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हरियाणा: इन 5 बाबाओं के इर्द-गिर्द घूम रही राजनीति, आशीर्वाद लेने के लिए नेताओं में मची होड़

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 21 अक्टूबर को होने हैं। जिनमें 21 को मतदान होंगे और 27 को नतीजे आएंगे। भारत की राजनीति में देखा जाए तो बाबाओं और महंतों का काफी बोलबाला रहता है। हरियाणा इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। 

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Chandigarh, First Published Sep 30, 2019, 6:25 PM IST
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चंडीगड़. हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए 21 अक्टूबर को मतदान होने हैं। 27 को नतीजे आएंगे। भारत की राजनीति में देखा जाए तो बाबाओं और महंतों का काफी बोलबाला रहता है। हरियाणा इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। हरियाणा की राजनीति में बाबाओ, महंत, गुरूजी और चेलों का बहुत अहम भूमिका रही है। पिछले कुछ सालों में हरियाणा की राजनीति में इन बाबाओं का हस्तक्षेप काफी बढ़ा है।

डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत बाबा राम रहीम, सतलोक आश्रम के बाबा रामपाल के बाद हरियाणा में बाबाओं का राजनीतिक हस्तक्षेप काफी बढ़ गया है। विवादों को परे रख देखें तो हरियाणा की जनता आस्था के आगे नतमस्तक दिखती है। अपने भक्तों और अनुयायियों के कारण ये बाबा अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत कर लेते हैं। इतना ही नहीं ये बाबा न सिर्फ राज्य भर में बल्कि कई बार नेशनल लीडर भी बनकर उभरते हैं। हरियाणा में विधानसभा चुनावों में कुछ दिग्गज बाबाओं पर पार्टियां दांव लगा सकती हैं। इस तरह हम आपको कुछ बाबाओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिन पर उस चुनाव में खास नज़र बनी हुई है। 

बाबा बालक नाथ-  राजस्थान के अलवर से सांसद बाबा बालक नाथ की प्रसिद्धि काफी ज्यादा है। वह दिल्ली-रोहतक रोड स्थित बने बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं। वहीं रोहतक और जींद के बीच में बने मस्तनाथ डेरा पर अनुयायाओं का जमावड़ा रहता है। नाथ समुदाय सहित देश भर से लोग बाबा बालक नाथ को बहुत मानते हैं। बाबा बालक नाथ के राजनीति में संबंध काफी मजबूत हैं हरियाणा में भूपेंद्र हुड्डा के परिवार से बाबा के काफी मजबूत रिश्ते हैं। वहीं मई में लोकसभा चुनाव के दौरान बाबा का बीजेपी कैंडिडेट के तौर पर भी नाम सुर्खियों में रहा था। 

काली दास महाराज- काली दास महाराज का डेरा रोहतक जिले के सांपला में है। महाराज के बारे में प्रसिद्ध है कि वह सिर्फ नारियल पानी पर जीवित हैं अन्न जल नहीं गृहण करते हैं। कालीदास महाराज की राजनीतिक पहुंच बहुत ऊंची है। उनकी सत्ताधारी भाजपा में भी काफी पहुंच है। बीजेपी के बहुत से कार्यक्रमों में काली दास महाराज को देखा जाता है। इसके अलावा बीजेपी भी अध्यक्ष अमित शाह साल 2017 में जब तीन दिन के हरियाणा दौरे पर थे तब महाराज के डेरे पर गए थे। साथ ही महाराज तक पीएम नरेंद्र मोदी तक भी पहुंच है। महाराज के राजनीतिक रिश्तों का फायदा उठाकर बहुत से लोग पार्टी में शामिल होने और टिकिट पाने को आतुर नजर आते हैं।

बाबा कपिल पुरी- रोहतक जिल में बाबा कपिल पुरी का डेरा है जो गौकरण धाम के नाम से जाना जाता है। बाबा कपिल पुरी सभी राजनीतिक पार्टियों में खास पहचान रखते हैं। सिख समुदाय में बाबा ज्यादा प्रचलित हैं। कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा से कपिल पुरी बाबा के भी खास संबंध रहे हैं। लोकसभा चुनाव में कपिल पुरी के भी चुनाव लड़ने की खबरें आई थीं। इसके अलावा हाल फिलहाल में वह बीजेपी के समर्थन में ज्यादा रहे हैं। भाजपा कार्यक्रमों में बाबा  कपिल पुरी मौजूद रहते हैं। 

बाबा करन पुरी- बाबा करन पुरी का नाम भी रोहतक के प्रसिद्ध बाबाओं में आता है। डबल फाटक क्षेत्र में बालक पुरी डेरा नाम से बाबा का आश्रम है। सिख समुदाय के लोग करन पुरी बाबा के ज्यादा अनुयायी हैं। बाबा खुलकर बीजेपी का समर्थन करते हैं साथ ही भाजपा के चुनावी कार्यक्रमों में नजर आते हैं। 

महंत सतीश दास- महंत सतीश दास  INLD छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए थे। इससे पहले साल 2014 के चुनावों में आईएनएलडी पार्टी से महम क्षेत्र से उम्मीदवार रह चुके हैं। पर चुनाव हार जाने के बाद उन्होंने बीडेपी की ओर रूख कर लिया। रोहतक के महम में ही महंत का डेरा है जहां आस पास के गांव के लोग उन्हें बहुत मानते हैं। 

रोहतक सहित हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में इन बाबाओं का दबदबा कायम है। पार्टी और नेता भी इन बाबाओं के आगे सिर झुकाते मिल जाते हैं। साथ ही चुनाव प्रचार-प्रसार में भी इनकी प्रसिद्धि का सहारा लेने से नहीं चूकते।

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