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पृथ्वी से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं एलियंस! हर 157 दिन में अंतरिक्ष से भेजी जा रही रहस्यमई आवाजें

First Published Jun 11, 2020, 11:38 AM IST
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हटके डेस्क: दुनिया कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है। दुनिया के खत्म होने के आसार जैसे नजर आ रहे हैं। एक के बाद एक कई प्राकृतिक आपदाओं को झेल रही दुनिया के लिए अब वैज्ञानिकों ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। नए रिसर्च के मुताबिक, बीते 13 सालों से अंतरिक्ष से एक अजीब सी तरंग हर 157 दिन में पृथ्वी पर भेजी जा रही है। इसे एलियंस द्वारा बातचीत करने की कोशिश माना जा रहा है। अब इसपर शोध तेज कर दिया गया है। 
 

यूनिवर्सिटी ऑफ मेनचेस्टर के द्वारा किये जा रहे स्टडी में उन्होंने पाया कि बीते 13 सालों से पृथ्वी पर एक अजीब सी तरंग भेजी जा रही है। इन तरंगों की फ्रीक्वेंसी लगभग एक सी है। 

यूनिवर्सिटी ऑफ मेनचेस्टर के द्वारा किये जा रहे स्टडी में उन्होंने पाया कि बीते 13 सालों से पृथ्वी पर एक अजीब सी तरंग भेजी जा रही है। इन तरंगों की फ्रीक्वेंसी लगभग एक सी है। 

ये सिग्नल पृथ्वी पर हर 157 दिन  में भेजी जा रही है। साथ ही ये तरंग एक ही स्पॉट से पृथ्वी पर पहुंच रही है। ऐसे में अब एस्ट्रोनॉमर्स भी इसके लिए क्यूरियस हो गए हैं।  

ये सिग्नल पृथ्वी पर हर 157 दिन  में भेजी जा रही है। साथ ही ये तरंग एक ही स्पॉट से पृथ्वी पर पहुंच रही है। ऐसे में अब एस्ट्रोनॉमर्स भी इसके लिए क्यूरियस हो गए हैं।  

ये फ़ास्ट रेडियो बर्स्टस काफी छोटे हैं। लेकिन इनकी तरंगें काफी स्ट्रांग हैं। इन्हें सबसे पहले 2007 में डिस्कवर किया गया था। लेकिन तब पता नहीं चल पाया था कि इन्हें कहां से भेजा जा रहा। 
 

ये फ़ास्ट रेडियो बर्स्टस काफी छोटे हैं। लेकिन इनकी तरंगें काफी स्ट्रांग हैं। इन्हें सबसे पहले 2007 में डिस्कवर किया गया था। लेकिन तब पता नहीं चल पाया था कि इन्हें कहां से भेजा जा रहा। 
 

अब रिसर्चर्स का कहना है कि ये सिग्नल ब्लैक होल से आ रहे हैं। या फिर अंतरिक्ष के किसी नए न्यूरॉन तारे से इन तरंगों को ट्रांसमिट किया जा रहा है। 

अब रिसर्चर्स का कहना है कि ये सिग्नल ब्लैक होल से आ रहे हैं। या फिर अंतरिक्ष के किसी नए न्यूरॉन तारे से इन तरंगों को ट्रांसमिट किया जा रहा है। 

यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेनचेस्टर के रिसर्चर्स इन तरंगों पर काम कर रहे हैं। 2007 से आ रही तरंगों को सुनकर वो स्टडी करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि एलियंस शायद पृथ्वी से कांटेक्ट करना चाहते हैं। 

यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेनचेस्टर के रिसर्चर्स इन तरंगों पर काम कर रहे हैं। 2007 से आ रही तरंगों को सुनकर वो स्टडी करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि एलियंस शायद पृथ्वी से कांटेक्ट करना चाहते हैं। 

बीते चार सालों से भेजे जा रहे तरंग के पैटर्न में थोड़ा बदलाव है। ये तरंग एक ख़ास तरीके से भेजा जा रहा है। ये अंतरिक्ष से पृथ्वी पर 90 दिन तक रहता है फिर अगले 67 दिन में गायब हो जाता है। इसके बाद फिर से तरंग भेजी जा रही है। 

बीते चार सालों से भेजे जा रहे तरंग के पैटर्न में थोड़ा बदलाव है। ये तरंग एक ख़ास तरीके से भेजा जा रहा है। ये अंतरिक्ष से पृथ्वी पर 90 दिन तक रहता है फिर अगले 67 दिन में गायब हो जाता है। इसके बाद फिर से तरंग भेजी जा रही है। 

बीते चार साल के ऐसे 32 तरंग रिसर्चर्स ने रिकॉर्ड किया है। और उन्हें एनालाइज किया जा रहा है। 

बीते चार साल के ऐसे 32 तरंग रिसर्चर्स ने रिकॉर्ड किया है। और उन्हें एनालाइज किया जा रहा है। 


रिसर्चर्स को उम्मीद है कि इस साल 28 अगस्त तक वो इस रहस्य से पर्दा उठा लेंगे। आखिर ये तरंग कौन और क्यों पृथ्वी पर भेज रहा है। साथ ही अगर इसमें कोई मैसेज है तो वो क्या है? 
 


रिसर्चर्स को उम्मीद है कि इस साल 28 अगस्त तक वो इस रहस्य से पर्दा उठा लेंगे। आखिर ये तरंग कौन और क्यों पृथ्वी पर भेज रहा है। साथ ही अगर इसमें कोई मैसेज है तो वो क्या है? 
 

इनमें से कुछ सिग्नल सिर्फ एक बार ही भेजी गई है। तो कुछ रिपीट हुई है। इसका मतलब है कि कुछ मैसेज एक बार भेजने की कोशिश की गई है तो कुछ कई बार। अब देखना है कि अगर ये सिग्नल एलियंस भेज रहे हैं, तो हमारा उनसे कांटेक्ट कबतक होता है।  

इनमें से कुछ सिग्नल सिर्फ एक बार ही भेजी गई है। तो कुछ रिपीट हुई है। इसका मतलब है कि कुछ मैसेज एक बार भेजने की कोशिश की गई है तो कुछ कई बार। अब देखना है कि अगर ये सिग्नल एलियंस भेज रहे हैं, तो हमारा उनसे कांटेक्ट कबतक होता है।  

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