यह कहानी बालाघाट के एक गांव में रहने वाले गरीब आदिवासी परिवार की है। इन मासूम बच्चों को नहीं मालूम कि उसके पिता कब हास्पिटल से घर लौटेंगे। ताई उन्हें संभाल रही है। लेकिन उसके पास भी बच्चों को खिलाने के लिए कुछ नहीं है। यह खबर जब आग की तरह फैली..तो प्रशासन मदद को आगे आया। बच्चों को कपड़े दिलवाए गए और खाने-पीने का सामान।

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बालघाट, मध्य प्रदेश. जिंदगी में कब कौन-सी मुसीबत टूट पड़े, किसी को नहीं पता होता है। इन मासूम बच्चों की जिंदगी में भी एक महीने में पूरी तरह बदल गई। महीनेभर पहले बच्चे को जन्म देने के बाद मां की मौत हो गई। अब जंगल से लकड़ियां काटकर अपने बच्चों का पेट भर रहे पिता पर रीछ ने हमला कर दिया। वो अस्पताल में है। इन चारों मासूमों को फिलहाल उसकी ताई संभाल रही है। लेकिन परिवार की हालत ऐसी है कि खाने के लाले पड़े हुए हैं। हालांकि जब इन बच्चों की परेशानी मीडिया के जरिये प्रशासन तक पहुंची, तो उनकी मदद की गई। बच्चों को कपड़े दिलवाए गए और खाने-पीने का सामान।


मां के बिना मायूस हैं बच्चे
मामला परसवाड़ा अंतर्गत वन ग्राम कुकड़ा का है। मंगलवार को प्रशासन ने एक टीम भेजकर बच्चों की मदद कराई। उन्हें कपड़े दिलवाए और खाने-पीने का सामान। कलेक्टर दीपक आर्य ने इन बच्चों के पिता व्यक्ति इंदलसिंह को रेडक्रास की ओर से 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी तत्काल मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। बता दें कि इस गांव में बैगा आदिवासी रहते हैं। इनमें से ज्यादातर की माली हालत बेहद खराब है। कलेक्टर ने इन बच्चों के रहने-खाने और पढ़ाई की व्यवस्था कराने के निर्देश भी दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि इस परिवार को प्रशासन आवास दिलवाएगा। वहीं, स्वास्थ्य विभाग से कहा गया है कि इंदलसिंह को बेहतर उपचार कराया जाए, ताकि वो जल्द ठीक होकर अपने बच्चों के पास जा सके।


बच्चों की फिक्र में पिता के निकले आंसू..
इंदलसिंह का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसके इन चार बच्चों में सबसे बड़ा बसंत (7), दूसरा मंगलू (5), तीसरी लड़की रजनी (4) और सबसे छोटा 1 महीने का संतलाल है। इस बच्चे के जन्म के बाद मां की मौत हो गई। इंदलसिंह जब जंगल में लड़कियां काटने गया था, तभी रीछ ने हमला किया था। उसक दोनों पैरों में फ्रैक्चर है। अपने बच्चों की फिक्र में पिता की आंखों में आंसू निकल आए। उधर, क्षेत्र के विधायक रामकिशोर कावरे को जब इसकी जानकारी लगी, तो उन्होंने भी पीड़ित परिवार तक राहत सामग्री पहुंचवाई।