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देश में पन्ना खनन करने वाला पहला राज्य बन सकता है झारखंड, नवंबर तक हो सकती है नीलामी की प्रक्रिया

झारखंड के जमशेदपुर के गुड़ाबांधा में हैं पन्ना का बड़ा भंडार। प्रदेश सरकार ने खनन के लिए चिन्हित किए दो ब्लॉक्स, नवंबतर तक हो सकती है नीलामी। एक दशक पहले भू- तत्व विभाग ने लगाया था पता। इसके खनन के ऑर्डर मिलने से रोजगार के अवसर बनेगे।

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Jamshedpur, First Published Aug 23, 2022, 5:59 PM IST

जमशेदपुर (झारखंड). झारखंड में खनिजों का भंडार है। यहां कई बेशकीमती रत्न पाए जाते हैं। झारखंड की लौहनगरी जमशेदपुर के गुड़ाबांधा की पहाड़ियों पर बेशकीमती रत्न पन्ना का बड़ा भंडार है। करीब एक इशक पहले खनन एवं भू-तत्व विभाग ने इसका पता लगाया था। बता दें कि गुड़ाबांधा में मिला पन्ना का भंडार लगभग 40 वर्ग किलामीटर तक पहाड़ियों पर फैला हुआ है। झारखंड सरकार ने अब पन्ना के व्यवसायिक खनन के लिए इसके 2 ब्लॉक को मार्क किया है। इसकी निलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अक्टूबर तक निलामी हाने की संभावना है। निलामी होने के बाद झारखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा जो पन्ना जैसे बेशकीमती रत्न के लिए खनन करेगा। इससे राज्य में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। 

12 साल पहले ऐसे मिला पन्ने का भंडार
इलाके में पन्ना के भंडार का पता सरकार को तब चला, जब वर्ष 2012 में बेनीडांगर नाम की जगह पर अवैध खनन के दौरान 3 लोगों की मौत हो गई थी। जांच हुई तो पता चला कि ये लोग पन्ना का खनन कर रहे थे। पता चला कि यहां राजस्थान के जयपुर, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, बंगाल आदि राज्यों के पत्थर के कारोबारी गुपचुप तरीके से स्थानीय मजदूरों से पन्ना का खनन करवा रहे थे। 

कोलकाता में हुई गुड़ाबांधा के पन्ने की टेस्टिंग
बता दें कि गुड़ाबांधा में मिलने वाले पन्ना के सैंपल की जांच कोलकाता स्थित जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसएआई) की प्रयोगशाला में कराई गई। जांच के बाद पता चला कि यहां पाए जाने वाले पन्ना की क्वालिटी बहुत अच्छी है। पन्ना एक बेहद बेशकीमती रत्न है। ये बेरिल खनिज का एक प्रकार है, जिसकी पहचान क्रोमियम और वैनेडियम जैसे तत्वों की मौजूदगी से की जाती है। 

खनन के लिए चिन्हित इलाके में 1500 फीट ऊंची 45 पहाड़ियां मौजूद
खनन एवं भू-तत्व विभाग ने पन्ना के खनन के लिए जो 2 ब्लॉक्स चिन्हित किए हैं, उनमें से एक का क्षेत्रफल 25 वर्ग किलोमीटर और दूसरे का 13 वर्ग किलोमीटर है। ये दोनों इलाके जमशेदपुर से करीब 85 किमी दूर स्थित हैं। यहां पावड़ी, झारपोखरिया, पोखरडीहा बारुनमुठी, खरकुगोड़ा सहित 45 पहाड़ियां हैं। इनकी ऊंचाई एक हजार से 15 सौ फीट तक है। 25 वर्ग किलोमीटर वाले बड़े ब्लॉक में बारुनमुठी और गुड़ाबांधा शामिल हैं, जबकि 13 वर्ग किलोमीटर वाले दूसरे ब्लॉक में चिड़िया पहाड़, हड़ियान, उड़ियान और बाहुटिया की पहाड़ियां शामिल हैं। अनुमान है कि यहां लगभग 628 एकड़ भूमि इलाके में पन्ना मौजूद है। 

खनन के लिए झारखंड सरकार ने JEMCL नाम की कंपनी बनाई
बता दें कि, झारखंड सरकार ने माइनिंग सेक्टर से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए बड़ी कार्य योजना तैयार की है। इसके लिए सरकार ने झारखंड अन्वेषण एवं खनन निगम लिमिटेड (जेइएमसीएल) नाम की कंपनी बनाई है। सरकार इसे एक हजार करोड़ की पूंजी वाली कंपनी के रूप में विकसित करेगी। ये कंपनी खनिज की खोज, उत्पादन और नीलामी आदि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 

रांची में पेश की गई विस्तृत रिपोर्ट
दोनों ब्लॉक्स में भू-तात्विक सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया गया है। इन इलाकों में ड्रोन से सर्वे कराया गया। इसके अलावा टोपोग्राफी मैपिंग, जियोलाजिकल मैपिंग भी की गई। पिछले हफ्ते रांची में झारखंड राज्य भूतात्विक कार्यक्रम परिषद की बैठक में इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई है। जियोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार करने के लिए विभाग ने वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई है। 

10 हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद
पूर्वी सिंहभूम के गुड़ाबांधा इलाके में पन्ना की अवैध खुदाई पिछले 10 साल से हो रही है। बहरहाल, अब खदानों की आधिकारिक तौर पर बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू होने से राज्य सरकार को राजस्व और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार की उम्मीद बढ़ी है। अनुमान है कि इससे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर कम से कम 10 हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा। सरकार ने जो पॉलिसी तय की है, उसके अनुसार राज्य में लीज पर खदान चलाने वाली कंपनियों को 75 प्रतिशत पदों पर स्थानीय लोगों को नियुक्त करना होगा।

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