इन मंदिरों में होती है महाभारत के कर्ण की पूजा, बनी है 8 फीट की मूर्ति भी, एक्टर का खुलासा

First Published 28, May 2020, 9:34 AM

मुंबई. देशभर में लॉकडाउन के चलते कई पुराने शोज को फिर से टीवी पर प्रसारित किया जा रहा है। ऐसे में रामायण का प्रसारण लोगों की मांग पर पहले किया गया, जिसके बाद डीडी नेशनल की टीआरपी ने नया रिकॉर्ड बनाया और सभी निजी चैनलों को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही बी आर चोपड़ा का शो 'महाभारत' को भी टेलिकास्ट किया गया। महाभारत सबसे पहले साल 1988 में रिलीज हुआ था, लेकिन 32 साल बाद भी इस पौराणिक सीरियल के बेहतरीन किरदार लोगों के जहन में बसे हुए हैं।
 

<p style="text-align: justify;">महाभारत का एक ऐसा ही एक किरदार है कर्ण का। इस भूमिका को पंकज धीर ने निभाया था। पंकज ने हाल ही में शो की सफलता और अपने किरदार के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि महाभारत की सफलता के पीछे कई शानदार लोगों का हाथ है। हमारे पास पंडित नरेंद्र शर्मा और राही मासूम रजा जैसे लेखक थे जिन्हें रवि चोपड़ा और बी आर चोपड़ा जैसी शख्सियतों ने सपोर्ट किया था। इसके अलावा इस शो की कास्टिंग भी काफी अच्छी थी।</p>

महाभारत का एक ऐसा ही एक किरदार है कर्ण का। इस भूमिका को पंकज धीर ने निभाया था। पंकज ने हाल ही में शो की सफलता और अपने किरदार के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि महाभारत की सफलता के पीछे कई शानदार लोगों का हाथ है। हमारे पास पंडित नरेंद्र शर्मा और राही मासूम रजा जैसे लेखक थे जिन्हें रवि चोपड़ा और बी आर चोपड़ा जैसी शख्सियतों ने सपोर्ट किया था। इसके अलावा इस शो की कास्टिंग भी काफी अच्छी थी।

<p style="text-align: justify;">पंकज धीर ने इंटरव्यू में अपने किरदार के बारे में बात करते हुए कहा कि लोग इतने सालों से उन्हें लगातार प्यार करते आए हैं। इसका क्रेडिट महाभारत शो को जाता है। अगर स्कूल की इतिहास की किताबों में जहां कर्ण का जिक्र आता है, वहां उनकी फोटो का इस्तेमाल किया गया है। </p>

पंकज धीर ने इंटरव्यू में अपने किरदार के बारे में बात करते हुए कहा कि लोग इतने सालों से उन्हें लगातार प्यार करते आए हैं। इसका क्रेडिट महाभारत शो को जाता है। अगर स्कूल की इतिहास की किताबों में जहां कर्ण का जिक्र आता है, वहां उनकी फोटो का इस्तेमाल किया गया है। 

<p style="text-align: justify;">एक्टर का मानना है कि जब तक स्कूलों में यह किताबें छपती रहेंगी, उनका जिक्र उनमें रहेगा और वो प्रासंगिक रहेंगे। कर्ण मंदिर में उनकी पूजा की जाती है। ऐसे दो मंदिर हैं, जहां उनकी रोजाना पूजा होती है। पंकज धीर उन दो मंदिरों में गए भी थे। एक मंदिर करनाल में है और दूसरा बस्तर में। वहां, कर्ण के तौर पर 8 फुट की मूर्ति है, जिस पर लोग पूजा करने आते हैं।</p>

एक्टर का मानना है कि जब तक स्कूलों में यह किताबें छपती रहेंगी, उनका जिक्र उनमें रहेगा और वो प्रासंगिक रहेंगे। कर्ण मंदिर में उनकी पूजा की जाती है। ऐसे दो मंदिर हैं, जहां उनकी रोजाना पूजा होती है। पंकज धीर उन दो मंदिरों में गए भी थे। एक मंदिर करनाल में है और दूसरा बस्तर में। वहां, कर्ण के तौर पर 8 फुट की मूर्ति है, जिस पर लोग पूजा करने आते हैं।

<p style="text-align: justify;">पंकज आगे कहते हैं कि जब भी वो वहां जाते हैं तो उन्हें लोगों का बहुत प्यार मिलता है। लोगों ने उन्हें कर्ण के तौर पर स्वीकार किया है। इसलिए, दूसरों के लिए इस रोल को निभाना बहुत ही मुश्किल बन पड़ा है। उन्हें महाभारत के अन्य शोज में कई तरह के रोल ऑफर हुए लेकिन, उन्होंने मना कर दिया। </p>

पंकज आगे कहते हैं कि जब भी वो वहां जाते हैं तो उन्हें लोगों का बहुत प्यार मिलता है। लोगों ने उन्हें कर्ण के तौर पर स्वीकार किया है। इसलिए, दूसरों के लिए इस रोल को निभाना बहुत ही मुश्किल बन पड़ा है। उन्हें महाभारत के अन्य शोज में कई तरह के रोल ऑफर हुए लेकिन, उन्होंने मना कर दिया। 

<p style="text-align: justify;">उन्होंने कर्ण का रोल निभाया, उनके लिए ये काफी है। पंकज कहते हैं कि वो अन्य किरदारों से भी पैसे कमा सकते हैं, लेकिन वो अपने फैन्स को कन्फ्यूज नहीं करना चाहतें। ये उनके फैन्स के साथ न्याय नहीं होगा। बता दें कि कुछ समय पहले टीवी पर जब महाभारत में कर्ण के किरदार का निधन हुआ था तो पंकज धीर सोशल मीडिया पर ट्रेंड भी करने लगे थे और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें महाभारत का सबसे बेहतरीन योद्धा भी माना था।</p>

उन्होंने कर्ण का रोल निभाया, उनके लिए ये काफी है। पंकज कहते हैं कि वो अन्य किरदारों से भी पैसे कमा सकते हैं, लेकिन वो अपने फैन्स को कन्फ्यूज नहीं करना चाहतें। ये उनके फैन्स के साथ न्याय नहीं होगा। बता दें कि कुछ समय पहले टीवी पर जब महाभारत में कर्ण के किरदार का निधन हुआ था तो पंकज धीर सोशल मीडिया पर ट्रेंड भी करने लगे थे और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें महाभारत का सबसे बेहतरीन योद्धा भी माना था।

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