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पाकिस्तान ने ढूंढ़ा कोरोना का बेवकूफी भरा इलाज: मस्जिद में नमाज पढ़ो और सुबह शहद खाओ, वायरस भगाओ

First Published Apr 14, 2020, 1:21 PM IST
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हटके डेस्क: दुनिया अभी कोविड 19 से जंग लड़ रही है। सारी दुनिया इस जानलेवा वायरस को हराने में जुटी है। चूंकि, इस वायरस का कोई इलाज नहीं मिल पाया है, ऐसे में लोग घरों में रहकर इससे बचाव कर रहे हैं। दुनिया में अभी तक इस वायरस ने लगभग 20 लाख लोगों को संक्रमित कर दिया है। साथ ही मरने वालों का आंकड़ा भी 1 लाख पार कर चुका है और तेजी से इसका आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। भारत में भी इस वायरस ने आतंक मचा रखा है। बात अगर भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की करें, तो वहां कोरोना ने अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। लोग अभी भी नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में भीड़ लगा रहे हैं। पुलिस द्वारा रोके जाने पर लोग पुलिसवालों पर ही अटैक कर रहे हैं। इस बीच अब पाकिस्तानी मीडिया ने कुरान का हवाला देते हुए कोरोना का इलाज बताया है। इस उपाय को अपनाकर पाकिस्तान कोरोना पर कंट्रोल पा लेगा इसकी तो गारंटी नहीं है, लेकिन कोरोना फैलाने में मददगार साबित होगा इसकी गारंटी है... 

पूरी दुनिया कोरोना से लड़ रही है। साइंटिस्ट इसका इलाज ढूंढ रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान ने कुरान के जरिए इसका इलाज ढूंढने का दावा किया है।  

पूरी दुनिया कोरोना से लड़ रही है। साइंटिस्ट इसका इलाज ढूंढ रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान ने कुरान के जरिए इसका इलाज ढूंढने का दावा किया है।  

पाकिस्तानी मीडिया साइट parhlo.com  ने अपने एक आर्टिकल में लिखा कि कुरान ने इस जानलेवा  वायरस से लड़ने और इससे ठीक होने का उपाय बताया है। आर्टिकल में लिखा है कि इस्लाम में हमेशा हर बीमारी का इलाज बताया गया है। 

पाकिस्तानी मीडिया साइट parhlo.com  ने अपने एक आर्टिकल में लिखा कि कुरान ने इस जानलेवा  वायरस से लड़ने और इससे ठीक होने का उपाय बताया है। आर्टिकल में लिखा है कि इस्लाम में हमेशा हर बीमारी का इलाज बताया गया है। 

आर्टिकल के मुताबिक, इस्लाम, जो जीवन का एक संपूर्ण तरीका है, यह प्रदर्शित करता है कि मृत्यु और जीवन अल्लाह के हाथों में हैं। हालांकि, धर्म यह भी कहता है कि ऐसी कोई बीमारी नहीं है जिसे ठीक नहीं किया जा सकता है।

आर्टिकल के मुताबिक, इस्लाम, जो जीवन का एक संपूर्ण तरीका है, यह प्रदर्शित करता है कि मृत्यु और जीवन अल्लाह के हाथों में हैं। हालांकि, धर्म यह भी कहता है कि ऐसी कोई बीमारी नहीं है जिसे ठीक नहीं किया जा सकता है।

उपरोक्त हदीस के प्रकाश में, प्लेग (यहाँ प्लेग किसी भी महामारी रोग को संदर्भित करता है) विश्वासियों के लिए एक आशीर्वाद है और जो वायरल बीमारी के कारण मर जाता है वह एक शहीद है। यानी अगर कोरोना से किसी की मौत हो जाती है, तो वो शहीद कहलाएगा। 

उपरोक्त हदीस के प्रकाश में, प्लेग (यहाँ प्लेग किसी भी महामारी रोग को संदर्भित करता है) विश्वासियों के लिए एक आशीर्वाद है और जो वायरल बीमारी के कारण मर जाता है वह एक शहीद है। यानी अगर कोरोना से किसी की मौत हो जाती है, तो वो शहीद कहलाएगा। 

