछे से ट्रेन आ रही है।
इसके बाद गजेन्द्र ने अपने आप को ट्रेन स्टेशन पर पाया, हालांकि उन्होंने बताया कि उन्हें आज भी नहीं याद कि वे प्लेटफार्म पर कब और कैसे पहुंचे। वो मानते हैं कि ये हनुमान जी की कृपा है।
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