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Vaman dwadashi 2022: 7 सितंबर को इस विधि से करें भगवान वामन की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और कथा

Vaman dwadashi 2022: धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन द्वादशी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। इस बार ये तिथि 7 सितंबर, बुधवार को है।
 

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First Published Sep 7, 2022, 5:45 AM IST

उज्जैन. पुराणों में भगवान विष्णु के कई अवतारों के बारे में बताया गया है। इनमें वामन अवतार (Vaman dwadashi 2022) भी एक हैं। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन द्वादशी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये तिथि 7 सितंबर, बुधवार को है। इस दिन वामन भगवान की पूजा की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आगे जानिए वामन द्वादशी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा व अन्य खास बातें…

वामन द्वादशी के शुभ मुहूर्त (Vaman dwadashi 2022 Shubh Muhurat)
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 6 सितंबर, मंगलवार की रात 3 बजे से 7 सितंबर, बुधवार की रात लगभग 12 बजे तक रहेगी। चूंकि द्वादशी तिथि का सूर्योदय 7 सितंबर को होगा, इसलिए इसी दिन वामन द्वादशी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन मुद्गर, छत्र और शोभन नाम के 3 शुभ योग बनेंगे। 

इस विधि से करें वामन देव की पूजा (Vaman dwadashi Puja Vidhi)
- वामन द्वादशी की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। इसके बाद एक साफ स्थान पर वामन देव की प्रतिमा स्थापित करें और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद पुन: शुद्ध जल से अभिषेक करें। 
- भगवान वामन को पीले वस्त्र चढ़ाएं। हार-फूल से श्रृंगार करें। धूप-दीप जलाएं। विष्णु जी के मंत्रों का जप करें। अपनी इच्छा अनुसार भोग लगाएं और वामन भगवान की कथा पढ़ें या सुनें।
- पूजा के बाद एक मिट्टी के कलश या छोटी मटकी में दही, चावल और शकर भरकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें। ऐसा न कर पाएं तो किसी मंदिर में भी इन चीजों का दान कर सकते हैं।
- व्रती (व्रत करने वाला) को इस दिन अन्न नहीं खाना चाहिए। फलाहार कर सकते हैं। अगले दिन (8 सितंबर, गुरुवार) एक बार पुन: वामन देव की पूजा करें। ब्राह्मणों को भोजन करवाएं। इसके बाद स्वयं भोजन करें।

ये है वामन द्वादशी की कथा (Vaman dwadashi Katha)
सतयुग में दैत्यराज बलि ने स्वर्ग पर अधिकार करने के लिए एक यज्ञ का आयोजन किया। तब भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर उसके पास गए और तीन पग में दान में मांगी। बलि ने उन्हें दान देने का संकल्प ले लिया। भगवान वामन ने एक पग से पृथ्वी, दूसरे से आकाश नाप लिया। तब राजा बलि ने तीसरा पैर उसके सिर पर रखने को कहा। ऐसा करते ही बलि पाताल में चला गया। भगवान वामन उसकी दानवीरता से प्रसन्न हुए और उसे पाताल का स्वामी बना दिया।

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