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यहां पुलिस के टॉर्चर का खौफनाक है तरीका, खींचती है नाख़ून तो कभी प्राइवेट पार्ट में छिड़कती है काली मिर्च

First Published Sep 3, 2020, 3:54 PM IST
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हटके डेस्क: पुलिस का काम  होता है अपराधियों को पकड़ना। पुलिस शहर से अपराधियों की संख्या कम करने के  लिए उन्हें पकड़ती है। फिर सबक सिखाने के लिए ताकि भविष्य में वो ऐसा ना करे, उन्हें जेल भेजा जाता है। ताकि भविष्य में वो कोई अपराध ना करे। लेकिन ईरान में पुलिस ही अपराधियों का काम कर रही है। 2019 से ईरान में चीजें काफी बदल गई है। पेट्रोल के दाम बढ़ने की वजह से यहां लोगों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू किया। जिसके बाद पुलिस ने बेगुनाह लोगों को अरेस्ट कर उन्हें जबरदस्ती टॉर्चर कर मौत की सजा दिलवानी शुरू कर दी। हाल ही में एक रिपोर्ट में सामने आया कि 2019 से अभी तक पुलिस ने करीब 7 हजार लोगों को अरेस्ट किया और उनमें से 5 सौ से अधिक को गलत चार्जेस में सजा दी गई। वो लोग, जो पुलिस के चंगुल से बच निकले उन्होंने बताया कि कैसे जेल में खौफनाक ढंग से टॉर्चर कर उनसे वो गुनाह मनवाया जाता था जो उन्होंने किया ही नहीं था। 

2019 में ईरान में पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के कारण लोगों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। इसके बाद पुलिस ने करीब 7 हजार लोगों को अरेस्ट कर लिया। 
 

2019 में ईरान में पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के कारण लोगों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। इसके बाद पुलिस ने करीब 7 हजार लोगों को अरेस्ट कर लिया। 
 

इनमें से 5 सौ लोगों को गलत तरीके से सजा दी गई। उन्होंने जो अपराध किया भी नहीं,  उसके लिए उन्हें पुलिस ने कन्फेस करने का प्रेशर डाला। इसके लिए उन्हें काफी तरह से टॉर्चर किया गया। 

इनमें से 5 सौ लोगों को गलत तरीके से सजा दी गई। उन्होंने जो अपराध किया भी नहीं,  उसके लिए उन्हें पुलिस ने कन्फेस करने का प्रेशर डाला। इसके लिए उन्हें काफी तरह से टॉर्चर किया गया। 

पुलिस ने 10 साल के बच्चों को भी नहीं छोड़ा। पुलिस ने मासूम लोगों को जेल में डालकर उन्हें उस बात को मानने के लिए सजा दी जो उन्होंने की भी नहीं। 
 

पुलिस ने 10 साल के बच्चों को भी नहीं छोड़ा। पुलिस ने मासूम लोगों को जेल में डालकर उन्हें उस बात को मानने के लिए सजा दी जो उन्होंने की भी नहीं। 
 

कैदियों को कई तरह से टॉर्चर किया जाता था। किसी के नाख़ून उखाड़े जाते थे तो किसी के प्राइवेट पार्ट में काली मिर्च भर दी जाती थी। 
 

कैदियों को कई तरह से टॉर्चर किया जाता था। किसी के नाख़ून उखाड़े जाते थे तो किसी के प्राइवेट पार्ट में काली मिर्च भर दी जाती थी। 
 

पुलिस इन लोगों को वैसे गुनाहों को मानने को कहते थे, जिससे उनका कोई नाता नहीं था। उनसे पेपर साइन करवाए जाते थे। इसके बाद कोर्ट में उन्हें एक महीने से लेकर 10 साल की सजा दी जाती थी। 

पुलिस इन लोगों को वैसे गुनाहों को मानने को कहते थे, जिससे उनका कोई नाता नहीं था। उनसे पेपर साइन करवाए जाते थे। इसके बाद कोर्ट में उन्हें एक महीने से लेकर 10 साल की सजा दी जाती थी। 

पुलिस के ऐसे ही टॉर्चर से आजाद हुए एक शख्स ने बताया कि जब वो पुलिस कस्टडी में था तो उसे ऐसी सजा दी जाती थी, जिसमें उसकी बॉडी में कई सुइयां चुभोई जाती थी। 

पुलिस के ऐसे ही टॉर्चर से आजाद हुए एक शख्स ने बताया कि जब वो पुलिस कस्टडी में था तो उसे ऐसी सजा दी जाती थी, जिसमें उसकी बॉडी में कई सुइयां चुभोई जाती थी। 

कई कैदियों के बारे में उनके घरवालों को कोई जानकारी नहीं है। कई लोग अपने रिलेटिव्स को ढूंढ रहे हैं। वो कई सालों से पुलिस के सामने अपनों को वापस लौटाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिल पाया। अब भी वो उनकी तलाश में जुटे हैं।  

कई कैदियों के बारे में उनके घरवालों को कोई जानकारी नहीं है। कई लोग अपने रिलेटिव्स को ढूंढ रहे हैं। वो कई सालों से पुलिस के सामने अपनों को वापस लौटाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिल पाया। अब भी वो उनकी तलाश में जुटे हैं।  

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