ग्वालियर के कुटुंब न्यायालय में एक पति-पत्नी का अनोखा मामला देखने को मिला। जहां दोनों एक-दूसरे से अलग रहने के लिए अदालत आए थे। लेकिन जब जज ने उनको समझाया तो उन्होंने फिर अपनी गृहस्थी बसाई और कभी न झगड़ने का वादा भी लिया।

ग्वालियर. फैमिली कोर्ट में आए दिन ऐसे मामला सामने आ रहे हैं जहां पति-पत्नी मामूली सी बात पर तलाक तक ले लेते हैं। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के कुटुंब न्यायालय में देखने को मिला। जब एक दंपती को न्यायधीश ने समझाकर एक साथ रहने के लिए कहा। 

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दो साल से अलग रह रहे थे दोनों...
दरअसल, यह अनोखा मामला ग्वालियर की फैमिली कोर्ट में शनिवार को सामने आया था। जहां जरा सी बात पर दो साल से अलग रह रहे पति-पत्नी आए हुए थे। दोनों का एक बच्चा भी है, जो फिलहाल महिला के साथ रहता है। लेकिन बेटे को अपने साथ रखने के लिए पति ने अदालत में दावा पेश किया था। जहां दंपती की काउंसलिंग की गई थी। 

जज की बात सुनते ही इमोशनल हो गए पति-पत्नी
अदालत में अतिरिक्त कुटुंब न्यायाधीश हितेंद्र सिंह सिसौदिया ने दोनों को समझाते हुए कहा-आप दोनों की लड़ाई का असल आपके बेटे पर भी पड़ेगा। इसके चक्कर में उस मासूम का पूरा भविष्य खराब हो जाएगा। क्योंकि मां के साथ-साथ बेटे को पिता की भी जरूरत होती है। इससे अच्छा होगा कि आप लोग आपसी मतभेद भुलाकर अपने बच्चे की खातिर फिर से एक हो जाओ। जज की बात सुनते ही दोनों इमोशनल हो गए और आखों से आंसू निकलने लगे। 

अपने बेटे की खातिर एक साथ रहने का लिया निर्णय
जज की बात सुनते ही दोनों ने अपने बेटे की खातिर एक साथ रहने का निर्णय लिया। अपनी-अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी। जहां पति-पत्नी ने अदालत में ही एक-दूसरे को फूल माला पहनाकर और गिले-शिकवे मिटाकर गले लगाया। साथ कभी दोबारा ना झगड़ने का वादा भी किया और इस तरह दो साल भी फिर एक हो गए।