सबसे हैरत की बात ये है कि आर्टिकल में कहीं भी मास्क लगाने या सोशल डिस्टेंसिंग का जिक्र नहीं है। इसमें लोगों से  नामाज पढ़ने और अल्लाह को याद करने को कहा गया है। इससे कोरोना ठीक हो जाएगा और अल्लाह सबको बचा लेगा, ऐसा लिखा है। 

सबसे हैरत की बात ये है कि आर्टिकल में कहीं भी मास्क लगाने या सोशल डिस्टेंसिंग का जिक्र नहीं है। इसमें लोगों से  नामाज पढ़ने और अल्लाह को याद करने को कहा गया है। इससे कोरोना ठीक हो जाएगा और अल्लाह सबको बचा लेगा, ऐसा लिखा है। 

आर्टिकल के मुताबिक़, इस्लाम के अनुसार, सब कुछ अल्लाह करवाता है; मृत्यु लिखी है, एक विश्वासी को किसी भी चीज़ से डरना नहीं चाहिए क्योंकि उसका जीवन अल्लाह के हाथ में है। इसके बावजूद, पैगंबर मुहम्मद ने लोगों को एक ऐसे क्षेत्र में जाने से मना किया है जहां एक महामारी फैल गई है। इसका मतलब है, निस्संदेह जीवन और मृत्यु अल्लाह के हाथों में हैं, लेकिन सुरक्षात्मक उपाय करना आवश्यक है। इसलिए, हमें कोरोनोवायरस के बारे में एहतियाती कदम उठाने चाहिए, और दूसरी ओर, हमें अल्लाह के अलावा किसी से भी नहीं डरना चाहिए।

आर्टिकल के मुताबिक़, इस्लाम के अनुसार, सब कुछ अल्लाह करवाता है; मृत्यु लिखी है, एक विश्वासी को किसी भी चीज़ से डरना नहीं चाहिए क्योंकि उसका जीवन अल्लाह के हाथ में है। इसके बावजूद, पैगंबर मुहम्मद ने लोगों को एक ऐसे क्षेत्र में जाने से मना किया है जहां एक महामारी फैल गई है। इसका मतलब है, निस्संदेह जीवन और मृत्यु अल्लाह के हाथों में हैं, लेकिन सुरक्षात्मक उपाय करना आवश्यक है। इसलिए, हमें कोरोनोवायरस के बारे में एहतियाती कदम उठाने चाहिए, और दूसरी ओर, हमें अल्लाह के अलावा किसी से भी नहीं डरना चाहिए।

कुरान के हिसाब से अगर कोरोना वायरस से लड़ना है तो शहद का इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें चिकित्सा शक्ति है। इसलिए, इसे  घातक कोरोनावायरस से लड़ने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
 

कुरान के हिसाब से अगर कोरोना वायरस से लड़ना है तो शहद का इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें चिकित्सा शक्ति है। इसलिए, इसे  घातक कोरोनावायरस से लड़ने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
 

आर्टिकल में लिखा है कि जो कोई भी हर महीने तीन बार शहद खाता है, उसे कोई गंभीर बीमारी नहीं होगी। कोरोना भी नहीं। इस्लाम में पैगंबर ने शहद को उपचार के एक एजेंट के रूप में उल्लेख किया। इस प्रकार, सुबह में शहद खाना चाहिए।

आर्टिकल में लिखा है कि जो कोई भी हर महीने तीन बार शहद खाता है, उसे कोई गंभीर बीमारी नहीं होगी। कोरोना भी नहीं। इस्लाम में पैगंबर ने शहद को उपचार के एक एजेंट के रूप में उल्लेख किया। इस प्रकार, सुबह में शहद खाना चाहिए।

