आतंकियों के सामने मौत के मुंह से छीन लाया मासूम की जिंदगी, आखिर कौन है CRPF का ये जांबाज कोबरा कमांडो

First Published 2, Jul 2020, 10:03 AM

वाराणसी(Uttar Pradesh). कश्मीर के सोपोर के मॉडल टाउन चौक में हमले में CRPF का एक जवान भी शहीद हो गया। आतंकी हमले में एक आम नागरिक की भी मौत हो गयी। आतंकी हमले के दौरान सीआरपीएफ के एक जवान ने अपनी जान पर खेलकर एक तीन साल के मासूम बच्चे की जान बचाई। बुधवार को हुए इस आतंकी हमले के दौरान मासूम बच्चे की जान बचाने वाले सीआरपीएफ के जवान पवन कुमार चौबे यूपी के वाराणसी के रहने वाले हैं। अपने बेटे की बहादुरी के बारे में सुन कर पिता सुभाष चौबे ने कहा कि बेटा देश सेवा के लिए गया है और आज उसने ये साबित करके आज दिखा दिया। उन्होंने कहा कि बेटे के कारनामे और बहादुरी से सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। 

<p>मासूम बच्चे की जान बचाने वाले जवान का नाम पवन कुमार चौबे है। वह एक कोबरा कमांडो हैं। साल 2010 में उन्होंने सीआरपीएफ ज्वाइन की थी। नक्सल इलाके में तैनाती के बाद उन्हें कश्मीर में आतंक से लड़ने के लिए कश्मीर में तैनात किया गया। <br />
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मासूम बच्चे की जान बचाने वाले जवान का नाम पवन कुमार चौबे है। वह एक कोबरा कमांडो हैं। साल 2010 में उन्होंने सीआरपीएफ ज्वाइन की थी। नक्सल इलाके में तैनाती के बाद उन्हें कश्मीर में आतंक से लड़ने के लिए कश्मीर में तैनात किया गया। 
 

<p>पवन कुमार चौबे यूपी के वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र के कादीपुर स्टेशन के समीप गोलढमकवां गांव के रहने वाले हैं। पेशे से किसान पिता सुभाष चौबे कहते हैं कि किसानी करके बच्चों को पढ़ाया हूं। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी और चंद्रशेखर आजाद ने अपनी जान की बाजी लगाकर हमें खुली सांस दी। बेटा अब लोगों की हिफाजत के लिए तैनात है। यह मेरे लिए फख्र की बात है।<br />
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पवन कुमार चौबे यूपी के वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र के कादीपुर स्टेशन के समीप गोलढमकवां गांव के रहने वाले हैं। पेशे से किसान पिता सुभाष चौबे कहते हैं कि किसानी करके बच्चों को पढ़ाया हूं। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी और चंद्रशेखर आजाद ने अपनी जान की बाजी लगाकर हमें खुली सांस दी। बेटा अब लोगों की हिफाजत के लिए तैनात है। यह मेरे लिए फख्र की बात है।
 

<p>पवन तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। बड़ा भाई अजय कुमार चौबे मुंबई में कारपेट कम्पनी में कार्यरत हैं। दूसरे नंबर पर बहन रंजना की शादी प्रयागराज के पास हुई है। पवन के पिता सुभाष चौबे बताते हैं कि बेटे के बड़े ससुर पुलिस फोर्स में हैं। वह बेटे को हमेशा सेना में जाने के लिए प्रेरित करते थे। बताया कि दोपहर में पवन का फोन आया था। <br />
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पवन तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। बड़ा भाई अजय कुमार चौबे मुंबई में कारपेट कम्पनी में कार्यरत हैं। दूसरे नंबर पर बहन रंजना की शादी प्रयागराज के पास हुई है। पवन के पिता सुभाष चौबे बताते हैं कि बेटे के बड़े ससुर पुलिस फोर्स में हैं। वह बेटे को हमेशा सेना में जाने के लिए प्रेरित करते थे। बताया कि दोपहर में पवन का फोन आया था। 
 

<p>पवन की मां सुशीला देवी को दोपहर में टीवी के जरिए बेटे की वीरता के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि बेटे की बहादुरी देखकर बहुत ही अच्छा लगा है। बेटे ने न केवल देश का बल्कि घर, परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। कहा कि मां भगवती से कामना करती हूं कि वह स्वस्थ रहे। <br />
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पवन की मां सुशीला देवी को दोपहर में टीवी के जरिए बेटे की वीरता के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि बेटे की बहादुरी देखकर बहुत ही अच्छा लगा है। बेटे ने न केवल देश का बल्कि घर, परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। कहा कि मां भगवती से कामना करती हूं कि वह स्वस्थ रहे। 
 

<p>पवन की पत्नी शुभांगी चौबे बताती हैं कि जनवरी में वह यहां से गए हैं। दोपहर में फोन पर सबकुछ घटनाक्रम की जानकारी दी थी। मन में डर लगा लेकिन उनकी वीरता से ज्यादा देर तक नहीं रह सका। कहा कि मेरा बच्चा नहीं तो क्या हुआ बच्चा किसी का हो अपना ही होता है। मुझे उनपर काफी गर्व है। पवन को आठ साल का बेटा और पांच साल की बेटी है। <br />
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पवन की पत्नी शुभांगी चौबे बताती हैं कि जनवरी में वह यहां से गए हैं। दोपहर में फोन पर सबकुछ घटनाक्रम की जानकारी दी थी। मन में डर लगा लेकिन उनकी वीरता से ज्यादा देर तक नहीं रह सका। कहा कि मेरा बच्चा नहीं तो क्या हुआ बच्चा किसी का हो अपना ही होता है। मुझे उनपर काफी गर्व है। पवन को आठ साल का बेटा और पांच साल की बेटी है। 
 

<p>जम्मू कश्मीर में तैनाती से पहले वह 203 कोबरा बटालियन का हिस्सा थे जो नक्सली हमलों का मार्चा संभालती है। नक्सल इलाकों में बहादुरी से लड़ने के बाद पवन को कश्मीर ट्रांसफर कर दिया गया। सोपोर में वह 2016 से तैनात हैं।<br />
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जम्मू कश्मीर में तैनाती से पहले वह 203 कोबरा बटालियन का हिस्सा थे जो नक्सली हमलों का मार्चा संभालती है। नक्सल इलाकों में बहादुरी से लड़ने के बाद पवन को कश्मीर ट्रांसफर कर दिया गया। सोपोर में वह 2016 से तैनात हैं।
 

<p>जब उन्होंने आतंकियों को मस्जिद से फायर करते देखा तो उनकी नजर अपने दादा की बॉडी पर बैठे बच्चे पर पड़ी। वह बच्चे की तरफ गए और बच्चा उन्हें देखकर उनकी तरफ बढ़ा जिसके बाद उन्होंने बच्चे को एनकाउंटर स्पॉट से हटाया। सोशल मीडिया पर लोग पवन की तारीफ कर रहे हैं।<br />
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जब उन्होंने आतंकियों को मस्जिद से फायर करते देखा तो उनकी नजर अपने दादा की बॉडी पर बैठे बच्चे पर पड़ी। वह बच्चे की तरफ गए और बच्चा उन्हें देखकर उनकी तरफ बढ़ा जिसके बाद उन्होंने बच्चे को एनकाउंटर स्पॉट से हटाया। सोशल मीडिया पर लोग पवन की तारीफ कर रहे हैं।
 

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