पानीपत, हरियाणा. यहां के सिविल अस्पताल में स्टाफ की लापरवाही के चलते 4 महीने के बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी। इस मां का आरोप है कि वे बच्चे को लेकर करीब आधे घंटे तक अस्पताल में भटकती रही, लेकिन उसे इलाज नहीं मिला। अगर समय रहते उसे ऑक्सीजन मिल जाती, तो शायद उसकी जान बच जाती। यह तस्वीर गुरुवार को सामने आई। सेक्टर-25 की रहने वाली मनीषा अपने पति भैनू के साथ बेटे राजू को लेकर अस्पताल आई थी। बच्चे की हफ्तेभर से ज्यादा समय से तबीयत खराब थी।


एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर के पास तक दौड़ती रही 
मनीषा जनसेवा दल के सदस्यों के साथ 16 नंबर स्थित ओपीडी पहुंची। यहां डॉ. एकता ने बच्चे को देखकर चौथी मंजिल पर एसएनसीयू वार्ड में भेज दिया। वहां चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. निहारिका नहीं मिलीं। वे ऑपरेशन थियेटर में थीं। इसके बाद मनीषा बच्चे को लेकर फिर ओपीडी की तरफ भागी। लेकिन बच्चे ने दम तोड़ दिया। एसएनसीयू वार्ड इंचार्ज डॉ. निहारिका ने बताया कि वे उस समय ऑपरेशन थियेटर में सिजेरियन डिलीवरी कर रही थीं। एमएस डॉ. आलोक जैन ने कहा कि इस संबंध में उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली है। डायरिया के चलते की हालत सीरियस थी।

बच्चे के शव को सीने से चिपकाकर रोती रही मां, न भगवान पिघले और न खाकी

 

सीकर, राजस्थान. यह तस्वीर डॉक्टर और पुलिस के गैर जिम्मेदाराना बर्ताव (Irresponsible treatment) को दिखाती है। इस महिला का पड़ोसी से झगड़ा हुआ था। मारपीट के चलते उसका गर्भपात (Abortion) हो गया। वो बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंची, लेकिन डॉक्टर ने पुलिस केस बताकर इलाज से पल्ला झाड़ लिया। वहीं, पुलिस बोली कि पीड़िता उसके पास नहीं आई। जबकि लोगों ने देखा कि पीड़िता अपने बच्चे का शव सीने से चिपकाए कभी अस्पताल, तो कभी थाने का चक्कर काटती रही।

2 दिन तक बच्चे की लाश लिए भटकती रही
 महिला दो दिन तक बच्चे की लाश लिए भटकती रही। आखिरकार पीड़िता परिवार सीधे कोर्ट जा पहुंचा। तब कहीं जाकर पुलिस सक्रिय हुई। मामला नीमकाथाना कस्बे के लुहारवास का है। बुधवार को पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं बच्चे का शव मर्चुरी में रखवाया गया। बता दें कि रास्ते को लेकर बिमला बावरिया और पड़ोसी सरदारा मीणा के परिवार के बीच विवाद चला आ रहा है। इसी बात को लेकर 18 अक्टूबर को विमला की लड़की की गर्भवती बेटी रेखा के साथ भी मारपीट हो गई थी। वो अपनी ससुराल श्रीमाधोपुर से लुहारवास आई थी। 

रेखा का आरोप है कि उसे 7-8 दिन में डिलीवरी होनी थी, लेकिन चोट लगने से गर्भपात हो गया। वो बच्चे के शव के लेकर कपिल अस्पताल पहुंची। वहां पुलिस केस बताकर इलाज से मना कर दिया। पीएमओ डॉ. जीएस तंवर ने कहा कि इलाज के लिए मना करने का सवाल ही नहीं उठता। वहीं, सदर थाना सीआई लालसिंह यादव ने बताया कि पीड़िता परिवार थाने नहीं आया।