साथ ही काले बीज को को भी कोरोना से लड़ने के लिए मददगार बताया गया। इसे खाने से भी कोरोना नहीं होगा। लेकिन आपको बता दें कि अभी तक दुनिया के जिन भी देशों में कोरोना का इलाज ढूंढा जा रहा है, उसमें इन दो बातों की किसी ने पुष्टि नहीं की है। इसे इस्लाम का हवाला देकर पाकिस्तान में फैलाया जा रहा है। 

साथ ही काले बीज को को भी कोरोना से लड़ने के लिए मददगार बताया गया। इसे खाने से भी कोरोना नहीं होगा। लेकिन आपको बता दें कि अभी तक दुनिया के जिन भी देशों में कोरोना का इलाज ढूंढा जा रहा है, उसमें इन दो बातों की किसी ने पुष्टि नहीं की है। इसे इस्लाम का हवाला देकर पाकिस्तान में फैलाया जा रहा है। 

कुरान में, अल्लाह ने "तक्वाह" (ईश्वर से डरने वाला) और "तवक्कल" (ईश्वर से संबंध) पर जोर दिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मानव कुछ चीजों को नियंत्रित नहीं कर सकता है। इस्लाम के अनुसार, किसी को भी मौत, विपत्ति, खुशी,  अल्लाह के हाथ में है। इससे घबराना नहीं चाहिए। अगर कोरोना से बचना है तो नमाज अदा करें। अल्लाह को याद करें। इस आर्टिकल में लोगों से नमाज के जरिये कोरोना के ठीक होने की बात कही गई। 

कुरान में, अल्लाह ने "तक्वाह" (ईश्वर से डरने वाला) और "तवक्कल" (ईश्वर से संबंध) पर जोर दिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मानव कुछ चीजों को नियंत्रित नहीं कर सकता है। इस्लाम के अनुसार, किसी को भी मौत, विपत्ति, खुशी,  अल्लाह के हाथ में है। इससे घबराना नहीं चाहिए। अगर कोरोना से बचना है तो नमाज अदा करें। अल्लाह को याद करें। इस आर्टिकल में लोगों से नमाज के जरिये कोरोना के ठीक होने की बात कही गई। 

इन सबसे बढ़कर, एक मुसलमान को अल्लाह पर विश्वास करना चाहिए और उसे स्वीकार करना चाहिए जो उसके लिए किस्मत में है। दूसरी ओर, उसे कोरोनोवायरस की महामारी में  खाने से पहले या किसी भी काम को करने के लिए "बिस्मिल्लाह-इर-रहमान-इर-रहीम" (अल्लाह के नाम पर सबसे दयालु और सबसे दयालु) का पाठ करना चाहिए। 

इन सबसे बढ़कर, एक मुसलमान को अल्लाह पर विश्वास करना चाहिए और उसे स्वीकार करना चाहिए जो उसके लिए किस्मत में है। दूसरी ओर, उसे कोरोनोवायरस की महामारी में  खाने से पहले या किसी भी काम को करने के लिए "बिस्मिल्लाह-इर-रहमान-इर-रहीम" (अल्लाह के नाम पर सबसे दयालु और सबसे दयालु) का पाठ करना चाहिए। 

एक मुस्लिम कोरोनोवायरस और किसी भी आपदा से सुरक्षा के लिए "अयात-उल-कुरसी" और तीसरा "कलीमाह" का पाठ कर सकता है। पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) के उपरोक्त सभी अयाह और हदीसों को पढ़ने और लागू करने के बाद, अपने आप को अल्लाह पर छोड़ दें और शांत रहें। इसके बाद कोरोना आपको छू भी नहीं पाएगा। 

एक मुस्लिम कोरोनोवायरस और किसी भी आपदा से सुरक्षा के लिए "अयात-उल-कुरसी" और तीसरा "कलीमाह" का पाठ कर सकता है। पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) के उपरोक्त सभी अयाह और हदीसों को पढ़ने और लागू करने के बाद, अपने आप को अल्लाह पर छोड़ दें और शांत रहें। इसके बाद कोरोना आपको छू भी नहीं पाएगा। 

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