बेशक नागपंचमी पर नागों की पूजा होती है, लेकिन कोई भी इनके साथ रहना नहीं चाहेगा। अगर घर में एक सांप निकल आए, तो लोगों के जैसे प्राण छूट जाते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित नागचुन नामक गांव के हर घर में आपको नाग और अन्य जहरीले सांप विचरण करते दिख जाएंगे। लोगों को सांपों के बीच रहने की आदत पड़ गई है। न लोग डर की वजह से इन्हें मारते हैं और न ही सांप किसी को नुकसान पहुंचाते हैं। जानिए पूरी कहानी...

खंडवा, मध्य प्रदेश. सांप का नाम ही लोगों के बदन में सिरहन पैदा कर देता है। सोचिए..अगर सांप सामने आ जाए, तो क्या होगा? बेशक नागपंचमी पर नागों की पूजा होती है, लेकिन कोई भी इनके साथ रहना नहीं चाहेगा। अगर घर में एक सांप निकल आए, तो लोगों के जैसे प्राण छूट जाते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित नागचुन नामक गांव के हर घर में आपको नाग और अन्य जहरीले सांप विचरण करते दिख जाएंगे। लोगों को सांपों के बीच रहने की आदत पड़ गई है। न लोग डर की वजह से इन्हें मारते हैं और न ही सांप किसी को नुकसान पहुंचाते हैं। यह गांव खंडवा शहर के नजदीक है। इस गांव का नाम भी सांपों की वजह से पड़ा है। यहां इतनी संख्या में सांप हैं कि अकसर उन्हें घर से बाहर छोड़ने के लिए चुन-चुनकर पकड़ना पड़ता है। इसी वजह से इस गांव का नाम नागचुन पड़ गया। इस गांव के खेत-खलिहान और घरों के किचन, बेडरूम..कपड़ों की अलमारी आदि सभी जगह सांप मिल जाएंगे। 

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यह जमीन सांपों के रहने के लिए अच्छी है..
सर्प विशेष राजेश सिंह ने एक मीडिया हाउस को बताया कि इस गांव की जगह सांपों के रहने के लिए अच्छी है। यहां बांस के पेड़, तालाब, नहर के अलावा चट्टानी इलाके हैं। यह सांपों के रहने के लिए सबसे अच्छी जगह है। यहां रहने वाले लोग कहते हैं कि उन्होंने कभी नहीं सुना कि किसी सांप ने नुकसान पहुंचाया हो। इस गांव में सांप पकड़ने वालों का प्रवेश निषेध है। यहां आपको सबसे जहरीले सांप जैसे कोबरा, इंडियन ग्रेट, पद्मा नागिन, रसैल वाइपर, धामन आदि के अलावा घोड़ा पछाड़ और लंबे अजगर भी दिखाई दे जाएंगे। इस गांव की आबादी करीब 1000 है।

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