साफ हवा का वादा कर चीन ने शहर में किया नया एक्सपेरिमेंट, हरियाली की जगह मच्छरों ने फैला दी जानलेवा बीमारी

First Published 16, Sep 2020, 10:43 AM

हटके डेस्क: आज के समय में ग्लोबल वॉर्मिंग से लेकर ओजोन लेयर तक की समस्या लोगों के सामने है। सब प्रकृति को संतुलित करने के प्रयास में लगे हैं। हाल ही में एक खबर के मुताबिक, ग्लेशियर्स तेजी से पिघलने की बात सामने आई थी, जिसके बाद लोगों में खौफ है। हर देश प्रकृति के बैलेंस को बनाए रखने की कोशिश में जुटा है। इस बीच चीन ने भी कई कोशिशें की। इसमें से एक प्रयास की तस्वीरें तेजी सेर वायरल हो रही है। चीन ने एक्सपेरिमेंट के नाम पर चेंगडु कियी सिटी फॉरेस्ट गार्डन नाम का एक प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसे 2018 में शुरू किया गया। इसमें सरकार ने घरों में ही पेड़-पौधे लगाने का फैसला किया। लेकिन शायद उन्होंने इसके बुरे नतीजों के बारे में चर्चा नहीं की। अब इस प्रोजेक्ट के तहत घर को बन गए हैं लेकिन यहां कोई रहता नहीं है। वजह बने इन पेड़ों की वजह से फैले मच्छर। आज 8 टावर वाले ये अपार्टमेंट पूरी तरह खाली हैं। आइये आपको दिखाते हैं क्या हुआ चीन के इस एक्सपेरिमेंट का नतीजा... 

<p>चीन के चेंगडु में कियी सिटी फॉरेस्ट गार्डन नाम से रेजिडेंशियल बिल्डिंग काम्प्लेक्स बनवाया गया। इसके एरियल व्यू से पता चलता है कि यहां कैसे हर अपार्टमेंट में पेड़-पौधों को जगह दी गई। &nbsp;</p>

चीन के चेंगडु में कियी सिटी फॉरेस्ट गार्डन नाम से रेजिडेंशियल बिल्डिंग काम्प्लेक्स बनवाया गया। इसके एरियल व्यू से पता चलता है कि यहां कैसे हर अपार्टमेंट में पेड़-पौधों को जगह दी गई।  

<p>इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2018 में की गई थी। इसमें हर ब्लॉक की अपनी प्राइवेट बालकनी थी। इसमें पेड़-पौधे उगाए गए थे। ऐसा शहर में हरियाली बैलेंस करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए किया गया था।&nbsp;</p>

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2018 में की गई थी। इसमें हर ब्लॉक की अपनी प्राइवेट बालकनी थी। इसमें पेड़-पौधे उगाए गए थे। ऐसा शहर में हरियाली बैलेंस करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए किया गया था। 

<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2020 में इस काम्प्लेक्स में बने सभी 826 अपार्टमेंट बिक गए थे। लेकिन इको-पैराडाइज होने के बाद भी सभी ने अपार्टमेंट्स को छोड़ दिया। आज &nbsp;तारीख में यहां कोई भी नहीं रहता।&nbsp;<br />
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2020 में इस काम्प्लेक्स में बने सभी 826 अपार्टमेंट बिक गए थे। लेकिन इको-पैराडाइज होने के बाद भी सभी ने अपार्टमेंट्स को छोड़ दिया। आज  तारीख में यहां कोई भी नहीं रहता। 
 

<p>इस प्रोजेक्ट में बने ये बिल्डिंग्स खूबसूरत हैं और इसके पीछे का मकसद भी अच्छा था। लेकिन इसे बनाते समय बिल्डर्स से एक बड़ी गलती हो गई, जिसकी वजह से इतना बड़ा प्रोजेक्ट फेल हो गया।&nbsp;</p>

इस प्रोजेक्ट में बने ये बिल्डिंग्स खूबसूरत हैं और इसके पीछे का मकसद भी अच्छा था। लेकिन इसे बनाते समय बिल्डर्स से एक बड़ी गलती हो गई, जिसकी वजह से इतना बड़ा प्रोजेक्ट फेल हो गया। 

<p>दरअसल, इन अपार्टमेंट्स में बनी बालकनीज में लगे पेड़-पौधों ने धीरे-धीरे पुरी बिल्डिंग को ही निगल लिया। रेलिंग्स पर पौधों की बढ़त से कुछ ऐसा हाल हो गया।&nbsp;</p>

दरअसल, इन अपार्टमेंट्स में बनी बालकनीज में लगे पेड़-पौधों ने धीरे-धीरे पुरी बिल्डिंग को ही निगल लिया। रेलिंग्स पर पौधों की बढ़त से कुछ ऐसा हाल हो गया। 

<p>यहां रहने वाले लोगों को हरियाली और वातावरण से नजदीकी का प्रॉमिस किया गया था। लेकिन कुछ ही दिनों में इस पूरे ब्लॉक में मच्छरों का आतंक फ़ैल गया।&nbsp;<br />
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यहां रहने वाले लोगों को हरियाली और वातावरण से नजदीकी का प्रॉमिस किया गया था। लेकिन कुछ ही दिनों में इस पूरे ब्लॉक में मच्छरों का आतंक फ़ैल गया। 
 

<p>यहां रहने आए कुछ लोगों ने बालकनी और घर के बीच जाल लगा कर मच्छरों से बचने का प्रयास किया लेकिन मच्छरों की संख्या इतनी ज्यादा हो गई कि वहां बीमारियां फैलने लगी।&nbsp;<br />
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यहां रहने आए कुछ लोगों ने बालकनी और घर के बीच जाल लगा कर मच्छरों से बचने का प्रयास किया लेकिन मच्छरों की संख्या इतनी ज्यादा हो गई कि वहां बीमारियां फैलने लगी। 
 

<p>अब इस पूरे ब्लॉक में कोई भी नहीं रहता। लोगों के ना रहने की वजह से यहां मच्छरों की ब्रीडिंग काफी बढ़ गई है और पेड़-पौधे भी बहुत तेजी से सारे अपार्टमेंट्स को अपनी चपेट में ले रहे हैं।&nbsp;</p>

अब इस पूरे ब्लॉक में कोई भी नहीं रहता। लोगों के ना रहने की वजह से यहां मच्छरों की ब्रीडिंग काफी बढ़ गई है और पेड़-पौधे भी बहुत तेजी से सारे अपार्टमेंट्स को अपनी चपेट में ले रहे हैं। 

<p>2018 में जिस प्लान के तहत इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी वो आज फेल हो गया है। सारे बिल्डिंग्स में कुछ इस तरह का नजारा देखने को मिल रहा।&nbsp;</p>

2018 में जिस प्लान के तहत इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी वो आज फेल हो गया है। सारे बिल्डिंग्स में कुछ इस तरह का नजारा देखने को मिल रहा। 

<p>इन अपार्टमेंट्स को खरीदने वालों में भी काफी रोष है। अभी यहां 826 में मात्र 10 अपार्टमेंट में लोग रह रहे हैं। उनका कहना है कि मच्छरों के बीच जिंदगी बिताना काफी मुश्किल हो रहा है। &nbsp;<br />
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इन अपार्टमेंट्स को खरीदने वालों में भी काफी रोष है। अभी यहां 826 में मात्र 10 अपार्टमेंट में लोग रह रहे हैं। उनका कहना है कि मच्छरों के बीच जिंदगी बिताना काफी मुश्किल हो रहा है।  
 

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