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यहां मुस्लिम उठाते हैं रावण की कुलदेवी की डोली, 380 सालों से चली आ रही ये अनोखी परंपरा

झारखंड में यहां एक परंपरा है जिसके तहत मुस्लिम समाज के लोग देवी मां की डोली की आगवानी करते हैं। यहां मुस्लिम समाज के लोग देवी घर जाने वाले रास्ते के साथ-साथ देवी घर की साफ सफाई भी करते हैं।

Muslims pick up the doli of Ravana Kuldevi very old tradition of jharkhand uja
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First Published Oct 3, 2022, 6:15 PM IST

रांची(Jharkhand). भारत विवधताओं का देश है। यहां की परम्पराएं सारी दुनिया में मशहूर हैं। इस समय देश में दशहरे की धूम है। झारखंड में यहां एक परंपरा है जिसके तहत मुस्लिम समाज के लोग देवी मां की डोली की आगवानी करते हैं। यहां मुस्लिम समाज के लोग देवी घर जाने वाले रास्ते के साथ-साथ देवी घर की साफ सफाई भी करते हैं। इसी रास्ते से डोली पर सवार होकर मां दुर्गा की शोभायात्रा निकलती है।

झारखंड की राजधानी रांची में बड़कागांव स्थित मौजा आनी में  380 वर्षों से एक ऐसी ऐतिहासिक परम्परा का निर्वहन मुस्लिमों द्वारा की जा रही है जो एक मिसाल है। बड़कागांव रियासत के जमीदार ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव के मुताबिक देवी घर में दिए जाने वाले बलि के लिए रकसा कोहडा और दुंबा (भेड़) आज भी मुस्लिम समाज के लोग ही लाते हैं। सदियों से मुस्लिम समाज के लोग यहां की पूजा में बढ़-चढ़ कर हिसा लेते हैं। यहां की पूजा में धर्म की बाधाएं खत्म हो जाती हैं। गांव में देवी मां की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। देवी मां की शोभा यात्रा के लिए बांस से डोली बनाई जाती है। इसमें 7 प्रकार के पत्तों से बनी देवी मां की प्रतिमा को सवार किया जाता है। ढोल- नगाड़े, घंटे और शंख की ध्वनि के साथ भव्य शोभायात्रा निकलती है।

रावण की इष्टदेवी का है मंदिर 
बताया जाता है कि इस मंदिर में मां चिंतामणि की मूर्ति है और उन्हीं की पूजा की जाती है। मान्यता है कि चिंतामणि देवी को रावण की इष्टदेवी माना जाता है। दशहरे के समय में यहां होने वाली पूजा समूचे राज्य में प्रसिद्द है। काफी दूर-दूर से लोग इस पूजा में शामिल होने के लिए आते हैं। और तो और इस पूजा मे मुस्लिमों के बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने से यहां भीड़ भी बहुत अधिक संख्या में होती है।

रावण के संहार के लिए श्रीराम ने की थी पूजा 
मान्यता ये भी है कि रावण को युद्ध में हराने और उसके वध के लिए भगवान श्री राम ने पहले मां चिन्तामणि की पूजा की थी। उसके बाद युद्ध में उन्होंने रावण का संहार किया था। यहां 16 भुजाओं वाली मां चिंतामणि की पूजा आज भी बेहद अनोखी और पौराणिक तरीके से होती है। इनकी डोली को नए वस्त्र के बजाय वहां के राज परिवार की महिलाओं की साड़ी से ही सजाया जाता है। सालों से चली आ रही इस शोभायात्रा और देवी घर में देवी मां की पूजा में शामिल होने के लिए 51 गांव के लोग पहुंचते हैं। 

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