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अचानक जमीन से फूट पड़ा 45 फीट ऊंचा बर्फ का ज्वालामुखी, फव्वारे की तरह निकल रहा गर्म पानी

First Published Feb 10, 2021, 10:25 AM IST
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प्रकृति अपने अंदर कितने रहस्य छुपाए है, कोई नहीं जानता। हाल में भारत के उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से बड़ी तबाही मची। ऐसी घटनाओं के बारे में वैज्ञानिक तक ठीक से नहीं बता पाते कि कब क्या हो सकता है। अब कजाखस्तान देश में एक अजीब मामल सामने आया है। यहां के अल्माटी प्रांत में अचानक जमीन से एक बर्फ का गोला निकल आया। इसकी ऊंचाई 2-4 फीट नहीं, बल्कि 4 मंजिला इमारत के बराबर है। यानी करीब 45 फीट। इसे बर्फ का ज्वालामुखी कहते है। वैज्ञानिकों की की भाषा में इसे आइस वौल्कैनो(Ice Volcano) कहा जाता है। केगन और शरगानक के गांवों के बीच बने इस बर्फ के गोले से फव्वारे की तरह लगातार पानी निकल रहा है। इसकी ऊंचाई लगातार बढ़ रही है।

यह घटना नूर सुल्तान (पूर्व में अस्ताना) से चार घंटे की दूरी पर हुई। इस समय यहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है। बावजूद इस प्राकृतिक रहस्यमयी घटना के बारे में जैसे ही मीडिया में खबर फैली, लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं।

यह घटना नूर सुल्तान (पूर्व में अस्ताना) से चार घंटे की दूरी पर हुई। इस समय यहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है। बावजूद इस प्राकृतिक रहस्यमयी घटना के बारे में जैसे ही मीडिया में खबर फैली, लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं।

कजाखस्तान से पहले अमेरिका के लेक मिशीगन में भी ऐसा ही अजूबा सामने आया था। बात कुछ साल पहले की है। हालांकि वो बर्फ का गोला 5-6 फीट के आसपास ही था। यह बर्फ का गोला तो दूर से नजर आ रहा है।

कजाखस्तान से पहले अमेरिका के लेक मिशीगन में भी ऐसा ही अजूबा सामने आया था। बात कुछ साल पहले की है। हालांकि वो बर्फ का गोला 5-6 फीट के आसपास ही था। यह बर्फ का गोला तो दूर से नजर आ रहा है।

वैज्ञानिक मानते हैं कि बर्फ का यह गोला चट़्टानों में हुई हलचल के कारण बनता है। यानी यह ठीक वैसी ही प्राकृतिक घटना है, जैसा ज्वालामुखी निकलने पर होता है। बर्फ के गोले से जो पानी निकल रहा है, वो गर्म है। यानी जमीन के नीचे गर्म पानी होगा।

वैज्ञानिक मानते हैं कि बर्फ का यह गोला चट़्टानों में हुई हलचल के कारण बनता है। यानी यह ठीक वैसी ही प्राकृतिक घटना है, जैसा ज्वालामुखी निकलने पर होता है। बर्फ के गोले से जो पानी निकल रहा है, वो गर्म है। यानी जमीन के नीचे गर्म पानी होगा।

कजाखस्तान की इस घटना ने वैज्ञानिकों को नई रिसर्च के लिए प्रेरित किया है। बता दें कि अंटार्कटिका जैसे बर्फीले इलाकों में 2 किमी नीचे तक करीब 100 ज्वालामुखी होने का पता लगाया गया था। वैज्ञानिकों का दावा है कि अंटार्कटिका में पृथ्वी का सबसे बड़ा ज्वालामुखी क्षेत्र है।

कजाखस्तान की इस घटना ने वैज्ञानिकों को नई रिसर्च के लिए प्रेरित किया है। बता दें कि अंटार्कटिका जैसे बर्फीले इलाकों में 2 किमी नीचे तक करीब 100 ज्वालामुखी होने का पता लगाया गया था। वैज्ञानिकों का दावा है कि अंटार्कटिका में पृथ्वी का सबसे बड़ा ज्वालामुखी क्षेत्र है।

कहां हैं कजाखस्तान
यह यूरेशिया में स्थित एक देश है। क्षेत्रफल के हिसाब से यह दुनिया का 9वां सबसे बड़ा देश है। पहले यह सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था। इस देश की ज्यादातर भूमि जंगल, पहाड़ और घास के मैदान से घिरी हुई है। यहां शुष्क महाद्वीपीय जलवायु है। यानी ठंड काफी पड़ती है। सर्दियों में टेम्परेचर -20 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है।

कहां हैं कजाखस्तान
यह यूरेशिया में स्थित एक देश है। क्षेत्रफल के हिसाब से यह दुनिया का 9वां सबसे बड़ा देश है। पहले यह सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था। इस देश की ज्यादातर भूमि जंगल, पहाड़ और घास के मैदान से घिरी हुई है। यहां शुष्क महाद्वीपीय जलवायु है। यानी ठंड काफी पड़ती है। सर्दियों में टेम्परेचर -20 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है।

तस्वीर में देखा जा सकता है कि बर्फ को गोला कैसे ज्वालामुखी से है। यह कुएं सा दिख रहा है। इस तरह की घटनाएं वैज्ञानिकों को नये-नये रिसर्च के लिए प्रेरित करती हैं।

तस्वीर में देखा जा सकता है कि बर्फ को गोला कैसे ज्वालामुखी से है। यह कुएं सा दिख रहा है। इस तरह की घटनाएं वैज्ञानिकों को नये-नये रिसर्च के लिए प्रेरित करती हैं।

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