18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के बाद शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। एकनाथ शिंदे और देवेन्द्र फडणवीस ने हाल ही में पीएम मोदी, अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। 

मुंबई. महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे कैबिनेट का विस्तार 18 जुलाई के बाद हो सकता है। 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के बाद शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। इस बात के संकेत शिंदे गुट के विधायकों ने दिए हैं। मौजूदा समय में एकनाथ शिंदे और देवेन्द्र फडणवीस ही कैबिनेट में शामिल हैं। इन्होंने 30 जून को सत्ता परिवर्तन के बाद शपथ ली थी। 

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

शिंदे खेमे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के बीच चल रही कानूनी लड़ाई के कारण मंत्रिमंडल विस्तार में देरी हो रही सवाल के जवाब में शिंदे गुट के प्रवक्ता दीपक केसरकर ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार में कोई कठिनाई नहीं है। उन्होंने कहा कि 13 जुलाई को नई दिल्ली में अगले राष्ट्रपति के चुनाव के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक है और उनके समूह का एक प्रतिनिधि इसमें शामिल होगा। उन्होंने कहा कि 18 जुलाई को मतदान से पहले 16 और 17 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी होगी। शीर्ष संवैधानिक पद के लिए निर्वाचकों में संसद सदस्य और विधायक शामिल होते हैं। ऐसे में कैबिनेट में शामिल होने वाले विधायकों को जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी विधायक अभी राष्ट्रपति के चुनाव में बिजी हैं। 

14 जुलाई को मुंबई आएंगी द्रौपदी मुर्मू
उन्होंने बताया कि 14 जुलाई को बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद की कैंडिडेट द्रौपदी मुर्मू समर्थन मांगने के लिए मुंबई आ रही हैं। बता दें कि कैबिनेट विस्तार से पहले शिंदे और फडणवीस ने पिछले हफ्ते नई दिल्ली का दौरा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात की थी।

क्या है मामला
बता दें कि महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के बागी होने के बाद उद्धव ठाकरे को इस्तीफा देना पड़ा था। मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में एकनाथ शिंदे गुट के 16 विधायकों के अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने इस मामले में स्पीकर को अयोग्यता की याचिका पर फैसला लेने से रोका है।

इसे भी पढ़ें- जलमग्न हुआ नासिक: 7 तस्वीरों में देखिए गोदावरी नदी का विकराल रूप, डूब गए सारे मंदिर